शोरूम से निकलते ही और कुछ दूर चलते ही अगर आप भी नई कार को मोडिफिकेशन के लिए कार पार्ट्स की दुकान पर खड़ा कर देते हैं तो तनिक ब्रेक लगाइए. जरा जान तो लीजिए कि नई कार में क्या लगवाना चाहिए और क्या नहीं. अगर नहीं जाना तो जेब तो हल्की होगी ही, लीगल पचड़े भी आ सकते हैं. कार एक्सेसरीज की दुकान पर मिलने वाला हर प्रोडक्ट आपकी कार के लिए नहीं बना है. कुछ से तो लंबा नुकसान भी हो सकता है. कुछ एक्सेसरीज वाकई काम की हैं. आप बे-कार में परेशान मत हो, हम दोनों बताते.
इन एक्सेसरीज से कार को 'चार चांद' लगेंगे, लेकिन कानूनी पचड़ों में फंसेंगे, जान का खतरा होगा
कार एक्सेसरीज की दुकान पर मिलने वाला हर प्रोडक्ट आपकी कार के लिए नहीं (car accessories you should not have) बना है. इनमें से कुछ से तो लंबा नुकसान भी हो सकता है. जान लीजिए कि नई कार में क्या लगवाना चाहिए और क्या नहीं. अगर नहीं जाना तो जेब तो हल्की होगी ही, लीगल पचड़े भी आ सकते हैं.

# मेटल गार्ड: गाड़ी में इंजन के आगे बोनट के पास लगने वाले मेटल गार्ड या बम्पर गार्ड देखने में तो रौला जमाते हैं लेकिन इनको लगाना गैरकानूनी है. इन्हें लगवाना मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 52 और धारा 190(2) का उल्लंघन है. सेक्शन 52 मैन्युफैक्चरर के ओरिजिनल डिज़ाइन में बदलाव करने वाले अनधिकृत स्ट्रक्चरल बदलावों पर रोक लगाता है. जबकि धारा 190(2) के तहत आमतौर पर 1,000 से 5,000 रुपये तक का जुर्माना होता है. ट्रैफिक पुलिस के पास इन्हें मौके पर ही हटाने का अधिकार होता है.
कानून और जुर्माने के साथ एक और जरूरी बात. मेटल गार्ड लगे होने से एक्सीडेंट होने पर गाड़ी के एयर बैग नहीं खुलने का भी अंदेशा होता है. मॉडर्न कारें खास 'क्रम्पल ज़ोन' और काइनेटिक शॉक एब्जॉर्वर के साथ बनाई जाती हैं. मेटल गार्ड इन ज़ोन को बायपास कर देते हैं, जिससे टक्कर के समय टकराने की ताकत सीधे कार के चेसिस और यात्रियों तक पहुंचती है. मेटल गार्ड की वजह से एयर बैग के सेंसर को पता ही नहीं लगता कि कोई टक्कर हुई है. इसलिए मत ही लगाइए, सीधा जान का खतरा है.

# फ्लोर लेमिनेशन: गाड़ी में ये करवाने का जिगरा कैसे आता है? माने नई गाड़ी की पूरी सीटें खुलवाने में मन नहीं घबराता. दरअसल इसमें गाड़ी के फर्श पर पन्नी बिछाई जाती है ताकि अगर गाड़ी में पानी या तरल पदार्थ गिरे तो अंदर नहीं जाए. लेकिन भईया, अगर किसी वजह से इस पन्नी के नीचे पानी चला गया तो फिर बॉडी को जंग लगने से कौन बचाएगा. दुख की बात ये है कि आपको बाहर से पता भी नहीं चलेगा. पन्नी छोड़िए, बस नॉर्मल मेट बिछा लीजिए. इनको निकालकर साफ करना भी आसान होता है.
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# कोटिंग की कटिंग: टेफ्लॉन, सिरामिक और PPF कोटिंग सिर्फ पैसों की बर्बादी है. आप चाहे सस्ती वाली टेफ्लॉन कोटिंग लगा लो या बहुत महंगी वाली PPF. कुछ दिनों और कुछ सालों में इसके चिपरे उखड़ने लगते हैं. अगर गाड़ी का कोई पार्ट बदला गया तो फिर अलग से कोटिंग करवानी पड़ती है. गाड़ी का पेंट बहुत जबरदस्त होता है, इसलिए कोटिंग रहने दीजिए. हां जो आपकी गाड़ी रोज 12 घंटे कड़ी धूप में खड़ी रहती है या फिर आप कोस्टल इलाके में रहते हैं तो अच्छी क्वालिटी की PPF कोटिंग करवा सकते हैं, वो भी रंगीन गाड़ियों पर. सफेद गाड़ी पर भूलकर मत करवाना. कुछ समय बाद चिपरे अलग नजर आएंगे.

# साइड स्टेप: अगर घर में बड़े बुजुर्ग हैं तो इसको लगवाना ठीक रहता है. उनको उतरने चढ़ने में आसानी होती है. बाकी गाड़ी का लुक बदलने के लिए इनको लगवाना कोई फायदे का सौदा नहीं.
# क्रोम का जोन: गाड़ी के हैंडल से लेकर दरवाजे और लोगो पर लगने वाले इस सिल्वर जैसे चमकते प्रोडक्ट से दूर रहिए. कुछ दिन तो ये चमकता है, उसके बाद काला पड़ जाता है और आपकी गाड़ी का लुक खराब करता है. इसको उतारते समय गाड़ी का पेंट बाहर आ जाता है, वो अलग नुकसान है. इसी तरह रेन वाइजर लगाने का मतलब तभी है जब आप हल्की बारिश में ग्लास थोड़े से नीचे करके हल्लु-हल्लु ड्राइव करते हों. अगर गाड़ी हमेशा AC में चलनी तो फिर रहन दो.
# डैशकैम: ये लगवाना ही लगवाना है, वो भी किसी अच्छी कंपनी का. डैशकैम कई तरीके से काम आता है. जैसे सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाए तो पुलिस से लेकर बीमा क्लेम में. अगर कोई बिला-वजह आपसे सड़क पर लड़ाई कर रहा तो पूरे चांस हैं कि डैशकैम देखकर सीधा हो जाएगा.
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