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गुजरातः वोटों की गिनती में घपले के चलते जीते थे BJP के मंत्री, हाई कोर्ट ने चुनाव ही रद्द कर दिया

गुजरात में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है. शिक्षा और कानून मंत्री भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा की विधायकी निरस्त हो गई है. गुजरात हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया है. चुड़ास्मा साल 2017 के विधानसभा चुनावों में धोलका सीट से जीते थे. लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार अश्विन राठौड़ ने चुनाव नतीजे को चुनौती दी थी. इस पर अब फैसला आया है.

गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने कहा कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. पार्टी चुड़ास्मा के साथ है. पार्टी हाई कमान से बातचीत के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे. वहीं कांग्रेस ने इस फैसले को सत्य की जीत बताया. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने ट्वीट किया,


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा चुनाव में 327 वोट से जीते थे. कांग्रेस उम्मीदवार अश्विन राठौड़ ने जनवरी 2018 में नतीजे को हाई कोर्ट में चुनौती दी. अपनी याचिका में उन्होंने मतों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाया.

कांग्रेस उम्मीदवार ने क्या कहा था

उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर और धोलका के डिप्टी कलेक्टर धवल जानी ने पोस्टल बैलेट की गिनती में गड़बड़ी की. जानी ने उन्हें मिले 429 बैलेट पेपर को रद्द कर दिया. राठौड़ ने कहा कि अगर इन बैलेट पेपर गिना जाता तो वे चुनाव जीतते, क्योंकि जीत-हार का अंतर काफी कम रहा था. कांग्रेस उम्मीदवार ने याचिका में खुद को विजयी घोषित करने की मांग भी की थी.

चूड़ास्मा की ओर से कोर्ट से अर्जी खारिज करने की मांग की गई थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी. कहा था कि फैसला देने से पहले सुनवाई जरूरी है.

कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला देते हुए माना कि मतगणना के दौरान काफी अनियमितताएं थीं. साथ ही धोखेबाजी और गलत आचरण भी देखने को मिला. इसलिए पूरा चुनाव निरस्त किया जाता है. जस्टिस परेश उपाध्याय की बैंच ने यह फैसला दिया. हालांकि उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के विजयी घोषित किए जाने की अर्जी को खारिज कर दिया.

चुनाव में कितने वोट मिले थे

चुनाव परिणामों के अनुसार, चुड़ास्मा को 71 हजार 530 मत मिले थे. वहीं कांग्रेस के अश्विन राठौड़ को 71 हजार 203 मत मिले.

कौन हैं भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा

भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा सीनियर नेता हैं. वे क्षत्रिय समुदाय से आते हैं. बीजेपी से पहले वे जनसंघ में भी रह चुके हैं. वे पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं. इसके अलावा पहले भी गुजरात सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वे कई बार विवादों में रहे हैं. जनवरी 2019 में उन्होंने रेप के दोषी आसाराम को पत्र लिखकर 14 फरवरी को मातृ-पितृ दिवस मनाने पर बधाई दी थी. इसी तरह जून 2017 में वे तांत्रिकों के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.


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