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Spinny और Cars24 को बेची गाड़ी, अब आ रहे पुलिस के नोटिस, ये केस समझने जरूरी

पुरानी कार में डील करने वाली कंपनियों की कार ट्रांसफर में ढिलाई की करतूतें कोई नई नहीं हैं. कुछ दिनों पहले हर्ष चौहान नाम के यूजर ने Cars24 का अपना केस साझा किया था. उनको भी कार सेल करने के 1.5 साल के बाद पुलिस नोटिस आया था.

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गाड़ी सेल करते समय और उसके बाद कंपनियों से लगातार टच में रहें

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  • दिल्ली हाई कोर्ट के वकील शंकर झा को एक्साइज़ एक्ट के तहत उस कार के लिए FIR मिली, जिसे उन्होंने ढाई साल पहले स्पिनी कंपनी को बेच दिया था, पर ओनरशिप ट्रांसफर नहीं हुआ था।
  • झा ने अपनी कार 2023 में स्पिनी को कानूनी दस्तावेजों समेत बेच दी थी, लेकिन ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी होने के कारण उनका नाम कार के रजिस्ट्रेशन पर बना रहा।
  • कोर्ट ने झा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से बचाते हुए केंद्र और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मजबूत करने के निर्देश दिए।

अगर आप भी अपनी पुरानी गाड़ी सेल करने वाले हैं या सेल कर चुके हैं तो Excise Act में FIR के (Delhi High Court lawyer received a police notice for old car sold to spinny) लिए तैयार रहिए. Excise Act मतलब गैर कानूनी तरीके से शराब का ट्रांसपोर्टेशन. शायद आपको लगे कि क्या ही बे-कार बात कर रहे हो, तो हम आपको पहले इसका उदाहरण दे देते हैं फिर अपनी स्टोरी की कार चलाएंगे. दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट के एक वकील, जिन्हें वकालत करते हुए लगभग तीन दशक हो चुके हैं, को हाल ही में पुलिस का नोटिस मिला. यह नोटिस एक्साइज़ एक्ट के कथित उल्लंघन के लिए था, जो उस कार में हुआ था जिसके अब वे मालिक नहीं हैं.

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Spinny को सेल की थी अपनी कार

शराब की गैर-कानूनी ढुलाई के लिए दर्ज FIR में नाम आने के बाद वकील शंकर झा मुश्किल में फंस गए. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अपराध में इस्तेमाल हुई गाड़ी अभी भी उनके नाम पर ही थी, जबकि उन्होंने इसे ढाई साल पहले ही गुड़गांव की एक सर्विस प्रोवाइडर कंपनी 'स्पिनी' (Spinny) को बेच दिया था, जो पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का काम करती है. The Print की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी के डर से झा ने दिल्ली हाई कोर्ट में दो मांगें रखीं. उन्हें किसी भी आपराधिक कार्रवाई से बचाया जाए, और उस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मज़बूत किया जाए जिसके तहत पुरानी गाड़ियां खरीदने-बेचने का काम करने वालों पर कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती है.

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कोर्ट ने बचा लिया

जस्टिस मधु जैन की बेंच ने उनकी शिकायत पर ध्यान दिया और केंद्र, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, वज़ीराबाद पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफ़िसर (जिसने वकील के ख़िलाफ़ एक्साइज़ एक्ट के तहत FIR दर्ज की थी), जनकपुरी अथॉरिटी के ट्रांसपोर्ट ऑफ़िसर (जहां वह कार रजिस्टर्ड थी) और स्पिनी (जिसने 2023 में झा की कार खरीदी थी) को नोटिस जारी किए. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि गाड़ी से जुड़े FIR के मामले में झा के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

हुआ क्या था

झा के अनुसार, जब उन्होंने दिसंबर 2023 में अपनी कार 'स्पिनी' (Spinny) को बेची, तो उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत 'फॉर्म-29' समेत सभी ज़रूरी कानूनी दस्तावेज़ पूरे किए और उसी दिन रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (RC) व चाबियों समेत सभी ओरिजिनल दस्तावेज़ और गाड़ी का कब्ज़ा भी सौंप दिया. मोटर व्हीकल एक्ट का 'फॉर्म-29' गाड़ी बिकने पर उसके मालिकाना हक के ट्रांसफर के बारे में रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफ़िस (RTO) को सूचित करता है. 27 फरवरी, 2024 और 5 मार्च, 2025 के बीच, झा ने स्पिनी को कई WhatsApp मैसेज भेजकर RC ट्रांसफर का स्टेटस पूछा. जवाब में, झा को साफ़ तौर पर भरोसा दिलाया गया कि स्पिनी जल्द से जल्द ओनरशिप ट्रांसफर कराने के लिए तेज़ी से काम कर रही है. आखिरकार, इस साल जनवरी में झा ने ओनरशिप ट्रांसफर न करने के लिए स्पिनी को एक नोटिस भेजा.

ऐसा होता कैसे है?

पुरानी कार में डील करने वाली कंपनियों की कार ट्रांसफर में ढिलाई की करतूतें कोई नई नहीं हैं. कुछ दिनों पहले हर्ष चौहान नाम के यूजर ने Cars24 का अपना केस सोशल मीडिया पर साझा किया था. उनको भी कार सेल करने के 1.5 साल के बाद पुलिस नोटिस आया था. होता ये है कि कार खरीदने वाली कंपनियां कार खरीद तो लेती हैं. पैसा भी पूरा देती हैं, मगर ट्रांसफर में देरी करती हैं.

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ये कंपनियां कार को अपने पास रखती हैं और फिर ग्राहक का इंतजार करती हैं. ऐसा करने से उनको बार-बार गाड़ी ट्रांसफर नहीं करनी पड़ती है. इसी चक्कर में कई बार कार बिक तो जाती है मगर कागजी कार्यवाही रह जाती है. जब तक पेपर प्रोसेस होते हैं, तब तक अगर कोई कांड हुआ तो पहला मालिक फंस जाता है. झा साहब ठहरे वकील इसलिए कोर्ट चले गए और बच गए. लेकिन आपके साथ ऐसा नहीं हो इसलिए गाड़ी सेल करते समय और उसके बाद कंपनियों से लगातार टच में रहें. अगर पेपर ट्रांसफर में देरी हो तो कानून का सहारा लें.

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