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शहीदों को सम्मान देना है तो गौतम गंभीर से सीखिए मनोज तिवारी जी

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छत्तीसगढ़ के सुकमा इलाके में 24 अप्रैल को हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ़ के 25 जवान मारे गए. गौतम गंभीर ने इस मामले में एक शानदार काम किया है. उन्होंने इस हमले में मारे गए सभी जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का जिम्मा लिया है. गंभीर का ये प्रयास सराहनीय है और वो बधाई के पात्र हैं.

गौतम गंभीर की एक फाउन्डेशन चलती है जिसका नाम है गौतम गंभीर फाउन्डेशन. इसी फाउंडेशन के ज़रिये वो ये काम करेंगे. उन्होंने बताया कि इस मामले में उनकी इस फाउंडेशन ने काम कार्रवाई करनी शुरू कर दी है.

गंभीर फिलहाल आईपीएल में बिज़ी हैं और उन्होंने बताया कि जब उन्हें इस हमले की खबर मिली तो वो हिल गए थे. जब उन्होंने हमले की तस्वीरें देखीं और खबरें पढ़ीं तो वो अन्दर से खोखले हो गए.

“मैंने बुधवार को अखबार देखा तो मुझे अन्दर तक चीर देने वाली तस्वीरें देखने को मिलीं जिसमें शहीद हुए सीआरपीएफ़ जवानों की बेटियां दिख रही थीं. एक अपने पिता को सलामी दे रही थी और दूसरी को उसके घरवाले सांत्वना दे रहे थे. मेरी संस्था सीआरपीएफ़ के शहीद हुए जवानों के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी. मेरी टीम ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है.”

कोलकाता नाइट राइडर्स ने बुधवार को राइज़िंग पुणे सुपरजायंट्स के खिलाफ़ मैच में बांह पर काली पट्टी बांधी हुई थी. वो पट्टी सुकमा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए थी.

गंभीर ने बताया कि वो इस खबर से इतना प्रभावित हुए थे कि मैच के पहले उन्हें कंसन्ट्रेट करने में दिक्कत हो रही थी. गंभीर ने उस मैच में मैच जिताऊ फ़िफ्टी भी मारी थी.

24 अप्रैल को 74वीं बटालियन पर उस वक़्त हुआ जब वो खाने के लिए बैठे थे. घेरकर तीन तरफ से गोलियां चलनी शुरू हो गईं. जवानों ने जवाब में हाई एक्सप्लोसिव बम भी दागे. पर कई नक्सली पेड़ पर चढ़े हुए थे. 15 फीट की ऊंचाई से जवानों पर गोलियां दागी जा रही थीं. कई जवान ज़ख़्मी भी हुए हैं. इस हमले में 10-12 नक्सली मारे गए थे.

गौतम गंभीर सेनाओं का बड़ा सम्मान करते हैं और पहले भी उन्होंने सेना के जवानों के बारे में बातें कहीं हैं. कश्मीर के वायरल हुए वीडियो में जिसमें CRPF के जवान को कुछ कश्मीरी थप्पड़, घूंसे और लात मारते दिख रहे थे, को देखकर गंभीर ने गुस्से में ट्वीट भी किया था जिसमें उन्होंने कहा था “आर्मी के जवानों को उन पर पड़े हर थप्पड़ के एवज में कम से कम 100 जिहादियों को मार गिराना चाहिए. जिसे भी आज़ादी चाहिए, अभी निकल जाए. कश्मीर हमारा है.”

इसके बाद फिर एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने देश के झंडे के रंगों के बारे में भी बताया. कहा, “एंटी इंडियन्स ये भूल गए हैं कि हमारे झंडे में भगवा का मतलब हमारे गुस्से की आग, सफ़ेद का मतलब जिहादियों का कफ़न और हरे का मतलब आतंक के लिए नफरत होता है.”

गौतम गंभीर के सीआरपीएफ़ के शहीद हुए जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का कदम बहुत मारक है. उनका ये काम हमें ये बताता है कि हम कितने तरीकों से देश के काम आ सकते हैं. सामर्थ्य हो तो आपको ऐसे काम करते रहने चाहिए. सामर्थ्य नहीं भी हो तो भी ट्राई मार लेना चाहिए.

26 अप्रैल को आये MCD चुनावों के नतीजे के बाद दिल्ली भाजपा ने जश्न न मनाने की बात कही थी. ऐसा उन्होंने सुकमा में शहीद हुए जवानों की वजह से किया था. वो अपने इस अंदाज़ में जवानों के परिवारजनों के साथ उनके इस शोक के समय में साथ होना चाहते थे. मनोज तिवारी ने जीत सुकमा के शहीद जवानों को डेडीकेट कर दी थी. ये सांकेतिक साथ था. किसी ने भाजपा को सलाह भी दी थी कि अगर असल में कुछ करना है तो मौन रखकर क्यूं, जीते हुए सभी पार्षद अपनी एक-एक महीने की तनख्वाह शहीदों के परिवार को क्यूं नहीं दे देते. लेकिन सरकार ने सांकेतिक श्रद्धांजलि को ही बेहतर समझा. अब जिस तरह से गौतम गंभीर ने आगे आकर ये कदम उठाया है, नेतागणों को ज़रूर एक पाठ मिला होगा.


 ये भी पढ़ें:

अक्षय कुमार से बड़े देशभक्त हैं गौतम गंभीर, कश्मीरी लड़कों को दिया जवाब

आईपीएल में गंभीर ने एक नए हथियार का इस्तेमाल किया था

ये वो सिस्टम है जिसमें शहीद के शव को रोक सीएम के काफिले को हरी बत्ती दी जाती है

 

 

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