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एथेनॉल से गाड़ी खराब हुई तो हर दूसरा आदमी कोर्ट जाने को तैयार, ये सर्वे सरकार की टेंशन बढ़ा देगा!

एक सर्वे के मुताबिक, भारत में E20 फ्यूल यानी Ethanol ब्लेंड पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान होने के मामले में लगभग आधे लोग कंज्यूमर कोर्ट जाने या कानूनी कार्रवाई करने को तैयार हैं. इस सर्वे में देश भर के 316 जिलों के लोगों ने अपनी राय बताई.

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सर्वे में हिस्सा लेने वाले लगभग आधे लोग कंज्यूमर कोर्ट जाने को तैयार हैं. (सांकेतिक फोटो: AI)

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  • लोकलसर्कल्स के सर्वे के अनुसार, भारत में E20 फ्यूल से होने वाले नुकसान को लेकर करीब 45% पेट्रोल गाड़ी मालिक कानूनी कार्रवाई करने या कंज्यूमर कोर्ट जाने के लिए तैयार हैं।
  • E20 फ्यूल की वजह से इंजन खराबी और परफॉर्मेंस घटने की शिकायतों के कारण रायपुर कंज्यूमर कमीशन ने मारुति सुजुकी को ग्राहक को नई कार देने या मुआवजा देने का आदेश दिया था।
  • मारुति सुजुकी के आदेश को चुनौती देने के बीच सरकार और उपभोक्ता ईंधन विकल्पों जैसे E5, E10 फ्यूल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं ताकि उपभोक्ता अपनी गाड़ियों के अनुसार सही विकल्प चुन सकें।

भारत में एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल (E20 Fuel) को लेकर विवाद जारी है. हाल में ही जारी एक सर्वे के मुताबिक, अगर पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों को लगता है कि E20 पेट्रोल से उनकी गाड़ियों को बड़ा नुकसान हुआ है, तो उनमें से करीब आधे लोग मुआवजा मांगने के लिए तैयार हैं. सर्वे में हिस्सा लेने वाले लगभग आधे लोग कंज्यूमर कोर्ट जाने या कानूनी कार्रवाई करने के लिए राजी नजर आए.

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सर्वे में क्या पता चला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकलसर्कल्स ने 17 जुलाई को एक नया सर्वे जारी किया. इस सर्वे में 316 जिलो के 22,000 से ज्यादा पेट्रोल गाड़ी मालिकों से जवाब लिए गए. उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें लगता है कि ‘एथेनॉल वाले पेट्रोल’ (E20 पेट्रोल) से उनकी गाड़ी को बड़ा नुकसान हुआ है, तो वे नुकसान की भरपाई के लिए क्या कदम उठाएंगे. सर्वे के नतीजों के मुताबिक,

- 31% लोगों ने कहा कि वे कंज्यूमर कोर्ट जाएंगे.

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- 14% लोगों ने कहा कि वे उपलब्ध सभी कानूनी रास्ते अपनाएंगे.

कुल मिलाकर, 45% लोगों ने कहा कि वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे. वहीं,

- 18% लोगों ने कहा कि वे गाड़ी बनाने वाली कंपनी और तेल कंपनी, दोनों से मुआवजा मांगेंगे. 

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- 9% लोग सिर्फ गाड़ी बनाने वाली कंपनी से मुआवजा मांगेंगे.

इसका मतलब है कि 27% लोग सबसे पहले सीधे गाड़ी बनाने वाली कंपनियों या फ्यूल कंपनियों से मुआवजा मांगेंगे, जबकि 14% लोगों ने कहा कि वे इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएंगे और 14% लोग अभी कुछ तय नहीं कर पाए हैं.

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(फोटो साभार: लोकलसर्कल्स) 
ग्राहक को नई कार देने का फैसला

लोकलसर्कल्स का यह सर्वे रायपुर कंज्यूमर कमीशन के 14 जुलाई के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें मारुति सुजुकी ‘ग्रैंड विटारा’ के एक मालिक ने E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद इंजन में बार-बार खराबी, परफॉर्मेंस में कमी, गाड़ी का बंद हो जाना और फ्यूल एफिशिएंसी घटने की शिकायत की थी.

कमीशन ने इस मामले में मारुति सुजुकी और उसके डीलर को ग्राहक को नई कार देने या लगभग 20.5 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया. साथ ही, मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया है. मारुति सुजुकी ने इस कमीशन के आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है.

ये भी पढ़ें: एथेनॉल वाले के साथ शुद्ध पेट्रोल का भी ऑप्शन क्यों नहीं? सरकार ने जवाब दे दिया

कमीशन के फैसले से भरोसा बढ़ा

ताजा सर्वे से पता चलता है कि कमीशन के इस फैसले ने गाड़ी मालिकों का यह भरोसा बढ़ाया है कि अगर उन्हें लगता है कि E20 फ्यूल से उनकी गाड़ियों को नुकसान पहुंचा है, तो भी वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं.

इस सर्वे में यह भी सुझाव दिया गया कि E20 के साथ-साथ कम एथेनॉल वाले पेट्रोल ब्लेंड (जैसे E5 या E10) भी उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक अपनी गाड़ी की क्षमता के हिसाब से सही ईंधन चुन सकें. सरकार ने पेट्रोल पंपों पर केवल E20 फ्यूल की बिक्री को अनिवार्य किया है, लेकिन लोग पेट्रोल पंपों पर E5 या E10 फ्यूल को भी उपलब्ध कराने की मांग रह रहे हैं.

वीडियो: E20 Fuel से खराब हुई गाड़ी, अदालत ने कस्टमर को कंपनी से नई गाड़ी द‍िलवाई

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