E20 फ्यूल या Ethanol ब्लेंड पेट्रोल से माइलेज गिरने की बात तो अब सरकार भी मानती है. सरकार के मुताबिक E20 फ्यूल से गाड़ी का माइलेज थोड़ा बहुत कम होता है. लेकिन सरकार गाड़ियों में टूट-फूट से इंकार करती है. सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल से इंजन की ड्यूरेबिलिटी, गाड़ी की परफॉर्मेंस, उसे चलाने या भारत स्टेज VI (BS-VI) उत्सर्जन पर कोई खास बुरा असर नहीं पड़ता है. लेकिन BS-III वाहनों और 2016 से पहले बने कुछ गाड़ी मॉडलों में रूटीन सर्विसिंग के दौरान रबर के कुछ हिस्सों या गैस्केट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है. माने सच क्या है वो अभी नहीं पता.
एथेनॉल वाले पेट्रोल से कार में टूट-फूट की सता रही चिंता, तो ये तीन काम कर डालिए
E20 फ्यूल से अपनी गाड़ी में होने वाली संभावित टूट-फूट और नुकसान को लेकर अगर आप चिंतित हैं, तो तीन काम कर लीजिए. ये तीन अपग्रेड आपकी कार के इंजन को खराब होने से बचा सकते हैं.

लेकिन जो आप E20 फ्यूल से अपनी गाड़ी में होने वाली संभावित टूट-फूट और नुकसान से परेशान हैं तो तीन काम कर लीजिए. तीन अपग्रेड (3 Simple Upgrades to Protect Your Engine from E20) आपकी कार के इंजन को खराब होने से बचा सकते हैं.
ये वाला Spark Plugs इस्तेमाल कीजिएअपनी कार के नॉर्मल स्पार्क प्लग को Iridium Spark Plugs से बदल दीजिए. 3000 रुपये में इसका सेट आपको मिल जाएगा. नॉर्मल प्लग में कॉपर लगा होता है, वहीं इसमें इरिडियम का इस्तेमाल होता है. यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है. दरअसल इरिडियम एक बहुत ही मजबूत केमिकल एलीमेंट है. एटोमिक नंबर 77 वाला ये पदार्थ प्लेटिनियम से भी ज्यादा मजबूत है. जहां कॉपर 1085 डिग्री सेल्सियस पर गल जाता है तो इरिडियम 2426 डिग्री सेल्सियस तक अपनी जगह से नहीं हिलता. इसमें आसानी से जंग भी नहीं लगती.

इसलिए कॉपर वाले स्पार्क प्लग कुछ सालों में या कहें कुछ हजार किलोमीटर पर खराब हो जाते हैं, वहीं इरिडियम वाला स्पार्क प्लग कई सालों तक चलता ही रहता है. इरिडियम स्पार्क प्लग से प्रत्येक इग्निशन सामान्य स्पार्क प्लग की तुलना में ज्यादा अच्छे से होता है. मतलब ऊर्जा की बचत होती है. मजबूत होने की वजह से इलेक्ट्रॉयड पर टूट-फूट भी कम होती है.
Fuel System Cleanerकार की भाषा में इसे फ्यूल एडिटिव्स कहते हैं. मार्केट में कई तरह के फ्यूल एडिटिव्स मिलते हैं, मगर आपको सिर्फ Glycol ethers बेस्ड एडिटिव्स इस्तेमाल करना चाहिए. 300-400 रुपये में आने वाले ये एडिटिव्स एथेनॉल और पेट्रोल के बीच आने वाले पानी को रोकते हैं. इनका इस्तेमाल हवाई जहाजों के जेट फ्यूल में बर्फ जमने से रोकने (De-icing) में किया जाता है. Glycol Ethers ईंधन में मौजूद पानी को सोख लेते हैं. इसके साथ ही ये फ्यूल इंजेक्टर, पाइप्स और कंबशन चैंबर पर जमे ग्रीस, जंग और वैक्स को घोलकर साफ करने में भी मदद करते हैं. जब इसको लेने जाएं तो देख लें कि डिब्बे पर Glycol ethers के साथ PDA Antioxidant भी लिखा हो. हर 5000 किलोमीटर पर 1 पूरी बोतल (लगभग 250ml से 300ml) उड़ेल दीजिए.
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एथेनॉल से गाड़ी के रबर गैस्केट के खराब होने की सबसे ज्यादा आशंका है. ऐसे में नॉर्मल फ्यूल पाइप लाइन को FKM (Fluorocarbon Elastomer) या PTFE Fuel Lines से बदलने में ही समझदारी है. 3000-3500 के खर्चे में काम हो जाएगा. FKM Fuel Line एक विशेष प्रकार की हाई-परफॉर्मेंस फ्यूल पाइप होती है, जो आम रबर पाइप के मुकाबले काफी ज्यादा गर्मी और केमिकल्स रिएक्शन झेल सकती है. इस मटेरियल पर एथेनॉल या तीखे केमिकल/फ्यूल का कोई असर नहीं होता.
PTFE (Polytetrafluoroethylene) Fuel Line, जिसे सामान्य भाषा में Teflon Fuel Line भी कहा जाता है. इसकी अंदरूनी पाइप PTFE (Teflon) मटेरियल की बनी होती है, जो बेहद चिकनी, सख्त और नॉन-रिएक्टिव होती है. ये 100 फीसदी एथेनॉल प्रूफ है. माने आपकी गाड़ी में E10, E20, E85 एथेनॉल-ब्लेंड पेट्रोल हो, रेसिंग फ्यूल हो या मेथनॉल. PTFE इनसे दोस्ती नहीं करता है.
गाड़ी की टूट-फूट से बे-कार में परेशान होने से अच्छा पहले ही थोड़ा खर्च कर लीजिए.
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