E20 फ्यूल यानी Ethanol ब्लेंड पेट्रोल के 1 अप्रैल 2026 से देश में जरूरी हो चुका है. अब आपकी गाड़ी E20 सपोर्ट करती हो या नहीं करती हो, या आधा सपोर्ट करती हो, माने E10 वाली क्यों ना हो, भरवाना तो E20 ही पड़ेगा. अगर नहीं भरवाना मतलब बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल चाहिए तो फिर 170 रुपये लीटर वाला XP100 डलवाओ. हालांकि, एक सवाल है कि इस बात की क्या गारंटी है कि अभी जो E20 फ्यूल मिल रहा उसमें कुछ और तो नहीं मिल रहा? सीधे सपाट शब्दों में कहें, तो एथेनॉल के साथ पानी भी तो मिक्स (ethanol’s hygroscopic nature is leading to contamination of E20 stock) हो सकता है.
E20 वाले फ्यूल में अब एक नया लोचा आया सामने, एथेनॉल नहीं पानी है असली प्रॉब्लम?
E20 फ्यूल को लेकर सोशल मीडिया पर दावों का दौर जारी है. कई वीडियो और दावे भी वायरल हो रहे हैं. कुल मिलाकर संसद से लेकर सोशल मीडिया और सड़क तक एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल को लेकर हो-हल्ला जारी है. अब एक सवाल तैर रहा है कि E20 फ्यूल में पानी तो नहीं मिल रहा?

ये सवाल इसलिए तैर रहा क्योंकि सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हैं जिसमें पेट्रोल में पानी से लेकर मिट्टी और दूसरी गंदगी मिली दिख रही है. लेकिन ऐसा है क्यों? क्योंकि पेट्रोल स्टोरेज करने वाले टैंक E20 के हिसाब से नहीं बने हैं.
एथेनॉल से ज्यादा दिक्कत तो पानी से हैसोशल मीडिया पर नजर आ रहे इस वीडियो को देखिए. साफ सुना जा सकता है कि पेट्रोल में पानी मिल गया है. पानी मिलाया नहीं गया बल्कि मिल गया है. ऐसा ही एक वीडियो कुछ दिनों पहले यूपी के आजमगढ़ से भी आया था. ऐसे कई और वीडियो हैं जिनमें कथित तौर पर ग्राहकों को फ्यूल डिस्पेंसर से E20 के बजाय गंदा पानी भरते हुए दिखाया गया है.
दरअसल अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक E20 फ्यूल के हिसाब से डिजाइन नहीं हैं. एथेनॉल की पानी सोखने की खासियत (हाइग्रोस्कोपिक नेचर) की वजह से E20 स्टॉक में मिलावट हो रही है. मॉनसून और तटीय इलाकों में इसका असर और ज्यादा देखने को मिल रहा है. कुछ दिनों पहले 'द हिंदू' ने इस पर डिटेल स्टोरी की थी जिसमें नाम नहीं बताने की शर्त पर तीन पेट्रोल पंप मालिकों ने अपनी चिंताएं जाहिर की थीं.
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'द हिंदू' को इंडस्ट्री के एक जानकार ने बताया,
"जमीन के नीचे बने जिन टैंकों में फ्यूल रखा जाता है, उनमें अक्सर कुछ मात्रा में पानी आ जाता है. ऐसा बारिश के पानी के अंदर जाने, नमी, भाप के जमने या पेट्रोल पंप तक पेट्रोल लाने वाले टैंकर से पानी के मिल जाने की वजह से होता है. जब जमीन के नीचे बने टैंकों में मौजूद पूरे E20 स्टॉक में पानी की मात्रा 0.5 फीसदी से ज़्यादा हो जाती है, तो एथेनॉल पानी के साथ मिल जाता है क्योंकि इसकी प्रकृति तो पानी को सोखने वाली (हाइग्रोस्कोपिक) होती है. इसके बाद इससे 'फेज़ सेपरेशन' होता है, जिसमें पानी और एथेनॉल का मिश्रण टैंक की तली में बैठ जाता है, जबकि पेट्रोल ऊपर एक अलग परत बना लेता है."
पंप मालिकों ने आगे बताया कि डिस्पेंसिंग यूनिट जमीन के नीचे बने टैंक के तल से फ्यूल ऊपर खींचती है, इसलिए कुछ गाड़ियों में E20 के बजाय पानी वाला यह मिश्रण जा सकता है. इसकी वजह से तटीय इलाकों में चिंताएं और बढ़ गईं, क्योंकि वहां जमीन के नीचे पानी होता है. पेट्रोल पंप के कुछ मालिकों ने यह भी आशंका जताई कि माइल्ड स्टील से बने अंडरग्राउंड टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि एथेनॉल पानी सोखता है, जिससे फ्यूल के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है.
माने ये एक नई दिक्कत है जो सामने आ रही हैं. E20 भी पूरा साफ नहीं मिल रहा.
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