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उत्तर प्रदेश में एक IPS अधिकारी के ट्रांसफर पर क्यों तहलका मचा हुआ है?

सबसे पहले ये प्रेस नोट देखिए. 15 जून को जारी हुआ है.

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14 आईपीएस अधिकारियों का यूपी में ट्रांसफर हुआ है.

इसमें 14 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर का जिक्र है. मगर उत्तर प्रदेश में बवाल एक ट्रांसफर को लेकर मच गया है. लिस्ट में 9वें नंबर पर लिखे नाम सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को लेकर. सत्यार्थ प्रयागराज के एसएसपी पद पर तैनात थे. ट्रांसफर पर बवाल हुआ तो हुआ, आग में घी का काम उनको वेटिंग में डालने के फैसले ने.

अब आप कहेंगे कि एक ट्रांसफर ही तो है. और वेटिंग में डाल दिया तो कौन सी बड़ी बात. बहुत से अधिकारी होते हैं. पर यहां बवाल मचा सत्यार्थ के पिछले दिनों की गईं कार्रवाईयों और फिर इस एक्शन को लेकर. कार्रवाई थी 69000 शिक्षक भर्ती में पैसे लेकर नौकरी दिलाने वाले गिरोह के भंडाफोड़ की. और अब ये ट्रांसफर. फिर वेटिंग लिस्ट में नाम. तो इन दोनों को जोड़कर देखा जा रहा है.

Satyarth
प्रयागराज एसएसपी रहते सत्यार्थ ने 69000 भर्ती में बड़ी कार्रवाई की थी.

यूपी में 69000 शिक्षकों की भर्ती के मामले में वैसे भी काफी दिनों से गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं. मगर सरकार इसे मान नहीं रही थी. इस बीच सत्यार्थ अनिरुद्ध की कार्रवाई ने इस गड़बड़ी की बात को और तूल दे दिया. इस भर्ती मामले में पहले से एक्टिव यूपी का विपक्ष अब इस ट्रांसफर मामले में भी कूद गया है. दरअसल एसएसपी प्रयागराज के ट्विटर अकाउंट से सत्यार्थ के नाम से एक मैसेज जारी हुआ. लिखा था –

एस एस पी प्रयागराज पद पर रहते हुए प्रयागराज की जनता ने जो प्यार और भरोसा दिया उसका मैं सदैव आभारी रहूँगा। आपका यह भरोसा पुलिस पर सदैव बना रहे यही कामना है। प्रयागराजवासियों को अशेष शुभकामनायें।

इस ट्वीट को कांग्रेस महासचिव और आजकल यूपी में एक्टिव प्रियंका गांधी ने रीट्वीट करते हुए लिखा –

प्रयागराज के SSP श्री सत्यार्थ अनिरुद्ध का ट्वीट देख कर आश्चर्य हुआ। जिस समय उन्होंने इतने बड़े घोटाले का खुलासा किया है, उनके जाने से जाँच का नुकसान न हो। वजह जो भी है, ऐसे अफसरों को पब्लिक का पूरा समर्थन मिलना चाहिए जो ईमानदारी से, निर्भय होकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। आपको हमारी शुभकामनाएँ। यह विश्वास है कि जहां भी आपकी ड्यूटी होगी वहाँ आप सच्चाई और प्रशासन की पारदर्शिता के लिए काम करेंगे।

इलाहाबाद में एनएसयूआई और समाजवादी छात्रसभा ने भी इस ट्रांसफर के विरोध में प्रदर्शन किया. विपक्ष योगी सरकार पर आरोप लगा रहा है कि एक ईमानदार अधिकारी को सही कार्रवाई करने पर नाप दिया गया.

सरकार क्या कह रही?

मगर क्या बात सिर्फ इतनी है. क्या ट्रांसफर के बाद तैनाती ना मिलने के पीछे 69000 भर्ती मामले में कार्रवाई है? इस पर सरकार का पक्ष जानने से पहले आपको एक और जानकारी दे दें कि सत्यार्थ अनिरुद्ध को कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया है. उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.

सरकार से इस मामले में हमने बात की सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार से. वो बोले-

सत्यार्थ कोरोना पॉजिटिव निकले हैं. उनके घर का नौकर, गनर सबको कोरोना निकला है. उनको स्वास्थ्य लाभ देने के लिए फिलहाल वेटिंग में डाला गया है. एसएसपी का काम पब्लिक इंटरैक्शन का है. ऐसे में कोरोना के चलते ये नहीं हो सकता तो नई तैनाती नहीं दी गई. उनके ठीक होने पर दूसरी जिम्मेदारी दी जाएगी. 69000 भर्ती मामले से इसे जोड़ना गलत है. सरकार के आदेश पर ही जांच हो रही है. एसएसपी खुद ये नहीं कर रहे. अब एसटीएफ मामले की जांच कर रहा है. तो इससे ट्रांसफर का कोई जुड़ाव नहीं. विपक्ष बेफिजूल इसे मुद्दा बना रहा है.

69000 भर्ती में क्या कार्रवाई की थी?

69000 भर्ती में तमाम अभ्यर्थियों में से एक राहुल सिंह ने प्रयागराज एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध से उनसे नौकरी के बहाने पैसे ठगने की शिकायत की थी. सत्यार्थ ने 4 जून को एफआईआर दर्ज करवाई. मामले में दो ऐसे आईपीएस अफसरों को लगाया गया, जिनकी पहचान पश्चिमी यूपी में नकल माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए रही है. अशोक वेंकटेश और अनिल यादव.

4 जून को ही 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 22 लाख रुपये, फॉर्च्यूनर और बोलेरो गाड़ी बरामद हुईं. बाकायदा एक पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ जो राहुल जैसे तमाम लोगों से पैसे लेकर बैठा था. दो बड़े नकल माफिया का इसमें नाम आया. केएल पटेल और ललित त्रिपाठी. पटेल का नाम एमपी में हुए भर्ती वाले व्यापमं घोटाले में भी आया था. मामले को इसके बाद यूपी एसटीएफ को सौंप दिया गया.

इस बीच इस भर्ती घोटाले में एक और नाम सामने आया. प्रयागराज के बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव का. एसटीएफ ने 15 जून को इसको वांटेड भी घोषित किया. चंद्रमा सिंह यादव फिलहाल बीजेपी किसान मोर्चे में प्रदेश की कार्यसमिति के सदस्य हैं. इसके अलावा वह वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं. इस बीच एक पोस्टर भी लखनऊ में लग गया जो सोशल मीडिया पर वायरल है. देखिए –

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स्थानीय पत्रकार अशोक पांडेय बताते हैं कि 69000 शिक्षक भर्ती में धांधली का खुलासा हुआ तो विपक्ष को एक मौका मिल गया. विपक्ष ने इसे हाथों-हाथ लिया और सरकार को घेरना शुरू कर दिया. वो चाहे प्रियंका गांधी हों, अखिलेश हों या मायावती. खैर वह यह भी बोले कि अगर एसएसपी इस मामले में न एक्टिव होते तो कुछ होता भी नहीं. सरकार कहां धांधली की बात मान रही थी. लेकिन जब केएल पटेल गिरफ्तार हुआ तो सरकार घिर गई और फिर एसटीएफ जांच का आदेश देना पड़ा. सत्यार्थ को फिलहाल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.


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