आप जब भी अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस करवाते होंगे तो IDV की बात जरूर होती होगी. इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) यानी गाड़ी की वर्तमान कीमत. गाड़ी खरीदने की शुरुआत में IDV ज्यादा होता है. लेकिन समय के साथ ये घटता चला जाता है. लेकिन कई बार जब आप इंश्योरेंस रीन्यू करवा रहे होते हैं तो पॉलिसी बेचने वाला इसे बढ़ाने की सलाह देता है. तर्क ये कि ऐसा करने से आपकी गाड़ी की कीमत बढ़ जाएगी और एक्सीडेंट या चोरी के केस में आपको क्लेम अमाउन्ट ज्यादा मिलेगा. ये बढ़ी हुई IDV एक स्कैम है. मत बढ़वाइए.
कार-बाइक इंश्योरेंस लेते समय IDV बढ़ाना फायदे का सौदा है या स्कैम?
Car Bike insurance IDV Explain: कार इंश्योरेंस रीन्यू करवाते समय गाड़ी की IDV बढ़ाने का जो झुनझुना पकड़ाया जाता है वो एक 'स्कैम' है. जो एजेंट आपसे कहता है कि सर कोई बात नहीं, हम IDV बढ़ा देते हैं, तो दरअसल वो आपकी गाड़ी की कीमत नहीं बल्कि अपनी कमीशन बढ़ा रहा होता है. सब कुछ जान लीजिए.

आपने ब्रांड न्यू गाड़ी खरीदी 10 लाख की लेकिन IDV कभी भी 10 लाख नहीं होगी. 10 से तो कम ही रहेगी. ज्यादा होने का तो कोई सवाल ही नहीं. आपकी गाड़ी जैसे-जैसे पुरानी होती जाएगी. इसकी वैल्यू भी कम होती जाएगी. बस वैसे ही जैसे बाजार में पुरानी कार की होती है. मतलब कि गाड़ी खरीदने के 6 महीने के अंदर ही आपकी गाड़ी चोरी हो गई या फिर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई तो भी 10 लाख तो मिलने से रहे. हां अगर आपने रिटर्न टू इन्वाइस वाला इंश्योरेंस लिया है तो ठीक, नहीं तो 6 महीने में भी 5 फीसदी कीमत कम होने वाली है. एक साल में कम से कम 15 फीसदी कीमत गिरना तो तय है. इसे डेप्रिसिएशन वैल्यू कहते हैं.

IDV का अमाउंट तय करते समय एक्सेसरीज पर भी गिरावट लागू होती है. अगर कार में कुछ कंपनी से ही लगा आया है, तो वो एक्स शोरूम कीमत में शामिल होगा. लेकिन आपने कार खरीदने के बाद बाहर से अलॉय व्हील लगवाएं, सीट कवर नए लगवाएं, तो आप उन्हें भी इंश्योरेंस में कवर करवा सकते हैं. सौ की सीधी एक बात. IDV हमेशा कम होने वाली कीमत है.
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अब जो एजेंट आपसे कहता है कि सर कोई बात नहीं हम IDV बढ़ा देते हैं तो दरअसल वो आपकी गाड़ी की कीमत नहीं बल्कि अपनी कमीशन बढ़ा रहा होता है. IDV बढ़ेगी तो कमीशन बढ़ेगा. सेल्स के टारगेट पूरे होंगे लेकिन असल में आपको कोई फायदा नहीं होगा.
क्लेम कागज पर नहीं मिलताआपकी गाड़ी की IDV आप जो मर्जी बढ़वा लो, इंश्योरेंस कंपनी तमाम पैरामीटर पर ही क्लेम देने वाली है. 10 लाख की गाड़ी अगर दो साल पुरानी है तो IDV 6 से 7 लाख पकड़ लीजिए. क्लेम 80 फीसदी से ज्यादा मिलने से रहा. तो 7 लाख की IDV पर साढ़े पांच से ज्यादा मिलना बहुत बहुत मुश्किल है. इसलिए बेकार में IDV मत बढ़वाइए. इंश्योरेंस क्लेम से लेकर दूसरे पैरामीटर पर जो वैल्यू आ रही उसी को ठीक मानिए. गाड़ी की कीमत का 15-20 फीसदी हर साल कम होती जाती है. उसी हिसाब से चलिए.
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