E20 फ्यूल यानी Ethanol ब्लेंड पेट्रोल से खराब हुई कार को लेकर मारुति को कोर्ट ले जाने वाले और फिर केस जीतने वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के डॉक्टर प्रेमराज देब्ता ने एक और झटका दिया है. अरे नहीं वो अब कोई केस नहीं कर रहे. डॉक्टर साहब ने E20 फ्यूल और मारुति ग्रैंड विटारा से आजिज आकर पेट्रोल और CNG गाड़ियों से भी तौबा कर ली है. डॉक्टर साहब अब EV (Doctor Who Won E20 Consumer Court Case against Maruti Now Drives An EV) चला रहे हैं.
एथेनॉल के चलते कार खराब होने पर कोर्ट ने कहा नई गाड़ी दो, शख्स बोला- 'अब पेट्रोल वाली नहीं चलाऊंगा'
डॉक्टर प्रेमराज देब्ता ने E20 फ्यूल और मारुति ग्रैंड विटारा से आजिज आकर पेट्रोल और CNG गाड़ियों से भी तौबा कर ली है. डॉक्टर साहब अब EV चला रहे हैं.


Cartoq को दिए इंटरव्यू के दौरान, डॉ. देब्ता ने यह तो नहीं बताया कि उन्होंने कौन सी इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदी है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लंबी यात्राओं के दौरान EV को चार्ज करना असुविधाजनक हो सकता है. हालांकि, उनका मानना है कि किसी दोबारा पेट्रोल गाड़ी में फंसने का रिस्क लेने के बजाय, वे गाड़ी को रीचार्ज करने के लिए रुकना ज़्यादा पसंद करेंगे.
क्या हुआ था डॉक्टर प्रेमराज देब्ता के साथरायपुर के रहने वाले डॉक्टर प्रेमराज देब्ता ने जून 2024 में मारुति कंपनी की ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस एसयूवी ख़रीदी थी. हालांकि, यह कार जनवरी 2023 में बनी थी. एक शाम अचानक से बंद हो गई. उसे कंपनी के सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां बताया गया कि पेट्रोल में मिलावट है. ऐसा कई बार हुआ. बाद में जब डॉक्टर देब्ता ने सरकारी लैब में जांच कराई, तो पता चला कि सफ़ेद दही जैसा जमा हुआ पदार्थ वास्तव में एथेनॉल था.
डीलरशिप ने यह कहते हुए ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया कि ख़राबी एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के कारण हुई है. इसके बाद डॉक्टर साब रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग पहुंच गए. आयोग ने मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E20 फ्यूल पावर्ड कार शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराए.
अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उसे वाहन की क़ीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1,86,850 रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये, यानी कुल 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे. इसके साथ ही मानसिक क्षति के लिए एक लाख रुपये तथा वकील की फ़ीस के रूप में 10 हज़ार रुपये का भुगतान भी करना होगा.
मारुति क्या करने वाली है?देश भर में E20 फ्यूल से गाड़ी खराब होने और माइलेज गिरने की बहस के बीच रायपुर कोर्ट का फैसला भयानक वायरल हुआ. आम जनता से लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट तहसीन पूनावाला ने भी वीडियो शेयर किया और कई सवाल उठाए. इस बीच पता चला कि मारुति डॉक्टर साहब को नई गाड़ी देने के मूड में नहीं है.
कमीशन के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मारुति सुज़ुकी ने कहा कि इस मामले में शामिल कार E20 कम्पैटिबल थी और इसकी जानकारी ओनर मैनुअल में दी गई थी. कार मेकर ने यह भी दावा किया कि कस्टमर की गाड़ी से निकाला गया फ्यूल "दूषित" था और कहा कि आदेश में कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया है. कंपनी ने आगे कहा है कि वह रायपुर कंज्यूमर कोर्ट के आदेश को ऊपरी फोरम में चुनौती देगी.
अब आगे इस केस का स्टीयरिंग किस तरफ घूमेगा, वो आगे पता चलेगा लेकिन इसके चलते किसी EV कंपनी का भला हो गया.
वीडियो: E20 Fuel से खराब हुई गाड़ी, अदालत ने कस्टमर को कंपनी से नई गाड़ी दिलवाई








