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मोदी सरकार ने मिलिटरी इंजिनियरिंग सर्विस में खत्म किए 9304 पद

7 मई, 2020. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विस के 9304 पदों को खत्म करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी. इस फैसले के बाद मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विस में बेसिक और इंडस्ट्रियल वर्कफोर्स के 9304 पद खत्म हो जाएंगे.

अपने बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ये फैसला लेफ्टिनेंट जनरल शेकतकर की अध्यक्षता में बनी कमिटी की सिफारिश पर लिया गया है. कमेटी ने आर्म्ड फोर्सेज की क्षमता बढ़ाने और रक्षा खर्च को संतुलित करने के लिए यह सिफारिश की थी.

मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विस के इंजीनियर-इन-चीफ के प्रस्ताव के आधार पर कमिटी ने ये सिफारिश की थी. इसी पर बेसिक और इंडस्ट्रियल कर्मचारियों के कुल 13,157 रिक्त पदों में से 9,304 पदों को समाप्त करने की मंजूरी दी गई है. यह सिफारिश लेफ्टिनेंट जनरल शेकतकर की उसी कमिटी के सुझावों में से एक है, जो रक्षा खर्च को कम करने और सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए बनाई गई थी.

शेकतकर कमेटी क्या है?

मई, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकतकर की अगुवाई में 11 सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमिटी बनाई थी. इस कमिटी का उद्देश्य आर्म्ड फोर्सेज की क्षमता बढ़ाने और रक्षा खर्च को संतुलित करने के उपाय सुझाना था. दिसंबर, 2016 में शेकतकर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. उसमें सैन्य सुधारों की बातें थीं. इंजीनियरिंग कोर का आकार घटाने और मझोले स्तर के अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए जॉइंट सर्विसेज वॉर कॉलेज बनाने की सलाह थी. वहां गोली-बारी की ट्रेनिंग का खर्च सिमुलेटर्स की मदद से कम करने जैसे सुझाव भी दिए गए थे.

लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेकतकर
लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेकतकर

CDS के पद और मिलिटरी अफेयर्स डिपार्टमेंट के गठन की सिफारिश भी शेकतकर कमेटी ने ही की थी, जिस पर सरकार अमल कर चुकी है. कमेटी की सिफारिशों में से एक सिविलियन वर्कफोर्स का पुनर्गठन किया जाना भी शामिल है, ताकि MES का काम आंशिक रूप से विभागीय कर्मचारियों द्वारा किया जा सके और अन्य कार्यों को आउटसोर्स किया जा सके.

20 अप्रैल, 2020 को दिल्ली में हुई एक हाई लेवल मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शेकतकर कमेटी की सिफारिशों का रिव्यू भी किया था. इस मीटिंग में CDS जनरल बिपिन रावत, आर्मी चीफ जनरल एमएम नरावने, नेवी चीफ एडमिरल करमबीर सिंह, एयर चीफ मार्शल आर. के. एस. भदौरिया, रक्षा सचिव अजय कुमार और DRDO चेयरमैन जी सतीश रेड्डी शामिल थे.

MES क्या है?

मिलिटरी इंजीनियर सर्विसेज इंडियन आर्मी की प्राथमिक कंस्ट्रक्शन एजेंसी है. ये भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स में से एक है, जो सशस्त्र बलों को रियर लाइन इंजीनियरिंग सपोर्ट देता है. MES देश की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन और मेन्टेनेंस एजेंसी में से एक है. MES का सालाना बजट लगभग 13000 करोड़ का है.

MES के पूरे देशभर में 600 से ज्यादा स्टेशन हैं. इनके जरिए MES एयरफोर्स, नौसेना, भारतीय सेना और DRDO को इंजीनियरिंग सपोर्ट उपलब्ध कराता है. MES एक सैन्य संगठन है, लेकिन इसके कर्मचारियों और अधिकारियों में आर्मी और सिविलियन, दोनों घटक शामिल हैं.


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