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EV बैटरी को 80% नहीं 100% चार्ज कीजिए, वजह LFP है

आजकल इंडिया में कई कंपनियां LFP बैटरी का इस्तेमाल कर रही हैं और इनको 100 फीसदी चार्ज करने की सलाह दी जाती है. अगर ऐसा नहीं किया गया तो Battery Management System बिगड़ सकता है.

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EV को 100 फीसदी चार्ज करो. (तस्वीर- Unsplash.com)

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  • ईवी में इस्तेमाल होने वाली LFP बैटरी को 100 फीसदी चार्ज करने की सलाह दी जा रही है जबकि NMC बैटरी के लिए 80 फीसदी चार्जिंग की सिफारिश की जाती है।
  • बैटरी टेक्नोलॉजी के अंतर के कारण LFP और NMC बैटरियों की चार्जिंग प्रक्रिया और जीवन अवधि में भिन्नताएं हैं, जो चार्जिंग सुझावों को प्रभावित करती हैं।
  • 100 फीसदी चार्जिंग से BMS सिस्टम को बैटरी की सही स्थिति का पता चलता है, जिससे EV की रेंज में सटीकता बनी रहती है और दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होता है।

EV से लेकर स्मार्टफोन में लगने वाली बैटरी तक एक आम समझ है कि इसे 80 फीसदी से ज्यादा चार्ज नहीं करना चाहिए. कंपनियां भी ऐसी ही सलाह देती हैं. बैटरी चार्जिंग के लिए 20-80 वाला फार्मूला इस्तेमाल करने को कहा जाता है. माने 20 से नीचे नहीं और 80 से ऊपर नहीं. लेकिन जो हम आपसे कहें कि आपको अपनी ईवी को पूरा 100 फीसदी चार्ज करना चाहिए तो? आप भड़कने वाले हो क्योंकि हमने ही आपसे 80 पर रुकने के लिए कम से कम 80 बार कहा है. लेकिन अब हम ही आपको शतक मारने को कह रहे.

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NMC और LFP का अंतर है वजह

NMC (Nickel Manganese Cobalt) और LFP (Lithium Iron Phosphate) दोनों ही लिथियम-आयन बैटरी ही हैं, बस टेक्नोलॉजी का अंतर है. NMC में निकल, मैंगनीज और कोबाल्ट होता है तो LFP में लिथियम, आयरन और फॉस्फेट का उपयोग होता है. NMC बैटरी की एनर्जी डेंसिटी काफी ज्यादा होती है जिससे ये कम वजन और छोटे आकार में ज्यादा बिजली स्टोर कर सकती है. लंबी रेंज देने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों और हाई-परफॉर्मेंस EVs के लिए मुफीद है.

LFP बैटरी की एनर्जी डेंसिटी कम होती है, जिससे बैटरी पैक थोड़ा भारी और बड़ा होता है. लेकिन ये अत्यधिक तापमान और ओवरहीटिंग को आसानी से झेल सकती है, जिससे आग लगने का खतरा बेहद कम रहता है. NMC बैटरी LFP की तुलना में ज्यादा सेंसिटिव होती है. अगर कूलिंग सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा हो या भयानक गर्मी तो इसमें थर्मल रनअवे (आग लगने) का रिस्क LFP से अधिक होता है.

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LFP बैटरी को आसानी से 2,000 से 3,000+ चार्जिंग साइकिल तक चलाया जा सकता है. वहीं NMC की लाइफ आमतौर पर 800 से 1,500 चार्जिंग साइकिल तक ही होती है. माने NMC बैटरी जहां 3 से 6 साल में खत्म हो जाएगी तो LFP में मामला 10 से 15 साल का जा सकता है. LFP बैटरी में लगने वाला लोहा और फॉस्फेट सस्ता भी है और आसानी से मिल जाता है. इसलिए इसकी लागत भी कम आती है. आजकल इंडिया में कई कंपनियां LFP बैटरी का इस्तेमाल कर रही हैं और इनको 100 फीसदी चार्ज करने की सलाह दी जाती है.

BMS का सिस्टम बिगड़ता है

ईवी में होता है Battery Management System. मतलब जो आपकी बैटरी की पूरी जानकारी अपने पास रखता है. बैटरी कितनी चली, कितनी चार्ज हुई, ये सब इसे पता होता है. ईवी कंपनियों को भी BMS से ही बैटरी की सेहत का पता चलता है. इसलिए बैटरी को पूरा चार्ज करना जरूरी है ताकि वो आपको सही से रेंज दिखा सके. पता चला कि रेंज तो 100 किलोमीटर दिखा रही थी, मगर कार 50 पर थम गई. ये सिस्टम सही से काम करे इसलिए जरूरी है कि वो पूरी चार्जिंग साइकिल को पूरा करे. इसलिए अगर आपकी गाड़ी में LFP वाली बैटरी लगी है तो कम से कम हफ्ते में एक बार बैटरी को स्लो चार्जर से 100 फीसदी चार्ज कीजिए. अगर NMC है तो फिर 80-20 वाले नियम से चलिए. 

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