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लेह में दिए अपने भाषण में पीएम मोदी ने चीन का नाम लिए बिना क्या-क्या कहा?

पीएम नरेंद्र मोदी. लद्दाख़ में हैं. 3 जुलाई (शुक्रवार) की सुबह ही वो लेह पहुंचे. उनके साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत और आर्मी चीफ एम.एम नरवाणे भी थे. पीएम ने आर्मी, एयर फोर्स और ITBP के जवानों से बातचीत की. सीनियर अधिकारियों ने उन्हें पूरे इलाके की और हालात की जानकारी दी. इसके बाद पीएम ने सभी जवानों को संबोधित किया. 26 मिनट 37 सेकंड्स का भाषण दिया.

क्या-क्या कहा पीएम मोदी ने?

– आपका ये हौसला, शौर्य और मां भारती के मान-सम्मान की रक्षा के लिए आपका समर्पण अतुलनीय है. आपकी जीवटता भी जीवन में किसी से कम नहीं है. जिन कठिन परिस्थितियों में जिस ऊंचाई पर आप मां भारती की ढाल बनकर उसकी रक्षा, उसकी सेवा करते हैं, उसका मुकाबला पूरे विश्व में कोई नहीं कर सकता.

– जब देश की रक्षा आपके हाथों में है, आपके मजबूत इरादों में है, तो सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि पूरे देश को अटूट विश्वास है और देश निश्चिंत भी है.

– आत्मनिर्भर भारत का संकल्प आपके त्याग, बलिदान, पुरुषार्थ के कारण और मज़बूत होता है.

Pm Narendra Modi In Leh
पीएम मोदी 3 जुलाई की सुबह ही लेह पहुंचे. जवानों से मुलाकात की. इलाके की मौजूदा स्थिति समझी. फिर जवानों को संबोधित किया. (फोटो- ट्विटर BJP)

गलवान घाटी की घटना पर क्या कहा?

– अभी जो आपने और आपके साथियों ने वीरता दिखाई है, उसने पूरी दुनिया में ये संदेश दिया है कि भारत की ताकत क्या है.

– मैं गलवान घाटी में शहीद हुए अपने वीर जवानों को पुन: पुनः श्रद्धांजलि देता हूं. आज हर देशवासी का सिर, आपके सामने आदरपूर्वक नमन करता है. आज हर भारतीय की छाती आपकी वीरता और पराक्रम से फूली हुई है.

– सिंधु के आशीर्वाद से ये धरती पुण्य हुई है. वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं को ये धरती अपने-आप में समेटे हुए हैं.

– लेह-लद्दाख़ से लेकर कारगिल और सियाचिन तक, रेदांग्ला की बर्फिली चोटियों से लेकर गलवान घाटी की ठंडे पानी की धारा तक, हर चोटी, हर पहाड़, हर कंकड़-पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही देते हैं.

– 14 कोर की जांबाजी के किस्से हर तरफ है. दुनिया ने आपका अदम्य साहस देखा, जाना है. आपकी शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रही हैं.

– लद्दाख़ का ये पूरा हिस्सा भारत का मस्तक है. 130 करोड़ भारतियों के मान-सम्मान का प्रतीक है.

कुशक बकुला रिनपोछे को याद किया

– ये भूमि, भारत के लिए सबकुछ त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्रभक्तों की धरती है. इस धरती ने कुशक बकुला रिनपोछे, जैसे महान राष्ट्रभक्त देश को दिए हैं.

– रिनपोछे की अगुवाई में यहां अलगाव पैदा करने की हर साजिश को लद्दाख की राष्ट्रभक्त जनता ने नाकाम किया. ये उन्हीं के प्रेरक प्रयासों का परिणाम था कि देश को, भारतीय सेना को, लद्दाख़ स्काउट नाम से इनफ्रंट्री रेजिमेंट बनाने की प्रेरणा मिली.

– आप उस धरती के वीर है, जिसने हज़ारों वर्षों से, अनेकों हमलों का, अत्याचारों का मुंहतोड़ जवाब दिया है. हम वो लोग हैं जो बांसुरी धारी कृष्ण की पूजा करते हैं, तो हम वही लोग हैं जो सुदर्शन चक्र धारी कृष्ण को भी आदर्श मान करके चलते हैं. इसी प्रेरणा से हर आक्रमण के बाद, भारत और सशक्त होकर उभरा है.

– राष्ट्र, दुनिया, मानवता की प्रगति के लिए शांति और मित्रता हर कोई स्वीकार करता है. हर कोई मानता है कि ज़रूरी है, लेकिन हम ये भी जानते हैं कि शांति निर्बल, कमज़ोर कभी नहीं ला सकता. शांति की पहल नहीं कर सकता. वीरता ही शांति की पूर्व शर्त होती है.

– भारत आज जल, थल और अंतरिक्ष तक अगर अपनी ताकत बढ़ा रहा है तो उसके पीछे का लक्ष्य मानव कल्याण ही है. भारत आज आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है, आधुनिक तकनीक अगर भारत की सेना के लिए ला रहे हैं, तो उसके पीछे की भावना भी यही है.

– विश्व युद्ध हो या फिर शांति की बात, जब भी ज़रूरत पड़ी है, विश्व ने हमारे वीरों का पराक्रम भी देखा है और विश्व शांति के उनके प्रयासों को महसूस भी किया है. हमने हमेशा मानवता की रक्षा और सुरक्षा के लिए काम किया, जीवन खपाया है. आप सभी भारत की इस संस्कृति को साबित करने वाले लीडर्स हो.

Pm Narendra Modi In Leh 2
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों ने 15 जून को गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के ऊपर हमला किया था. इस घटना के बाद पीएम मोदी का लद्दाख़ दौरा काफी अहम माना जा रहा है. (फोटो- ट्विटर BJP)

बिना नाम लिए चीन की हरकत पर जवाब

– तिरुवल्लुवर ने कहा था शौर्य, सम्मान, मर्यादापूर्ण व्यवहार की परम्परा और विश्वसनीयता ये चार गुण किसी भी देश की सेना का प्रतिबिंब होते हैं. भारतीय सेना हमेशा इसी रास्ते पर चली है.

– विस्तारवाद का युग खत्म हो चुका है. ये युग विकासवाद का है. तेज़ी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है. विकासवाद के लिए ही अवसर है. और विकासवाद ही भविष्य का आधार है.

– बीती शताब्दियों में विस्तारवाद ने ही मानवता का विनाश करने का प्रयास किया. विस्तारवाद की जीत जब किसी पर सवार हुई है, उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है. ये न भूलें कि इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट गई हैं. या मुड़ने के लिए मजबूर हो गई हैं. यही अनुभव रहा है. इसी के आधार पर इस बार फिर से, पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है.

बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर क्या बोले?

– सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार हो, या साजो-सामान हो, इन सभी पर हम बहुत ध्यान देते रहे हैं. अब देश में बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करीब-करीब तीन गुना कर दिया गया है. इससे बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट और सीमा पर सड़कें पुल बनाने का काम भी बहुत तेज़ी से हुआ है. इसका एक बड़ा लाभ ये हुआ कि अब आप तक सामान भी कम समय में पहुंचता है.

– आप सभी से प्रेरणा लेते हुए हम मिलकर हर चुनौती पर, मुश्किल से मुश्किल चुनौती पर जीत विजय प्राप्त करते रहे हैं, विजय प्राप्त करते रहेंगे.

लद्दाख़ में क्या हुआ था?

लद्दाख में 15 जून की रात गलवान घाटी में इंडियन आर्मी और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. कई घायल हुए थे. PLA के जवानों के भी घायल और मारे जाने की खबर है, लेकिन संख्या का खुलासा नहीं हुआ है.

इस लड़ाई के पहले से ही LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ था. कई स्तर की बातचीत भी हुई थी, फिर भी ये घटना हुई. 15 जून के बाद शांति लाने और तनाव कम करने के लिए भी कई बार बातचीत हुई, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.

तनाव बना हुआ है. ऐसे में पीएम मोदी का लेह जाना बहुत अहम और बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है.


वीडियो देखें: भारत-चीन गतिरोध के बाद लेह पहुंचे पीएम मोदी ने जवानों से क्या बात की?

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