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उत्तराखंड में फिर से फटा बादल, इमारतें ताश के पत्तों की तरह बह गईं

उत्तराखंड (Uttarakhand) में एक बार फिर से बादल फटने की घटना सामने आई है. बादल टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग इलाके में फटा. इसकी वजह से मूसलाधार बारिश हुई. आसपास की कई दुकानें और मकान ध्वस्त हो गए. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यहां स्थित ITI की बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इस प्राकृतिक आपदा का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल से शूट कर लिया. अब सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो रहा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक देवप्रयाग के SHO ने बताया कि बादल फटने की घटना करीब पांच बजे रिपोर्ट हुई. जिसके कारण इलाके में अचानक से बाढ़ जैसे हालात बन गए. बहुत सी दुकानें और दूसरी प्रापर्टी को नुकसान हुआ. देवप्रयाग SHO ने बताया कि क्योंकि लॉकडाउन की वजह से दुकानें और दूसरे सार्वजनिक स्थान बंद थे, इसलिए किसी की जान जाने की खबर नहीं आई है. वहीं राज्य आपदा प्रबंधन बल के सदस्य घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं.

दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बादल फटने की घटना को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से बात की है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री ने नुकसान का जायजा लिया और जरूरी मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है.

इस साल की चौथी आपदा

इससे पहले 3 मई को राज्य के कई इलाकों में बादल फटने की खबर सामने आई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन मई को उत्तराखंड के टिहरी, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिले में बादल फटा था. इसके बाद इन इलाकों में राहत पहुंचाने का कार्य किया गया था, साथ ही प्रभावित लोगों को सहायता राशि देने का निर्देश भी प्रशासन की तरफ से दिया गया था.

बाएं ओर की तस्वीर उत्तरकाशी की है. बादल फटने की वजह से दूर-दूर तक बस पानी ही पानी दिख रहा है. दाएं ओर की तस्वीर- रुद्रप्रयाग की है. यहां भी काफी नुकसान हुआ है. (फोटो- ANI)
बाएं ओर की तस्वीर उत्तरकाशी की है. बादल फटने की वजह से दूर-दूर तक बस पानी ही पानी दिख रहा है. दाएं ओर की तस्वीर- रुद्रप्रयाग की है. यहां भी काफी नुकसान हुआ है. (फोटो- ANI)

वहीं राज्य में इस साल की सबसे बड़ी आपदा फरवरी में आई थी. चमोली के रैणी इलाके में ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट के पास 7 फरवरी की सुबह ग्लेशियर टूटा. इसके बाद अलकनंदा नदी ओवरफ्लो हो गई. बहाव में पानी के साथ-साथ भारी मात्रा में चट्टानों का मलबा भी था. तेज रफ्तार सैलाब ने तबाही मचा दी थी और इस आपदा में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. हादसे में लापता हुए लोगों की संख्या और भी ज़्यादा थी.

इसके बाद 3-4 अप्रैल को राज्य के करीब 62 हेक्टेयर जंगल में आग लग गई थी. 960 से ज़्यादा जगहों पर आग लगी थी. इस आग में कम से कम 4 लोगों की और जंगल के तमाम जानवरों की जलकर मौत हो गई. 37 लाख से ज़्यादा की संपत्ति का नुकसान हुआ था.

इसी के बाद 23 अप्रैल की शाम चमोली ज़िले का जो इलाका भारत-चीन बॉर्डर से लगा है, वहां ग्लेशियर टूटने की वजह से हिमस्खलन हो गया. करीब 400 लोगों को यहां से रेस्क्यू किया गया. चमोली के डिज़ास्टर मैनेजमेंट ऑफिसर एनके जोशी ने बताया था कि उस आपदा में कम से कम 23 लोग मारे गए थे.

वीडियो- भारत-चीन बॉर्डर पर उत्तराखंड के चमोली में हिमस्खलन, आठ लोगों की जान चली गई

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