एक होता है 'कंप्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस' (Comprehensive Insurance) जो आपकी गाड़ी के साथ नत्थी होकर आता है. फिर एक होता है Add-on वाला (important car insurance add ons) इंश्योरेंस जो आपको लेना पड़ता है या कहें लेना चाहिए. 'कंप्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस' नॉर्मल टूट-फूट और मैकेनिकल ब्रेकडाउन कवर करेगा. आंधी तूफान में पेड़ गिरने से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं करेगा. गाड़ी अगर पानी में डूब गई और इंजन में पानी गया तो रिपेयर में आपकी जेब खाली होगी. Add-on है तो काम का. लेकिन कौन सा? क्योंकि ये भी कई सारे हैं. कुछ काम के और कुछ ‘बे-कार’. हम आपको बताते हैं कि कौन से Add-on पर आपको पैसा एड करना चाहिए और कौन से पर ऑफ.
Add-on इंश्योरेंस नहीं लिए तो गाड़ी लेकर पानी में मत जाना!
'कंप्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस' गाड़ी में टूटफूट से लेकर अपने आप से आई खराबी तो कवर करता है लेकिन इंजन में पानी भरने पर एक्सीडेंट में गाड़ी के पूरी तरह खत्म हो जाने पर आपको पूरा कवर नहीं देता. ऐसे में इंश्योरेंस के साथ आने वाले Add-on काम (important car insurance add ons) आते हैं.

ये वाला Add-on तो अपने बीमा कवर में जोड़ना ही है. "रिटर्न टू इनवॉइस" (Return to Invoice) एक ऐड-ऑन कवर है, जिसे आप अपनी कंप्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ ले सकते हैं. ये तब काम आता है जब, आपकी कार चोरी हो जाए. या फिर इतनी बुरी तरह डैमेज हो जाए कि रिपेयर का मतलब ही न बचे.
ऐसे केस में बीमा कंपनी आपको गाड़ी की पूरी ऑन-रोड कीमत देती है. इसमें एक्स-शोरूम प्राइस, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज, सब शामिल होता है. मिसाल के तौर पर, मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये की कार खरीदी. टैक्स और रजिस्ट्रेशन मिलाकर कुल खर्च हुआ 11 लाख. दो साल बाद कार चोरी हो गई. RTI पॉलिसी होने पर आपको पूरे 11 लाख रुपये तक का क्लेम मिल सकता है.
ध्यान रखें कि RTI कवर सिर्फ नई या 5 साल से कम पुरानी गाड़ियों पर ही लागू होता है. कवरेज बढ़ता है, तो खर्च भी बढ़ता है. RTI लेने पर आपको नॉर्मल पॉलिसी से लगभग 10% ज़्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है. ज्यादातर बीमा कंपनियां RTI सिर्फ नई गाड़ियों के लिए देती हैं. कुछ कंपनियां इसे 2-3 साल पुरानी कारों पर भी देती हैं.
इंश्योरेंस में एक्स्ट्रा पैसा खर्च करके इसको लेने का मतलब नहीं. सोशल मीडिया पर आपको ऐसे कई वाकये मिल जाएंगे जहां गाड़ियां घंटों सर्विस वैन के आने के इंतजार में खड़ी रहीं. दरअसल बीमा कंपनियां इसके लिए थर्ड पार्टी पर निर्भर होती हैं तो उनको टाइम से सर्विस मिलना मुश्किल होता है.
रोड साइड असिस्टेंटइसके उलट कार कंपनियों का रोड साइड असिस्टेंट ज्यादा मुफीद होता है और मुफ़्त भी. ज्यादातर कार कंपनियां नई गाड़ी के साथ दो साल का रोड साइड असिस्टेंट फ्री देती हैं. एक बार उसे चेक कीजिए.
ये भी लेना ही चाहिए. आपके मन में सवाल होगा कि मेरे पास तो 'कंप्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस' है जिसमें आंधी, तूफान, बाढ़ और भूकंप से होने वाला नुकसान कवर है तो फिर अलग से पैसा क्यों देना. जनाब इसमें इंजन के अंदर पानी घुसना, गियरबॉक्स और हाइड्रोस्टेटिक लॉक कवर नहीं होते. गाड़ी के इंजन में में किसी भी वजह से अगर पानी घुसा, माने सड़क पर बन गए तालाब से या फिर बाढ़ से या फिर आपके हेवी ड्राइवर बनने से तो बीमा कंपनी एक पैसा नहीं देने वाली. इसे आपकी लापरवाही माना जाएगा. लेकिन जो आपके पास इंजन प्रोटेक्शन Add-on है तो फिर आपके लाखों रुपये बच जाएंगे.

ये भी पढ़ें: 5 लाख का स्कूटर सवा लाख में बेचा, Ather कैसे बनी ई-स्कूटर किंग?
Consumables Coverछोटी (हैचबैक), मझोली (सेडान), कॉमपैक्ट एसयूवी और एसयूवी के लिए भी इसकी जरूरत नहीं. ये वाला कवर महंगी गाड़ियों के लिए ही है. इसमें इंजन ऑइल, नट-बोल्ट और गाड़ी में डलने वाला ऑइल कवर होता है जो नॉर्मल गाड़ियों में उतना महंगा नहीं. इसलिए इसकी जरूरत नहीं, अगर जो आपके पास अल्ट्रा महंगी गाड़ी नहीं है तो.
Zero Depreciationऊपर के चारों तो आपके हिसाब से देख लीजिए. लेकिन जीरो डेप्रिसिएशन कवर जरूर लीजिए. अगर गाड़ी खरीदने के पांच साल के अंदर एक्सीडेंट हो जाता है तो बीमा कंपनी सिर्फ फ़ाइल चार्ज लेकर आपको भुगतान करेगी. ये वाला कवर तब भी काम आता है जब आपसे किसी कि गाड़ी में लग जाए या कोई आपकी गाड़ी ठोककर चला जाए.
वीडियो: E20 Fuel से खराब हुई गाड़ी, अदालत ने कस्टमर को कंपनी से नई गाड़ी दिलवाई











