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स्टेशनों के इस पानी से किडनी फेल होने का खतरा... CAG की जांच रिपोर्ट देख रेलवे के होश उड़े

भारत के कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में कहा गया कि कई रेलवे स्टेशनों पर लगे वॉटर कूलर से लिए गए पीने के पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया पाया गया. इस बैक्टीरिया की कुछ किस्में (Strains) फूड पॉइजनिंग, दस्त और किडनी फेल होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं.

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रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी में खतरनाक बैक्टीरिया निकला. (फाइल फोटो: PTI)

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  • भारतीय रेल मंत्रालय ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के आदेश पर रेलवे की 20 हजार लोकेशंस पर 'टैंक टू टॉप' वॉटर फिल्टरेशन सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है ताकि पीने के पानी की गुणवत्ता सुधारी जा सके।
  • भारत के कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी में E. coli बैक्टीरिया की मौजूदगी की रिपोर्ट जारी की, जिससे डायरिया, फूड पॉइजनिंग और किडनी फेल्योर जैसी बीमारियों का खतरा बना।
  • रेल मंत्रालय ने रेलवे स्टेशनों पर वॉटर टैंकों को बदलने, उनकी टेस्टिंग करने और समय-समय पर पानी की क्वालिटी की रिपोर्ट जारी करने के आदेश दिए हैं, ताकि सफर के अनुभव को बेहतर बनाया जा सके।

CAG की एक रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर दूषित पीने के पानी के खुलासे ने भारतीय रेलवे को तुरंत एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया है. खुद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को आगे आना पड़ा. रविवार, 16 अगस्त को उन्होंने रेलवे नेटवर्क की करीब 20 हजार लोकेशंस पर 'टैंक टू टॉप' सिस्टम लगाने के लिए कहा. CAG रिपोर्ट में स्टेशनों पर पीने के पानी में ई-कोली बैक्टीरिया की मौजूदगी निकली. इससे फूड पॉइजनिंग, डायरिया और किडनी फेल होने तक की नौबत आ सकती है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने सीनियर रेल अधिकारियों के साथ पूरे दिन रिव्यू किया. इसके बाद रेल मंत्रालय की तरफ से रेलवे स्टेशनों पर 'टैंक टू टॉप' वॉटर फिल्टरेशन सिस्टम लगाने का आदेश आया.

क्या आदेश आया?

रेल मंत्रालय ने बताया कि रेलवे नेटवर्क की 20 हजार लोकेशंस पर वॉटर कूलर और वॉटर फिल्टरेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम की तैनाती की जाएगी. इसके अलावा सरकार ने वॉटर टैंकों को बदलने का भी आदेश दिया है. वॉटर टैकों के पानी की टेस्टिंग, जवाबदेही और समय पर साफ-सफाई के सख्त आदेश जारी किए गए.

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रेलवे ने क्या कहा?

रेल मंत्रालय ने कहा,

“यह एक बहुत जरूरी काम है और इसकी निगरानी सीधे बोर्ड लेवल पर की जाएगी. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर प्रोग्रेस और पानी की क्वालिटी से जुड़ी रिपोर्ट जारी की जाएंगी.”

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रेल मंत्रालय का पोस्ट. (X)

मंत्रालय ने आगे कहा, "यह कदम CAG की सभी बातों पर ध्यान देने और सफर के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए चलाए जा रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा है."

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भारत के कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में कहा गया कि कई रेलवे स्टेशनों पर लगे वॉटर कूलर से लिए गए पीने के पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया पाया गया. इस बैक्टीरिया की कुछ किस्में (Strains) फूड पॉइजनिंग, दस्त और किडनी फेल होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं. इस खुलासे के बाद रेलवे ने पीने के पानी से जुड़े नए कदम उठाए.

इन स्टेशनों पर निकला बैक्टीरिया

CAG की स्टडी में इंडियन रेलवे के सभी जोनों के 512 नॉन-सबअर्बन ग्रेड रेलवे स्टेशन शामिल किए गए. स्टडी में यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं को परखा गया. खुलासा हुआ कि चार जोन के आठ रेलवे स्टेशनों पर वॉटर कूलर से लिए गए पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया मौजूद है.

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इनमें सदर्न रेलवे (SC) के दो स्टेशन- कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) के एक स्टेशन- हैदराबाद, सेंट्रल रेलवे (CR) के चार स्टेशन- छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला, और ईस्टर्न रेलवे (ER) का एक स्टेशन- मधुपुर शामिल है.

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