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66 फीसदी लोगों ने माना कोरोना और लॉकडाउन की वजह से घट गई इनकम

साल 2020 में कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह दुनिया थम गई. जहां एक तरफ इस महामारी ने लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया, तो वहीं इसे फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से लोगों के काम-धंधे ठप हो गए. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि महामारी का असर हर इंडस्ट्री पर पड़ा, लेकिन फूड, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन जैसी कुछ ऐसी फिल्ड्स हैं, जहां लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला. होटल बंद हो गए, ट्रैवलिंग रोक दी गई और पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया. नतीजा ये निकला कि लोगों को अपनी नौकरियां से हाथ धोना पड़ा. इंडिया टुडे कार्वी इनसाइट्स ‘मूड ऑफ द नेशन’  (Mood Of The Nation)सर्वे में बहुत सारे लोगों ने माना कि लॉकडाउन ने कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद की. लेकिन इसका अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा असर पड़ा.

सर्वे में लोगों से पूछा गया कि लॉकडाउन का क्या असर हुआ? 39 फीसदी ने कहा कि इससे कोरोना संक्रमण का फैलाव रुका है. जबकि 28 फीसदी लोगों का कहना है कि लॉकडाउन से संक्रमण पर तो लगाम लगी, लेकिन साथ ही दूसरी समस्याएं भी पैदा हो गई. वहीं 13 फीसदी लोगों का मानना है कि लॉकडाउन का कोई असर हुआ ही नहीं है. सर्वे में 10 फीसदी ऐसे भी लोग हैं जो ये मानते हैं कि लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है. वहीं सात फीसदी लोगों का मानना है कि लॉकडाउन की वजह से कोरोना का फैलाव तो कम हुआ है लेकिन इससे देश की अर्थव्यवस्था संकट में आ गई.

India Today

मार्च 2020 में पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था. धीरे-धीरे कई चरमों में इसे हटाया गया. विपक्ष ने यह कहते हुए सरकार की आलोचना की थी कि जब देश में कोरोना के केस कम थे तो लॉकडाउन लगा दिया और जब देश केस बढ़ने लगे तो सरकार लॉकडाउन में ढील दे रही है.

‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को संभालने में मोदी सरकार कितनी सफल रही. सर्वे में 20 फीसदी लोगों ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सरकार ने कोरोना के असर को बेहतरीन तरीके से हैंडल किया. 47 फीसदी लोगों ने कहा कि सरकार इससे अच्छे तरीके से निपट रही है. वहीं 22 फीसदी लोगों ने सरकार की कोशिश को औसत बताया. जबकि 8 फीसदी ने खराब और दो फीसदी ने सरकार को नाकाम करार दिया.

कोरोना को लेकर मोदी सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा? इस सवाल के जवाब में 23 फीसदी लोगों ने इसे बेहतरीन कहा. 50 फीसदी ने अच्छा कहा और 18 फीसदी ने औसत करार दिया. 7 फीसदी लोगो ने कहा कि कोरोना को लेकर मोदी सरकार का प्रदर्शन खराब रहा. जबकि दो फीसदी लोगों ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया.

Modi1

कोरोना के दौर में लोगों की नौकरियां जाने की खबरें मीडिया की सुर्खियां बनी रहीं. जॉब जाने की वजह से कई लोगों द्वारा आत्महत्या किए जाने की भी खबरें आईं. सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि आर्थिक हालात पर कोरोना का असर कैसा रहा? तो 66 फीसदी लोगों ने कहा कि उनकी आमदनी घट गई. वहीं 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी नौकरी चली गई. 12 फीसदी लोग ऐसे थे जिनका मानना है कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा. जबकि तीन फीसदी लोगों ने कहा कि उनकी आमदनी बढ़ी है.

Econimic

कैसे हुआ सर्वे?

मूड ऑफ दे नेशन के सर्वे में 3 जनवरी 2021 से 13 जनवरी 2021 के बीच लोगों की राय ली गई. सर्वे में कुल 12,232 लोग शामिल हुए. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 67 फीसद और शहरी क्षेत्रों के 33 फीसद लोग शामिल थे. सर्वे में 19 राज्यों के 97 संसदीय क्षेत्र और 194 विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने हिस्सा लिया है.


बजट से पहले आपको ये कुछ बातें समझ लेनी चाहिए!

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