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CRPF की इस असिस्टेंट कमांडेंट ने अजनबी बुजुर्ग के लिए जो किया वो दिल जीत लेगा

मोनिका साल्वे. CRPF की 215वीं बटालियन का हिस्सा. असिस्टेंट कमांडेंट. एक बुजुर्ग की जान बचाकर तारीफ़ें कमाई हैं इन्होंने.

मोनिका महाराष्ट्र के बुलढाना की रहने वाली हैं. फिलहाल बिहार के जमुई में पोस्टिंग है उनकी. छुट्टियों में घर आई हुई थीं. 9 सितंबर की सुबह तकरीबन 10 बजे की बात है. मोनिका की मौसी को कहीं जाना था. उन्हें बस में चढ़ाने मोनिका भी बस स्टैंड तक साथ आईं. एकाएक हल्की सी आवाज़ सुनाई दी. किसी ने मदद के लिए पुकारा था. पलटकर देखा, तो बेंच पर बैठे एक बुजुर्ग नीचे गिर रहे थे. बेहोशी की हालत में थे. आंखों पर लगा चश्मा ज़मीन पर गिर गया था. पसीना से तर थे. सीने में तेज़ दर्द उठा था उनके.

बुजुर्ग के पास खड़ा शख्स उन्हें संभाल रहा था. वही इंसान मदद के लिए पुकार रहा था. मोनिका फौरन वहां गईं. उनकी मां नर्स हैं. कुछ वक़्त पहले ही नौकरी से रिटायर हुई हैं. उनकी वजह से मोनिका को थोड़ी मेडिकल की समझ थी. उन्हें लग गया, बुजुर्ग को शायद दिल का दौरा पड़ा है. ऐसी इमरजेंसी में क्या करना चाहिए, आइडिया था उन्हें. मोनिका ने आसपास मौजूद लोगों की मदद से बुजुर्ग को बेंच पर लिटाया. उनकी शर्ट खुलवाई. छाती दबाकर, मुंह में सांस फूंककर CPR दिया उन्हें. काफी देर तक वो करती रहीं ऐसा. तकरीबन 100 बार छाती पर पंप दिया होगा उन्होंने. तब जाकर बुजुर्ग को होश आया.

इंडिया टुडे से बात करते हुए मोनिका ने बताया-

मैंने तकरीबन 100 बार CPR दिया होगा उन बुजुर्ग को. मेरी कोशिश कामयाब रही. उन्हें होश आ गया. उन्हें ऑटो में बिठाकर मैं उन्हें डॉक्टर के पास ले गई. इमरजेंसी में अटेंड किया डॉक्टरों ने उन्हें. ECG करने के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की. दामोदर खरात नाम के उन बुजुर्ग को हार्ट अटैक आया था. 

बुजुर्ग का नाम है दामोदर खरात. डॉक्टरों ने कहा, उन्हें अस्पताल में भर्ती करना होगा. वहां उनकी एंजियोग्रफी वगैरह होनी थी. दामोदर के पास हेल्थ कार्ड था. मगर कोई करीबी नहीं था उनके साथ. न ही पास में पैसा ही था. अगले दिन मोनिका की छुट्टियां भी ख़त्म हो रही थीं. उन्हें जमुई के लिए ट्रेन लेनी थी. सो उन्होंने दामोदर को अस्पताल में भर्ती करवाया. उनके देखभाल की जिम्मेदारी अपनी मां को सौंपी. मोनिका ने 2015 में CRPF जॉइन किया. 2017 से ही वो जमुई में पोस्टेड हैं. जमुई नक्सली इलाका है. काफी पिछड़ा है. इंडिया टुडे के मुताबिक, मोनिका साल्वे अपनी रोज़मर्रा की ड्यूटी के अलावा महिलाओं और बच्चों के लिए वेलफ़ेयर से जुड़े काम भी करती हैं. कुछ समय पहले उन्होंने अपने दोस्तों की मदद से जमुई के एक हॉस्टल में बच्चों के लिए स्टडी रूम बनवाया था. एक लाइब्रेरी भी बनवाई.

यूं तो किसी की जान बचाना, किसी की मदद करना, इसमें कोई वाहवाही नहीं. मगर पुलिस के लोग, सरकारी कर्मचारी, अधिकारी कई बार नेगेटिव चीजों की वजह से ख़बरों में रहते हैं. ऐसे में कोई कुछ बेहतर करे, जो उसकी भी शाबाशी मिलनी चाहिए.


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