गाड़ी ट्रांसफर करवाना कोई आसान काम नहीं है. कई सारे कागज पत्री भरने पड़ते हैं. RTO ऑफिस के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं. नहीं तो एजेंट को पैसा देना पड़ता है. स्टेट से स्टेट के अंदर ही गाड़ी ट्रांसफर में चक्के घिस जाते हैं तो सोचिए दूसरे राज्य में गाड़ी के कागज ट्रांसफर करवाना कितना मुश्किल होगा. ऊपर से टाइम लाइन का प्रेशर. माने जो आपको ट्रांसफर वाली या कॉन्ट्रैक्ट वाली नौकरी के चलते दूसरे स्टेट में गाड़ी चलानी पड़ती है तो एक साल से ज्यादा होने पर उसे उसी राज्य में रजिस्टर करना होता है. अब नहीं करवाना होगा (3-year window for keeping vehicles in another state).
गाड़ी ट्रांसफर कराने के झंझट से डर लगता है, इस 'डर के आगे' अब तीन साल मिलेंगे
सड़क परिवहन मंत्रालय ने बिना री-रजिस्ट्रेशन (पुनः पंजीकरण) के किसी वाहन को दूसरे राज्य में रखने की अवधि को बढ़ाकर तीन साल (3-year window for keeping vehicles in another state) करने का प्रस्ताव दिया है. माने ट्रांसफर वाली नौकरियों और कॉन्ट्रैक्ट असाइनमेंट पर काम करने वाले लोगों की बड़ी टेंशन दूर होने वाली है.


सड़क परिवहन मंत्रालय ने बिना री-रजिस्ट्रेशन (पुनःपंजीकरण) के किसी वाहन को दूसरे राज्य में रखने की अवधि को बढ़ाकर तीन साल करने का प्रस्ताव दिया है. माने ट्रांसफर वाली नौकरियों और कॉन्ट्रैक्ट असाइनमेंट पर काम करने वाले लोगों की बड़ी टेंशन दूर होने वाली है.
3 साल तक कोई टेंशन नहीं होगीवर्तमान में, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 47 (Section 47 of the Motor Vehicles Act) के तहत यदि किसी एक राज्य में रजिस्टर्ड वाहन दूसरे राज्य में एक साल से अधिक समय तक रहता है, तो उसके मालिक को नए राज्य में नया रजिस्ट्रेशन नंबर लेने के लिए आवेदन करना अनिवार्य होता है. ये प्रोसेस वाकई लंबा, उबाऊ और खर्चीला है. कुल तीन स्टेप्स में जाकर ट्रांसफर होता है.
# मूल राज्य से क्लीयरेंस (NOC) लेना होता है. इसके लिए बैंक से NOC लेना होगा, अगर गाड़ी लोन पर है तो. RTO से भी NOC लगेगा जिसके लिए आपको सारे चालान क्लीयर करने होंगे.
# Parivahan Sewa Portal पर जाकर फॉर्म 28 भरकर फीस जमा करनी होगी. फॉर्म 28 के साथ आपको चेसिस नंबर का पेंसिल प्रिंट, RC, वैध बीमा PUC और पते का प्रमाण मूल RTO में जमा करना होगा. यहां से जो NOC मिलेगा वो भी छह महीने ही वैध रहेगा. नए स्टेट में आपको RTO को रोड टैक्स देना होगा, जिसकी गणना वाहन की उम्र, इंजन क्षमता और ओरिजनल इनवॉइस (बिल) मूल्य के आधार पर होगी. इसके बाद आपको उस स्टेट का नंबर मिल जाएगा.
# फिर आपको पुराने स्टेट में रोड टैक्स रिफंड के लिए आवेदन करना होगा. चूंकि आपने अपने गृह राज्य में लाइफटाइम रोड टैक्स (आमतौर पर 15 वर्षों के लिए) का भुगतान किया था और वाहन का उपयोग वहां कम समय के लिए ही किया, इसलिए आप बचे सालों के लिए रिफंड के हकदार हैं. इतना सब होने के बाद ही आप दूसरे राज्य में चैन से गाड़ी चला सकते हैं.
मौजूदा व्यवस्था के तहत ये सब आपको एक साल में करना होता है. लेकिन अब इस अवधि को तीन साल कर सिस्टम को थोड़ा फ्लेक्सिबल किया जा सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, Motor Vehicles Act में संशोधन के प्रपोजल को पिछले सप्ताह मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने पेश किया गया था. अगर ये नियम सड़क पर आया तो वाकई सुकून मिलेगा.
पता है-पता है, आप कहोगे कि इतना झंझट क्यों लेना. BH सीरीज का नंबर ले सकते हैं. ठीक बात, आप BH (Bharat) सीरीज की नंबर प्लेट लेने पर विचार कर सकते हैं (यदि आप इसके पात्र हैं). इससे आपको हर बार राज्य बदलने पर फिर से पंजीकरण कराने की झंझट नहीं होगी. लेकिन इसके कई घाटे हैं जो आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.
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