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सुप्रीम कोर्ट का टूलकिट मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इन्कार, कहा- पसंद नहीं तो इग्नोर करें

सुप्रीम कोर्ट ने कथित टूलकिट मामले में सुनवाई करने से इन्कार कर दिया है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान ट्विटर पर एक डॉक्युमेंट वायरल हुआ था. बीजेपी ने इसे कांग्रेस पार्टी की टूलकिट बताया था. इसमें कांग्रेस ने कथित रूप से अपने कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे कोरोना वायरस के ‘इंडियन वेरिएंट’ को ‘मोदी स्ट्रेन’ और कुंंभ मेले को कोविड-19 संक्रमण का ‘सुपर स्प्रेडर’ कहें. हालांकि कांग्रेस ने बीजेपी के दावे को खारिज किया था.

इसी टूलकिट को लेकर सोमवार 5 जुलाई को एक जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच के सामने आई. बेंच ने कहा कि इस पर सुनवाई नहीं की जा सकती. खबरों के मुताबिक, जस्टिस डीवाई चंद्रचूण और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा,

आपको ये (टूलकिट) पसंद नहीं तो मत देखिए. इग्नोर कीजिए. ये राजनीतिक पार्टी का एक प्रोपेगैंडा है. भारत एक लोकतंत्र है, आपको पता है?

बेंच ने याचिका को लेकर नाराजगी जताई. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,

इस तरह की जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती. वक्त आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट को इस तरह की याचिका को लेकर कदम उठाना चाहिए.

वहीं, जस्टिस शाह ने PIL को लेकर कहा कि टूलकिट मामले में एक आपराधिक जांच पहले से ही लंबित है. ऐसे में याचिकाकर्ता को आर्टिकल 32 के अलावा अन्य उपायों का लाभ उठाना चाहिए.

कांग्रेस का रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने की थी मांग

याचिकाकर्ता के वकील शशांक शेखर झा ने इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट से ये भी मांग की गई थी कि आरोप सही पाए जाने पर कांग्रेस का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाए.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा,

ये राजनीतिक प्रोपेगैंडा का मसला है. ऐसे में इस पर आर्टिकल 32 के तहत कैसे विचार किया जा सकता है.

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि अगर वो चाहें तो मामले को हाई कोर्ट में उठा सकते हैं. शीर्ष अदालत की टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने PIL वापस ले ली.

क्या है टूलकिट मामला?

बीती 18 मई को बीजेपी के कई नेताओं ने अपने-अपने ट्विटर हैंडल से एक टूलकिट शेयर की थी. सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस टूलकिट के बारे में सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गेनाइज़र में बताया गया था. वायरल टूलकिट के हवाले से आरोप लगाए गए कि कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे सोशल मीडिया पर कोरोना के ‘इंडियन स्ट्रेन’ के लिए ‘मोदी स्ट्रेन’ और कुंभ मेले के लिए ‘सुपर स्प्रेडर कुंभ’ जैसे शब्दों और वाक्यों का इस्तेमाल करें. टूलकिट की तस्वीर में ऊपर दाएं कोने में कांग्रेस पार्टी का लोगो भी लगा हुआ था.

इस दस्तावेज के हवाले से कांग्रेस पर ये आरोप भी लगाया गया कि उसने अपने कार्यकर्ताओं को कोरोना मरीजों की लाशों और अंतिम संस्कार की तस्वीरों का नाटकीय इस्तेमाल करने को कहा था. आरोप के मुताबिक टूलकिट में कहा गया,

‘लोगों को ‘सुपर स्प्रेडर कुंभ’ याद दिलाते रहना है. ये सब ज़रूरी है क्योंकि ये बीजेपी की हिंदू राजनीति है, जो इतना संकट पैदा कर रही है.’

बीजेपी ने टूलकिट को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था. पार्टी के प्रवक्ताओं के साथ सरकार के कई मंत्रियों ने भी ट्वीट किए और बयान दिए. उधर, कांग्रेस ने टूलकिट को फर्जी करार दे दिया. उसने बीजेपी नेताओं पर FIR कराने की भी बात कही. बाद में ट्विटर ने इन सभी ट्वीट्स पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का लेबल लगा दिया. माने उस ट्वीट में जो तस्वीर इस्तेमाल की गई, वो भ्रामक है.


विडियो- ‘टूलकिट’ मामले में ट्विटर ने संबित पात्रा समेत BJP के दो नेताओं को तगड़ा झटका दे दिया

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