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क्या सन्नी देओल से छिन जाएगी उनकी सांसदी?

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गुरदासपुर में 1 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर सांसद बने सन्नी देओल परेशानी में फंस सकते हैं. वजह है चुनावी खर्च. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक एक उम्मीदवार को 70 लाख रुपये तक खर्च करने की इजाज़त है. लेकिन 70 लाख से ज्यादा खर्च होने पर कार्रवाई हो सकती है. इसी फेर में फंस गए हैं सन्नी देओल. दरअसल, चुनाव आयोग के पास मौजूद ब्यौरे के मुताबिक सन्नी देओल ने 70 लाख से ज्यादा रुपये खर्च किए हैं. अगर चुनाव आयोग का ये दावा सही निकला तो उनका चुनाव रद्द किया जा सकता है.

ये है पूरा मामला

हर उम्मीदवार को चुनाव के बाद कुल खर्च का हिसाब देना होता है. चुनाव के वक्त हर कैंडिडेट एक अलग अकाउंट रखता है. यहां खर्च हो रहे पैसे का हिसाब रखता है. कैंडिडेट के अलावा चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त अधिकारी भी इस खर्च का हिसाब रखते हैं. जिसे शैडो रिजस्टर का नाम दिया जाता है. यानी टू वे मामला है. चुनाव आयोग उम्मीदवार की हर सभा या रैली में पोस्टर-बैनर से लेकर गाड़ियों तक के खर्च की डिटेल रखता है. चुनाव खर्च की मैक्सिमम लिमिट है 70 लाख. लेकिन चुनाव आयोग के शैडो रिजस्टर के मुताबिक सन्नी ने 86 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं.

सन्नी ने क्या कहा

सन्नी देओल की ओर से जवाब आया है कि चूक उनसे नहीं, चुनाव की टीम से हुई है. सन्नी की लीगल टीम ने कहा कि उनके क्लाइंट के चुनाव खर्च का हिसाब ठीक है. चुनाव आयोग की टीम से चूक हुई है. अगर कोई कन्फ्यूज़न है तो खर्च की सही डिटेल फिर मुहैया करा दी जाएगी.
सन्नी के प्रचार में खर्च बढ़ने का अहम कारण है बड़ी रैलियां. 29 अप्रैल को गुरदासपुर में भाजपा ने बड़ी रैली की थी. 2 मई को सन्नी देओल ने रोड शो किया. 5 मई को पठानकोट में एक और बड़ी रैली हुई. इस रैली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत कई नेता हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे. लाज़मी है खर्च बढ़ा.

चुनाव प्रचार के दौरान रोड शो में सनी देओल.
चुनाव प्रचार के दौरान रोड शो में सनी देओल.

पूरे इलेक्शन प्रचार के लिए भाजपा ने 30 लाख रुपये सन्नी देओल को दिए थे. गुरदासपुर में 19 मई को वोटिंग हुई थी. इससे एक दिन पहले ही सन्नी देओल को वॉर्निंग मिली थी. डीसी गुरदासपुर विपुल उज्ज्वल ने सन्नी देओल को 18 मई तक 70 लाख से ज्यादा खर्च करने के बारे में लिखा था. इस मामले में अब आगे जांच चल रही है. गुरदासपुर हलके में गुरदासपुर और पठानकोट जिला आते हैं. 18 जून को पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में ऑब्ज़र्वर पहुंचे और रिकॉर्ड्स की गहनता से जांच की.

पर ये तो समान्य प्रकिया है

इस मामले के सामने आने के बाद तमाम तरह की अफवाह फैल रही थी. सन्नी स्टार हैं तो ख़बर और फैली. हमने इस पूरे मामले की हक़कीत जानने के लिए गुरदासपुर के डीसी और लोकसभा चुनाव 2019 के लिए रिटर्निंग ऑफिसर विपुल उज्ज्वल से बात की. उन्होंने इसे समान्य प्रक्रिया बताया. उज्ज्वल के मुताबिक, हर कैंडिडेट को चुनाव के बाद अपने खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को सौंपना होता है. इसमें कैंडिडेट और आयोग के शैडो रिजस्टर में दर्ज आंकड़ों का मिलान होता है. अगर कैंडिडेट मानता है कि आयोग के आंकड़े गलत हैं तो वो अपनी बात सबूत सहित रख सकता है. ये प्रकिया सामान्य है. चूंकि, आयोग खर्च का निर्धारण अंदाजे से करता है, इसलिए ऐसा कई बार होता है कि आयोग की नज़र में खर्च ज्यादा निकल आता है. तो बात ये कि कुल मिलाकर इसके बारे में कुछ सॉलिड जानकारी 22 से 23 जून के बीच ही मिलेगी. तब तक चुनाव आयोग शैडो रिजस्टर और कैंडिडेट के रिजस्टर का मिलान कर चुका होगा.

बाकी कैंडिडेट्स ने कितना खर्चा किया

मिली जानकारी के मुताबिक जाखड़ ने 63 लाख खर्च किए हैं. आम आदमी पार्टी के पीटर मसीह ने 7 लाख 65 हजार, लालचंद कटारूचक्क ने 9 लाख 62 हजार, सुकृत शारदा ने 51,600 और प्रीतम सिंह ने 1 लाख 13 हजार रुपए खर्च किए हैं.

अब आप कहेंगे कि अगर सन्नी का खर्च ज्यादा निकल आया तो (जिसकी संभावना कम है) क्या होगा. तो ऐसा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 77 के मुताबिक अगर कैंडिडेट तय सीमा से ज्यादा खर्च करता है तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है.

हां, चुनावी खर्च की वजह से एक सीएम की कुर्सी जाने का मज़ेदार किस्सा भी पढ़ते जाइए. द्वारका प्रसाद मिश्र. 30 सितंबर, 1963 को भोपाल के मिंटो हॉल में नए मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र ने शपथ ली थी. राज 4 साल चल सका. फिर सरकार पलट गई.

249 रुपये की वजह से डीपी मिश्रा की कुर्सी चली गई और फिर श्यामाचरण शुक्ला सीएम बने.
249 रुपये की वजह से डीपी मिश्रा की कुर्सी चली गई और फिर श्यामाचरण शुक्ला सीएम बने.

1969 में फिर मौका आया मुख्यमंत्री बनने का. पूरी तैयारियां थीं. मगर तभी एक चुनावी याचिका पर फैसला आ गया था. ये याचिका लगाई थी कमल नारायण शर्मा ने, जो 1963 में कसडोल सीट पर हुए उपचुनाव में मिश्र के प्रतिद्वंदी थे. इसी उपचुनाव में जीत के बाद मिश्र सीएम बने थे. कमल नारायण ने डीपी पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए थे. और जबलपुर हाई कोर्ट ने इसे सही माना. कोर्ट ने पाया कि कसडोल चुनाव में मिश्र ने निर्धारित खर्च सीमा से 249 रुपये और 72 पैसे ज्यादा खर्च किए थे. कोर्ट ने मिश्र को छह साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया. अब नैतिकता की मार थी. इसलिए डीपी मिश्र को पीछे हटना पड़ा.

बाकी सन्नी देओल की सांसदी रहेगी या जाएगी, हम अपडेट देते रहेंगे.


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