EV की ABCD के पार्ट 1 में हमने आपको बताया था कि गाड़ी में बैटरी के हिसाब से चार्जिंग करना चाहिए. पहले हमने आपको AC चार्जिंग और DC चार्जिंग का फर्क बताया था. ईवी की रेंज का रंज-ओ-ग़म भी समझाया था. इसके साथ RBS यानी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के इस्तेमाल करने का तरीका भी बताया था. अब पेश है EV की जानकारी का पार्ट 2. इसमें बात होगी kW vs kWh की. साथ ही SoC vs SoH के बारे में भी जानेंगे और Onboard Charger पर भी बात कर लेंगे.
EV की बैटरी और पॉवर से जुड़ी ये बातें जान लीजिए, खरीदते और चलाते समय कन्फ्यूज नहीं होंगे
EV चलाते हैं या फिर चलाने का इरादा रखते हैं, तो इसकी ABCD का आपको पता होना चाहिए. अगर इनका पता आपको है तो फिर आपकी ईवी से आपको कोई झटका नहीं लगेगा.

दोनों देखने में तो तकरीबन एक जैसे लगते हैं लेकिन इनमें बड़ा अंतर है. kW माने गाड़ी की ताकत और kWh मतलब बैटरी का कार्यक्रम. kW (Kilowatt) माने कार की मोटर कितनी शक्तिशाली है. जैसे 100 kW मोटर यानी तेज़ एक्सीलरेशन. इसे आप पेट्रोल गाड़ी के इंजन की हॉर्सपावर (HP) समझ सकते हैं. चार्जर कितनी तेज़ी से बिजली दे रहा है उसका पता भी kW से चलता है. जैसे 7 kW का होम चार्जर बनाम 50 kW का फास्ट डीसी चार्जर.
kWh (Kilowatt-hour) बैटरी की क्षमता और रेंज को बताता है. गाड़ी के बैटरी पैक में कुल कितनी बिजली स्टोर हो सकती है पेट्रोल कार की 'लीटर टैंक कैपेसिटी' की तरह. उदाहरण के लिए, 40 kWh की बैटरी 30 kWh की बैटरी से ज़्यादा दूरी (रेंज) तय करेगी.
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SoC vs SoH क्या होता हैSoC यानी State of Charge यानी चार्ज की स्थिति. माने अगर बैटरी 70 फीसदी चार्ज है तो वो कितनी दूरी तय करेगी. गणित के हिसाब से देखें तो अगर 100 फीसदी में 100 किलोमीटर चलती है तो 70 में 70 किलोमीटर चलेगी. SoH यानी State of Health यानी स्वास्थ्य की स्थिति. माने गाड़ी की बैटरी में जान कितनी बची है.
जैसे जब गाड़ी नई होती है ये 100 फीसदी होती है लेकिन दो साल बाद ये 90 या 85 फीसदी हो सकती है. ये जितना कम होती जाएगी उतना रेंज का कार्यक्रम भी कम होता जाएगा. यहां एक बात का ध्यान रखें. बैटरी हेल्थ कम होने का मतलब ये नहीं कि वो चार्ज कम होगी. चार्ज तो अभी भी 100 फीसदी होगी, लेकिन रेंज 100 की जगह 95-90 या 85 किलोमीटर मिलेगी.
आपकी गाड़ी के साथ एक चार्जर आता है जिसे AC चार्जर कहते हैं. एसी चार्जिंग मतलब गाड़ी के साथ आने वाला चार्जर जिसे महज घर में एक पावर पॉइंट की जरूरत होती है. यह घर के सामान्य 15-ऐम्पियर (15A) के 3-पिन सॉकेट में लग जाता है जिसका इस्तेमाल हम फ्रिज, AC चलाने के लिए भी करते हैं. भारत में गाड़ियों के साथ आने वाले चार्जर 11 से 22KW चार्जिंग सपोर्ट करते हैं, मगर देश में ज्यादातर ईवी 7KW से ज्यादा सपोर्ट नहीं करती हैं. अब जो आपकी गड्डी के साथ 7KW का चार्जर आया तो ठीक, लेकिन अगर 3KW का आया तो फिर सुपर स्लो चार्जिंग होने वाली है. फुल चार्ज के लिए 10-12 घंटे पकड़ कर चलिए.
ईवी की EBCD समझ लीजिए ताकि शोरूम पर कोई आपको कन्फ्यूज ना कर पाए.
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