चलिए आज आपको आपकी प्यारी-दुलारी गाड़ी को स्टार्ट करना बताते (Best way to start your car). अरे उसमें क्या बताना. चाबी लगाई, फिर घुमाई और फिर एक बार और घुमाई. लो जी हो गई गाड़ी हुर्र-हुर्र करके स्टार्ट. हम तो रोज करते हैं. तुम क्या बता रहे.
गाड़ी स्टार्ट होते ही 'हुर्र-हुर्र' करती है? माफ करें आपको चाबी लगाना नहीं आता
गाड़ी को सही तरीके से स्टार्ट नहीं करने से उसकी परफ़ॉर्मेंस पर स्टॉप (Best way to start your car) लग सकता है. इंजन वाली बत्ती भी जल सकती है. इसलिए गाड़ी स्टार्ट करने का सही तरीका जान लीजिए.


अरे दोस्त आप जो कर रहे वो एकदम ‘बे-कार’ तरीका है. एकदम गलत कर रहे. अब बेचारी गाड़ी कुछ कहती नहीं तो इसका मतलब ये नहीं कि उसको कोई दिक्कत नहीं. गाड़ी को सही तरीके से स्टार्ट नहीं करने से उसकी परफ़ोर्मेंस पर स्टॉप लग सकता है. इंजन वाली बत्ती भी जल सकती है. इसलिए गाड़ी स्टार्ट करने का सही तरीका जान लीजिए.
जल्दी का काम शैतान कापिताजी से सुनी कहावत है जो गाड़ी पर एकदम ठीक बैठती है. रात भर से खड़ी गाड़ी को चाबी लगाकर स्टार्ट करना अच्छी बात नहीं. पहले एक बार चाबी घुमाकर इग्निशन ऑन कीजिए. फिर थोड़े देर रुकिए और इंजन ऑयल को फैलने का टाइम दीजिए. ज्यादा नहीं 30-45 सेकंड में काम हो जाता है.
इसके बाद फिर से चाबी घुमाकर गाड़ी स्टार्ट कीजिए. पुश बटन में भी एक बार पहले और फिर रुककर दोबारा दबाना है. स्टार्ट होते ही गाड़ी लेकर भगना नहीं है. अब 2 मिनट का ध्यान करना है ताकि इंजन रमा हो जाए और RPM नीचे आ जाए. स्टार्ट होते गाड़ी जोर से हुर्र-हुर्र करती है. जब हुर्र-हुर्र शांत से ‘हरर’ वाली आवाज में बदल जाए तब गियर लगाओ. इसे कोल्ड स्टार्ट कहते हैं.

गाड़ी स्टार्ट हो गई मगर अभी इंजन गर्म हुआ है. इसलिए एकदम स्पीड नहीं देना हैं. पता चले आप फुल एक्सेलेरेटर दबाकर गाड़ी उड़ा रहे. थांबा भाई. कोल्ड इंजन पर एक्स्ट्रा आरपीएम सीधे-सीधे इंजन को नुकसान पहुंचाता है.
सेल्फ डाउट मत रखो और सेल्फ मत मारोजीवन में सेल्फ डाउट रखना अच्छी बात नहीं. ऐसे ही गाड़ी का सेल्फ मारना भी अच्छा नहीं. माने जो चाबी घुमाने से गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही तो चाबी की मुंडी घुमाने से कछु नहीं होगा. बस गाड़ी का इंजन किचर-किचर की आवाज करेगा. इसलिए अगर गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही तो डैशबोर्ड की तरफ देखिए. शायद वहां कुछ निशान दिखे तो उसके हिसाब से काम कीजिए. गाड़ी के डैशबोर्ड पर इंजन लाइट, मीटर लाइट या टेम्परेचर लाइट दिखने पर सीधे सर्विस सेंटर निकल जाइए. याद रखिए, डैशबोर्ड पर दिखने वाला हर निशान कुछ कहता है.
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कम फ्यूल ज्यादा दिक्कतबूंद-बूंद में ताकत वाला फंडा गाड़ी पर काम नहीं करता. इसलिए गाड़ी को कम फ्यूल पर मत ही चलाइए. जैसे ही कम फ्यूल का सिग्नल दिखे तो पेट्रोल पंप घूम आइए. ईंधन के लेवल कम होने से कूलिंग घट जाती है, जिससे पंप ओवरहीट कर सकता है. नतीजा? पंप खराब हो जाएगा. फ्यूल टैंक के नीचे समय के साथ मिट्टी और जंग के कण जमा हो सकते हैं. जब टैंक लगभग खाली हो जाता है, तो फ्यूल पंप नीचे से यही ईंधन खींचता है. यानी जहां ये कण होते हैं. जिससे फ्यूल फिल्टर जल्दी जाम हो सकता है.
इतना करने के बाद आपको स्टॉप लेने की जरूरत नहीं.
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