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नेता जी जीते कांग्रेस से, मंत्री बने बीजेपी से, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अइसे कइसे!

चुनाव लड़ना किसी पार्टी से और मंत्री बनना किसी और पार्टी से. ये अच्छी बात थोड़े ना है. भारतीय जनता पार्टी के मणिपुर के नेता टी. श्यामकुमार अब ये बात समझ गए होंगे, क्योंकि समझावन मिली है सीधा सुप्रीम कोर्ट से. श्यामकुमार मणिपुर के विधायक हैं. 18 मार्च तक राज्य के वन मंत्री भी थे. अब दल-बदल कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट ने श्यामकुमार को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है. साथ ही अगले आदेश तक विधायक साब के विधानसभा में घुसने तक पर भी रोक लगा दी है.

2017 में श्यामकुमार ने क्या किया था?

पाला बदला था. 2017 में मणिपुर में विधानसभा चुनाव हुए थे. राज्य की आंद्रो सीट से श्यामकुमार ने चुनाव लड़ा. कांग्रेस के टिकट पर. चुनाव जीता भी. लेकिन श्यामकुमार की पार्टी हार गई. राज्य में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनती दिख रही थी और श्यामकुमार ने आनन-फानन में कांग्रेस छोड़ी, बीजेपी में आए. पुरस्कार में पा गए मंत्री पद. वन मंत्री बने.

पाला बदलने के इस मामले में अप्रैल, 2017 के बाद कुल 13 याचिकाएं दाखिल की गईं. इन्हीं पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नरीमन और रवींद्र भट की बेंच ने अब मंत्री को पद से हटाने का आदेश दिया है.

मणिपुर चुनाव में ऐसा क्या हुआ था?

2017 में राज्य में विधानसभा चुनाव हुए थे. 60 सीट की विधानसभा में बीजेपी ने 21 सीटें जीती थीं, कांग्रेस ने 28. लेकिन फिर भी सरकार बीजेपी की ही बनी. कांग्रेस के नौ विधायक चुनाव के बाद पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गए. इन्हीं में से एक थे टी श्यामकुमार.

स्पीकर को भी कोर्ट से डांट पड़ी है

दरअसल, कोर्ट इस मामले में सीधा हस्तक्षेप नहीं करना चाह रहा था. जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह मणिपुर विधानसभा के स्पीकर खेमचंद सिंह से उम्मीद कर रहा है कि वे इस मामले में अपनी ड्यूटी निभाएंगे. इसीलिए कोर्ट ने उस वक्त खेमचंद सिंह को कार्रवाई करने का समय देते हुए खुद फैसला नहीं सुनाया था. स्पीकर को चार हफ्ते का समय दिया गया था.

4 मार्च को जब कोर्ट ने पूछा कि क्या हुआ, तो स्पीकर ने 10 दिन का समय और मांग लिया. ये भी दिया गया. लेकिन अब जब 10 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो कोर्ट ने खुद फैसला सुना दिया. मंत्री जी को बर्खास्त किया और विधानसभा में एंट्री तक पर रोक लगा दी. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी.

कोर्ट ने खास अधिकार का इस्तेमाल किया

मणिपुर के स्पीकर की तरफ से तय समय से ज्यादा बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया, तो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया. कोर्ट ने फैसला अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए सुनाया. वो विशेषाधिकार, जो संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट को मिला है.

अनुच्छेद-142 कहता है-

‘अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि किसी अन्य संस्था के जरिए कानून और व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए कोई आदेश देने में देरी हो रही है, तो कोर्ट खुद उस मामले में फैसला ले सकता है.’

कोर्ट भी समझता है कि ये उसका विशेषाधिकार है. यानी विशेष परिस्थितियों में ही इस्तेमाल किया जाए तो बेहतर. इसीलिए अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल जल्दी-जल्दा किया नहीं जाता है. लेकिन स्पीकर की ओर से बार-बार आनाकानी के बाद कोर्ट को ये रास्ता अपनाना ही पड़ा.

 


सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी ड्रामे पर क्या कहा?

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