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Kia कार के DPF से तंग आया ओनर, अब मिलेगा ₹11 लाख का रिफंड, ब्याज अलग से

कुर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डीलर को आदेश दिया कि वे कार मालिक को 10.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम मूल्य) के साथ 9 फीसदी वार्षिक ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 10,000 रुपये का अलग से भुगतान करें.

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Kia Sonet Diesel में वारंटी पीरियड के दौरान ही डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) में दिक्कतें आने लगी थीं (image courtesy: AI)

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  • कुर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने खराब DPF समस्या के कारण KIA कार के डीलर और निर्माता को ग्राहक को एक्स-शोरूम मूल्य के करीब ₹10.99 लाख वापस देने का आदेश दिया।
  • रवींद्रनाथ ने वारंटी और एक्सटेंडेड वारंटी के बावजूद बार-बार DPF समस्या के कारण कई मरम्मत करवाए, लेकिन कंपनी द्वारा समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
  • उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद, KIA को ग्राहकों को रिफंड, ब्याज और मुआवजे के साथ कार सेवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे, जिसमें अपील की संभावना बनी हुई है।

जब भी आप कार खरीदते हैं तो आपको कंपनी की तरफ से कुछ सालों की वारंटी मिलती ही मिलती है. कई बार हम एक्स्ट्रा पैसा देकर extended warranty भी लेते हैं, ताकि अगर गाड़ी में कोई दिक्कत हो तो ‘बेकार’ में परेशान नहीं होना पड़े. लेकिन अगर वारंटी में कोई दिक्कत हो और डीलर से लेकर कार कंपनी कस्टमर को परेशान करे तो क्या होता है. आप एकदम ठीक समझे. उपभोक्ता फोरम की एंट्री होती है. हालिया फैसले में फोरम ने, एक डीजल कार में बार-बार (DPF) की समस्या पाए जाने के बाद कार निर्माता और उसके डीलर को कार के एक्स-शोरूम मूल्य का रिफंड देने का आदेश दिया है.

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कुर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Kurnool District Consumer Disputes Redressal Commission) ने सेवा में कमी पर निर्णय सुनाते हुए ₹10.99 लाख के रिफंड, 9 फीसदी ब्याज और ₹10,000 के मुआवजे का आदेश दिया है.

Kia ने कस्टमर को परेशान किया

आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित सुंकेसुला रोड के रहने वाले डॉक्टर रवींद्रनाथ ने 12 मार्च 2022 को 13.69 लाख रुपये में BS6 स्टैंडर्ड वाली KIA SONET (डीजल) खरीदी थी. कार पर 11 मार्च 2025 तक कंपनी की तरफ से वारंटी मिली थी. इसके अलावा, रवींद्रनाथ ने एक्सटेंडेड वारंटी भी ली थी, जिससे कवरेज 12 मार्च 2027 तक बढ़ गया था. कुछ समय बाद कार में डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) से जुड़ी समस्याएं आने लगीं. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रवींद्रनाथ कई बार KIA के अधिकृत सर्विस सेंटर गए. इस दौरान कार की कई तरह की मरम्मत और सर्विसिंग की गई, जिनमें DPF चेकिंग, सेंसर बदलना, बैटरी बदलना, DPF यूनिट को निकालकर उसकी मरम्मत/सफाई करना और ECM सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना शामिल था. 

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इसके अलावा, रवींद्रनाथ को अपनी KIA SONET का खराब सेंसर बदलने के लिए 13,000 रुपये भी देने पड़े. उन्हें बैटरी बदलने की सलाह भी दी गई थी, हालांकि उनके अनुसार बैटरी अच्छी स्थिति में थी. कार कंपनी द्वारा DPF यूनिट की मरम्मत और ECM सॉफ्टवेयर अपग्रेड जैसे बड़े काम कराए जाने के केवल 338 किमी चलने के बाद भी DPF की समस्या फिर से उभर आई. थक हारकर रवींद्रनाथ, कुर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग पहुंचे. 

इस मामले में शामिल कार निर्माता सहित कई कंपनियां अपने डीजल वाहनों में यूरिया टैंक लगाती हैं जैसे हुंडई, KIA, और महिंद्रा एंड महिंद्रा. हालांकि टाटा की डीजल कारों में अभी यह फीचर नहीं है. डीजल पार्टिकुलेट फ़िल्टर (DPF) के बारे में जानने के लिए नीचे दी गए लिंक पर क्लिक करें. 

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कोर्ट ने सब ‘फिल्टर’ कर दिया

रवींद्रनाथ ने फोरम को बताया कि कार निर्माता के निर्देशों का सख्ती से पालन करने, जैसे मैनुअल DPF रीजनरेशन और हाइवे पर वाहन चलाने के बावजूद भी DPF की समस्या खत्म नहीं हुई. दूसरी ओर, कार निर्माता ने उपभोक्ता आयोग में कहा कि संबंधित कार अब तक 43,782 किमी से अधिक चल चुकी है और खरीद के बाद से सड़क पर चलने योग्य (roadworthy) बनी हुई है. कंपनी ने वारंटी के नियमों और शर्तों, गलत इस्तेमाल, ड्राइविंग पैटर्न, ईंधन की गुणवत्ता का दरेरा भी दिया. 

वहीं, सर्विस सेंटर का कहना था कि थोड़ी दूरी (लगभग 300-500 किमी) चलाने के बाद DPF अलर्ट का बार-बार आना रवींद्रनाथ के ड्राइविंग पैटर्न और निर्धारित रीजनरेशन प्रप्रोसेज का पालन नहीं करने की वजह से है. हालांकि कोर्ट ने इन सब बातों को नहीं माना.

उपभोक्ता आयोग ने साफ किया कि हालांकि कार में निर्माण दोष (Manufacturing Defect) की बात अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हो सकी, लेकिन यह पाया गया कि कार निर्माता और उसके डीलर ने वारंटी पीरियड के दौरान समस्या का सही ढंग से समाधान नहीं किया या कोई प्रभावी उपाय प्रदान नहीं किया. इसलिए उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी माना.

नतीजतन, कोर्ट डीलर को आदेश दिया कि वे कार मालिक को करीब 11 लाख रुपये (एक्स-शोरूम मूल्य) के साथ 9 फीसदी वार्षिक ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करें. ये आदेश जिला फोरम का है और अपील में चुनौती दिए जाने के लिए खुला है.

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