ये तो होना ही था. अगर ये ना होता तो वाकई अजीब लगता. रायपुर का जिला कंज्यूमर कोर्ट. मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस एसयूवी. 20 लाख वापस या नई कार. अब तो आपने अंदाजा लगा लिया होगा कि स्टोरी की स्टीयरिंग किस तरफ मुड़ने वाली है. दरअसल मारुति सुज़ुकी ने गुरुवार यानी 16 जुलाई को कहा (Maruti Suzuki to challenge Raipur consumer court order) कि वह रायपुर कंज्यूमर कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देगी, जिसमें कंपनी को एक ग्राहक की ग्रैंड विटारा कार को बदलकर बिल्कुल नया E20-कम्पैटिबल मॉडल देने के लिए कहा गया है.
एथेनॉल से खराब हुई कार पर मारुति का जवाब आया, कोर्ट ने कहा था 20 लाख की नई गाड़ी दो
रायपुर के जिला कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति को आदेश दिया कि वो डॉक्टर प्रेमराज देब्ता को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E20 फ्यूल पावर्ड कार उपलब्ध कराए. कमीशन के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मारुति सुजुकी ने जवाब दिया है.


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति को आदेश दिया कि वो डॉक्टर प्रेमराज देब्ता को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E20 फ्यूल पावर्ड कार उपलब्ध कराए. अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उसे वाहन की क़ीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1,86,850 रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये, यानी कुल 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे. इसके साथ ही मानसिक क्षति के लिए एक लाख रुपये तथा वाद-व्यय के रूप में 10 हज़ार रुपये का भुगतान भी करना होगा.
डॉक्टर प्रेमराज देब्ता की ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस एसयूवी एक शाम अचानक से बंद हो गई. उसे कंपनी के सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां बताया गया कि पेट्रोल में मिलावट है. ऐसा कई बार हुआ. बाद में जब डॉक्टर देब्ता ने सरकारी लैब में जांच कराई, तो पता चला कि सफ़ेद दही जैसा जमा हुआ पदार्थ वास्तव में एथेनॉल था. डीलरशिप ने यह कहते हुए ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया कि ख़राबी एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के कारण हुई है. इसके बाद डॉक्टर साब कोर्ट चले गए जहां से फैसला उनके पक्ष में आया.
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ग्रैंड विटारा E20-कम्पैटिबलकमीशन के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मारुति सुज़ुकी ने कहा कि इस मामले में शामिल कार E20 कम्पैटिबल थी और इसकी जानकारी ओनर मैनुअल में दी गई थी. कार मेकर ने यह भी दावा किया कि कस्टमर की गाड़ी से निकाला गया फ्यूल "दूषित" था और कहा कि आदेश में कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया है.
मारुति ने एक बयान में कहा,
"इस मामले में शामिल कार E20 कम्पैटिबल थी और इसमें E20 फ्यूल इस्तेमाल करने की पूरी क्षमता थी, जैसा कि ओनर मैनुअल में बताया गया है. ग्राहक की गाड़ी से लिए गए फ्यूल में मिलावट के सबूत मिले हैं. ऑर्डर में कई अन्य ज़रूरी तथ्यों को भी शामिल नहीं किया गया है."
कंपनी ने आगे कहा है कि वह रायपुर कंज्यूमर कोर्ट के आदेश को ऊपरी फॉर्म में चुनौती देगी.
कोर्ट के फैसले का व्यापक असररायपुर जिला कंज्यूमर कोर्ट के आदेश का व्यापक असर देखने को मिला है. फैसले के बाद पॉलिटिकल एनालिस्ट तहसीन पूनावाला ने ये वीडियो शेयर किया और कई सवाल उठाए. तहसीन पूनावाला ने कहा कि ‘टीम भारत’ की कुछ मांगें हैं. जैसे, जब से E20 ब्लेंडेड पेट्रोल को कंपलसरी किया गया है, तब से खराब या मिलावटी फ्यूल की वजह से कितनी गाड़ियों में दिक्कतें आईं? गाड़ी कंपनियों ने कितने फ्यूल पंप, इंजेक्टर, गास्केट और इंजन्स को रिपेयर किया है? इसका पूरा डेटा पब्लिक में लाया जाए.
आगे क्या होगा, वो वाकई बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है.
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