‘मेरा मकान मालिक मुझे बीजेपी नेता होने के नाते मुफ्त में मकान नहीं देता. वो हर महीने किराया मांगता है. लेकिन 24 घंटे, सातों दिन पार्टी के लिए समर्पित रहने के कारण मैं कमाई का कोई दूसरा जरिया नहीं निकाल पा रहा था.’
'मैं कांग्रेस में शामिल हो जाऊंगा अगर...', शहजाद पूनावाला ने एक शर्त रख दी
Bharatiya Janata Party के पूर्व प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने पार्टी छोड़ने के बाद पहला इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने उन वजहों के बारे में बताया, जिसकी वजह से उन्हें BJP का ‘दामन’ छोड़ना पड़ा है.

ये कहना है शहजाद पूनावाला का, जिन्होंने हाल ही में बीजेपी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद अपना पहला इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने कई बातों का खुलासा किया है.
एनडीटीवी इंडिया को दिए इंटरव्यू में शहजाद पूनावाला ने कहा कि लंबे वक्त तक पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित रहने की वजह से उनके पास कमाई का दूसरा जरिया नहीं बचा था. पहले की जमा-पूंजी से घर चल रहा था, लेकिन अब वह भी खत्म हो चुकी है.
लेकिन यहां कहानी सिर्फ शहजाद पूनावाला के इस्तीफे की नहीं है. असली सवाल ये है कि टीवी पर 24 घंटे अपनी पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रवक्ताओं का घर आखिर चलता कैसे है? क्योंकि आमतौर पर राजनीतिक पार्टियां अपने प्रवक्ताओं को किसी नौकरी की तरह नियमित वेतन नहीं देतीं. कुछ प्रवक्ताओं का अपना कारोबार होता है, कुछ पार्ट-टाइम काम करते हैं और कुछ पूरी तरह राजनीति और विचारधारा को समर्पित रहते हैं.
खुद शहजाद भी मानते हैं कि बीजेपी का काम किसी कार्यकर्ता का घर चलाना नहीं है. शहजाद ने बार-बार दोहराया है कि वह बीजेपी से उम्मीद नहीं करते कि पार्टी उनका खर्चा उठाएगी. उन्होंने कहा, “मुझे या अन्य कार्यकर्ता का घर चलाना बीजेपी का काम नहीं है. आप अगर कोई पॉलिटिकल मूवमेंट जॉइन करते हैं तो यह कोई जॉब नहीं है.”
पूनावाला के मुताबिक पार्टी की ओर से उनसे पूछा गया था कि उनकी किस तरह से मदद की जा सकती है. तो एक ओर शहजाद ये बात भी मान रहे हैं कि अगर कोई पॉलिटिकल मूवमेंट जॉइन करता है तो उसे उसके बदले में नौकरी की तरह पैसे नहीं मिलते हैं, और दूसरी ओर वो ये भी कह रहे हैं कि मेरा मकान मालिक मुझे बीजेपी नेता होने के नाते मुफ्त में तो मकान देता नहीं है.
एनडीटीवी इंडिया को दिए इंटरव्यू में शहजाद ने अपने फ्यूचर प्लान को लेकर भी बात की. कांग्रेस में वापस लौटने की संभावना को शहजाद ने खारिज कर दिया, लेकिन एक शर्त के साथ. उन्होंने कहा, '"कांग्रेस में शामिल हो जाऊंगा. एक शर्त पर. राहुल गांधी को हटा दो, सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा को हटा दो. नेहरू के कामों पर माफी मांगो."
19 अगस्त को एक्स पर पोस्ट करते हुए शहजाद ने लिखा, “राहुल गांधी पप्पू था, है और रहेगा. अब कोई फिल्टर नहीं रहेगा. सीधी बात.” वैसे शहजाद एक समय टीवी डिबेट में और सार्वजनिक मंचो से कांग्रेस पार्टी की ही तारीफ करते थे.
तो फिलहाल उन्होंने राजनीति में तो वापसी के कयासों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि वो वापस से कॉरर्पोरेट सेक्टर में जाएंगे. जहां वो पहले जॉब करते थे. बोले, "अब मुझे उसी जगह फिर लौटना पड़ेगा, क्योंकि घर चलाने के लिए पैसे चाहिए. हालांकि, अभी कुछ तय नहीं है कि किस कंपनी में जाऊंगा, लेकिन मुझे जो आता है वही करूंगा."
हालांकि बीजेपी से इस्तीफे के बाद ऐसा नहीं है कि शहजाद ने टीवी डिबेट में शामिल होना छोड़ दिया. वो अब भी टीवी डिबेट में आ रहे है, लेकिन बतौर बीजेपी प्रवक्ता नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्लेषक. 18 अगस्त को ही वो इंडिया टुडे के एक शो में शामिल हुए. जहां उन्होंने खुद को People's Spokesperson बताया.
बीजेपी से इस्तीफे से एक दिन पहले ही 17 अगस्त को उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे. पूनावाला ने देश के स्कूलिंग सिस्टम और हेल्थ सिस्टम पर सवाल किए थे. उन्होंने कहा कि परिवारों को अक्सर अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूलों पर और माता-पिता के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है.
शहजाद पूनावाला बीजेपी प्रवक्ता बनने से पहले से कांग्रेस नेता थे. और एक समय टीवी पर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में बहस करते थे. लेकिन फिर साल 2017 में चीजें बदल गईं. सबसे पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनावों पर सवाल उठाए. इसमें धांधली का आरोप लगाया. कहा कि पूरा इकोसिस्टम राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए काम कर रहा है. इसके बाद पार्टी से तनाव के चलते कांग्रेस छोड़ दी.
इसी बीच गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने शहजाद पूनावाल की तारीफ की. और इस घटना के कुछ दिन बाद ही शहजाद ने बीजेपी जॉइन कर ली. फिर बीजेपी के लिए टीवी पर डिबेट करने लगे. लेकिन अब बीजेपी से भी उन्होंने इस्तीफा दे दिया है.
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