The Lallantop

इथेनॉल वाले पेट्रोल से कार खराब होने की चिंता? ये लिक्विड आपके बहुत काम आएगा

फ्यूल एडिटिव्स (Fuel additive) ऐसे खास केमिकल्स या लिक्विड सप्लीमेंट्स होते हैं, जिन्हें पेट्रोल या डीजल में मिलाया जाता है. फ्यूल एडिटिव्स कोई नई चीज नहीं है. कई सालों से इनका इस्तेमाल फ्यूल इंजेक्टर और नॉजल पर जमे कार्बन और कचरे को साफ करने के लिए किया जाता रहा है.

Advertisement
post-main-image
fuel additive का इस्तेमाल फ्यूल इंजेक्टर और नॉजल पर जमे कार्बन और कचरे को साफ करने के लिए किया जाता रहा है

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • भारत में 1 अप्रैल 2026 से E20 फ्यूल का उपयोग अनिवार्य होगा, जिससे गाड़ियों पर इसके असर को लेकर फ्यूल एडिटिव्स के उपयोग की सलाह दी जा रही है।
  • E20 फ्यूल नया होने के कारण इसके प्रभावों का सही आकलन अभी संभव नहीं है, इसलिए गाड़ियों में कार्बन जमा हटाने और इंजन सुरक्षा के लिए एडिटिव्स की आवश्यकता बताई जाती है।
  • फ्यूल एडिटिव्स के चयन में PEA और Glycol Ethers बेस्ड उत्पाद अधिक उपयोगी माने जाते हैं, जबकि माइलेज बढ़ाने वाले और रंगीन ऑक्टेन बूस्टर से बचने की सलाह दी गई है।

E20 फ्यूल यानी Ethanol ब्लेंड पेट्रोल के 1 अप्रैल 2026 से देश में अनिवार्य होने के बाद गाड़ियों में टूट-फूट से लेकर माइलेज में गिरावट को लेकर सड़क से संसद तक बहुत कुछ कहा जा रहा है. क्योंकि E20 फ्यूल अभी नया-नया है, ऐसे में गाड़ियों पर इसके असर के बारे में सही-सही पता कुछ सालों बाद ही चलेगा लेकिन ऑटो एक्सपर्ट इससे बचने के लिए कारों में फ्यूल एडिटिव्स (Fuel additive) डालने की सलाह देते हैं. इससे गाड़ी के ओवरऑल परफ़ॉर्मेंस में सुधार की बात कही जाती है. ठीक बात मगर कौन सा Fuel additive? हम बताते.

Advertisement
क्या होता है Fuel additive

फ्यूल एडिटिव्स ऐसे खास केमिकल्स या लिक्विड सप्लीमेंट्स होते हैं, जिन्हें पेट्रोल या डीजल में मिलाया जाता है. फ्यूल एडिटिव्स कोई नई चीज नहीं है. कई सालों से इनका इस्तेमाल फ्यूल इंजेक्टर और नॉजल पर जमे कार्बन और कचरे को साफ करने के लिए किया जाता रहा है. गाड़ी का पिकअप बेहतर करने और इंजन में होने वाले झटकों (Knocking) को कम करने के लिए इनका इस्तेमाल होता रहा है. नई गाड़ी में इनकी कोई खास जरूरत नहीं होती. गाड़ी जब 30/40 हजार किलोमीटर चल जाए तब इनको मिलाने की सलाह दी जाती है. बेसिक ज्ञान से इतर अब जान लीजिए कि आपके लिए कौन सा सही रहेगा.

PEA बेस्ड एडिटिव्स

Phenylethylamine बेस्ड एडिटिव्स आपकी गाड़ी के इंजन और वॉल्व में जमे कार्बन को साफ करने के काम आता है. यह फ्यूल इंजेक्टर, कार्बुरेटर, वाल्व और कंबशन चैंबर पर जमे कार्बन और गंदगी को साफ करता है जिससे पिकअप और इंजन रेस्पॉन्स में सुधार आता है. ये सबसे कॉमन वाला एडिटिव्स है जिसे गाड़ी के 30/40 हजार किलोमीटर चलने पर डाला जा सकता है. एडिटिव्स के डिब्बे पर PEA लिखा देखकर इसे खरीद सकते हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें: एथेनॉल के चलते कार खराब होने पर कोर्ट ने कहा नई गाड़ी दो, शख्स बोला- 'अब पेट्रोल वाली नहीं चलाऊंगा'

Glycol ethers बेस्ड एडिटिव्स

E20 फ्यूल आने के बाद यही आपके काम का है क्योंकि ये एथेनॉल और पेट्रोल के बीच आने वाले पानी को रोकते हैं. इनका इस्तेमाल हवाई जहाजों के जेट फ्यूल  में बर्फ जमने से रोकने (De-icing) में किया जाता है. Glycol Ethers ईंधन में मौजूद पानी को सोख लेते हैं. इसके साथ ही ये फ्यूल इंजेक्टर, पाइप्स और कंबशन चैंबर पर जमे ग्रीस, जंग और वैक्स को घोलकर साफ करने में भी मदद करते हैं. जब इसको लेने जाएं तो देख लें कि डिब्बे पर Glycol ethers के साथ PDA Antioxidant भी लिखा हो.

ऑक्टेन बूस्टर

पेट्रोल गाड़ियों के लिए ऑक्टेन बूस्टर और डीजल गाड़ियों के लिए सेटेन बूस्टर डालने की बात कही जाती है. आपको इनसे दूर रहना है क्योंकि ये महंगा रंगीन पानी है. इसी तरह PIB (Polyisobutylene) बेस्ड एडिटिव्स भी किसी काम के नहीं. माइलेज बूस्टर वाले एडिटिव्स से एकदम ही दूर रहना है क्योंकि ये तो स्कैम है. कोई सा भी एडिटिव्स आपकी गाड़ी के असल माइलेज से ज्यादा कुछ भी नहीं बढ़ा सकता इसलिए इनके ऊपर पैसे बर्बाद करने का कोई तुक नहीं.

Advertisement

वीडियो: E20 Fuel से खराब हुई गाड़ी, अदालत ने कस्टमर को कंपनी से नई गाड़ी द‍िलवाई

Advertisement