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हाथरस केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

हाथरस मामला. 19 साल की दलित लड़की का कथित तौर पर गैंगरेप हुआ. उसे मारने की कोशिश की गई. 14 दिन तक अलग-अलग अस्पतालों में उसका इलाज चला. और दिल्ली के अस्पताल में उसकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम के बाद आधी रात को ही लड़की का अंतिम संस्कार कर दिया गया. परिवार ने जबरन अंतिम संस्कार करने का आरोप पुलिस और प्रशासन पर लगाया. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है. याचिका लगाने वालों की मांग है कि हाथरस मामले की जांच कोर्ट अपनी निगरानी में कराए. यूपी सरकार ने सीबीआई जांच पर सहमति जताई.

याचिका पर 6 अक्टूबर को चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच ने सुनवाई की. याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट इंदिरा जयसिंह और यूपी सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुनवाई में शामिल हुए.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि यूपी सरकार इस याचिका के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा,

इस मामले को लेकर लोगों के बीच कई तरह की कहानियां गढ़ी जा रही हैं. 19 साल की लड़की की मौत पर सनसनी नहीं फैलाई जानी चाहिए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके. आम लोग, नेता सब अलग-अलग तरह की बातें कह रहे हैं. धारणाएं बनाई जा रही हैं. ऐसे में कोर्ट को इस मामले को सुपरवाइज़ करना चाहिए.”

इंदिरा जयसिंह ने विक्टिम के परिवार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. साथ ही कहा कि इस मामले में SC/ST एक्ट लागू किया जाए. इस पर चीफ जस्टिस ने यूपी सरकार से परिवार के प्रोटेक्शन का प्लान लिखित में मांगा. चीफ जस्टिस बोबडे ने टिप्पणी की,

यह घटना बहुत ही असाधारण और चौंकाने वाली है. इसीलिए सुप्रीम कोर्ट इस पर अर्जेंट सुनवाई कर रहा है.

अदालत ने इंदिरा जयसिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि उन्होंने ये याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में क्यों नहीं लगाई? इस पर जयसिंह ने कहा कि हम चाहते हैं कि मामले की सुनवाई यूपी से बाहर हो, जैसा उन्नाव गैंगरेप केस में हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने परिवार की सुरक्षा की डिटेल मांगते हुए सुनवाई अगले सप्ताह तक टाल दी.

आधी रात को लड़की के अंतिम संस्कार पर सरकार ने क्या सफाई दी?

इस सुनवाई से पहले यूपी सरकार की तरफ से अदालत में एफिडेविट दाखिल किया गया था. इसमें दावा किया गया कि इस मामले की आड़ में कुछ लोग यूपी में जातिगत और साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. हिंसा रोकने के लिए ही आधी रात को लड़की का अंतिम संस्कार किया गया था. पीड़िता के परिवार से इसके लिए मंजूरी भी ले ली गई थी. (हालांकि ये बात अलग है कि लड़की का परिवार जबरन अंतिम संस्कार का आरोप लगा रहा है).

इस हलफनामे में लिखा गया है कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट थे कि अंतिम संस्कार वाली रात के अगले दिन बड़े स्तर पर दंगा कराने की तैयारी थी. सुबह तक इंतजार करते तो हालात काबू से बाहर हो सकते थे.

यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि वह मामले की निष्पक्ष जांच करने में सक्षम है. लेकिन कुछ लोग अपने निहित स्वार्थ के लिए जांच की दिशा को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में जांच सीबीआई से करवानी चाहिए.

इस मसले पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि विक्टिम का परिवार सीबीआई जांच नहीं चाहता है. उन्होंने मांग की कि जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट एक SIT यानी विशेष जांच दल बनाए.

बता दें कि फिलहाल यूपी सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी जांच कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसआईटी की जांच अंतिम दौर में है. टीम 7 अक्टूबर को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप सकती है.


कुमार विश्वास ने हाथरस केस पर BJP MLA के इस बेतुके बयान पर क्या जवाब दे दिया?

 

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