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कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने के लिए कितने तैयार हैं हम?

कोरोना महामारी की तीसरी लहर हमारे सामने कैसी चुनौती पेश करेगी, इसका ठीक अनुमान हमारे पास अभी नहीं है. वायरस कितना घातक है, उसे लेकर किसी के दिमाग में संशय नहीं है. लेकिन उससे लड़ने के लिए जो चाहिए, वो करने के लिए सरकारें अपना मन बना ही नहीं पा रही हैं. एक दिन रिकॉर्ड बनाकर टीकाकरण का क्या हाल है, हम नियमित रूप से आपको बता रहे हैं. वैज्ञानिक चेतना का क ख ग जानने वाले किसी भी मुल्क में ये फैसला एक झटके में ले लिया जाता लेकिन हमारे यहां इस चीज़ पर मंथन चल ही रहा है कि कांवड़ यात्रा हो कि न हो. ये सब तब है, जब आंकड़ों ने एक बार के लिए भी संकेत नहीं दिया कि भारत ने महामारी की दूसरी लहर को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया. तो आज एक बार फिर हम महामारी की तीसरी लहर और उसे लेकर सरकारी तैयारी और कशमकश की बात करेंगे.

क्या खत्म हो चुका है कोरोना?

अप्रैल और मई. इन दो महीनों में हमने देश को कोरोना के आगे बिल्कुल बेबस देखा. मरीजों को अस्पतालों में बेड्स नहीं मिल रहे थे, ऑक्सीजन के सिलेंडर्स के लिए मारामारी थी, अस्पतालों के बाहर तड़प तड़प कर लोग मर रहे थे, शमशानों में लाशों का अंबार था. कितने भयानक हालात थे, हम सबको याद है. बहुत कुछ खोकर हम वहां से आगे बढ़े. कोरोना के केस लगातार कम हो रहे हैं. आबादी का एक हिस्सा ये मान चुका है कि कोरोना चला गया. हमें बाज़ारों में भीड़ दिखती है. पर्यटक स्थलों पर लोगों का जुटान हो रहा है.

लंबे प्रतिबंधों से ऊब चुके लोग अब वो सब करना चाहते हैं, जो इतने दिनों में नहीं कर पाए. लेकिन जब ये शुरू होता है, तो हमें कोरोना की तीसरी लहर का समाचार मिलता है. कोरोना के फिर बढ़ने की चिंता सरकार की तरफ से जताई जा रही है. इस पर केंद्र और राज्य की सरकारें कुछ कदम उठाती भी दिखती हैं. तो क्या कोरोना कम होने का जो सुकून हम अभी जी रहे हैं, वो अल्पकालिक है? क्या दूसरी लहर की तरफ हालात फिर बिगड़ जाएंगे? इस बारे में क्या संकेत मिल रहे हैं, शो में इस पर बात होगी. लेकिन पहले महामारी से जुड़े आंकड़े देखिए.

पिछले 24 घंटों के दौरान देश में
नए मामले – 32 हज़ार 906
ठीक हुए मरीज़ – 49 हज़ार 7
मौतें – 2 हज़ार 20

इन सबको मिलाकर देश में

कुल मामले – 3 करोड़ 9 लाख 7 हज़ार 282
ठीक हुए मरीज़ – 3 करोड़ 63 हज़ार 720
मौतें – 4 लाख 10 हज़ार 784

लगातार घटते संक्रमण से देश में कोरोना की एक बार फिर वो स्थिति हो गई है जो हमने जनवरी में देखी. कोरोना वाला ग्राफ पीक पर जाकर अब नीचे की तरफ जा रहा है. दिल्ली जैसे शहरों में जहां दूसरी लहर के दौरान हज़ारों की संख्या में रोज़ाना नए केस आ रहे थे वहां पिछले 24 घंटे में 45 नए केस आए हैं. दिल्ली में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 693 रह गई है. और इन घटते आंकड़ों के साथ लोगों की कोरोना के प्रति गंभीरता भी घट रही है. जैसे जनवरी और फरवरी में कोरोना डिस्कोर्स से लगभग बाहर हो गया था, वैसे ही अब लोग कोरोना को गौण समझने लगे हैं. लेकिन बाद में साबित हुआ कि जनवरी और फरवरी कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बीच का गैप था. वैसा ही गैप अब कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर के बीच जुलाई को माना जा रहा है.

Corona 2
बाजारों में भी ऐसी भीड़ दिखना सामान्य बात हो चला है. फोटो- आजतक

कब से शुरू हो सकती है तीसरी लहर?

पहली बात तो लहर किसी आंधी- तूफान की तरह नहीं है. कि कहीं से चलकर आने वाली है. जब कोरोना के आंकड़े कम हो कर वापस बढ़ने लग जाएंगे तो वो संक्रमण की एक लहर मान ली जाएगी. ग्राफ में संक्रमण कम होने पर लाइन नीचे आती है बढ़ने पर फिर ऊपर की तरफ चली जाती है. यानी एक लहर सी बन जाती है. और इसे ही हम कोरोना की लहर कह रहे हैं. और ये लहर हर इलाके के हिसाब से अलग अलग समय पर आ सकती है. जैसे हमने देखा कि महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में केस कम होने के बाद वापस ऊपर की तरफ जाने लगे. उत्तर पूर्व के कुछ और राज्यों में भी संक्रमण बढ़ रहा है. यानी वहां संक्रमण का ग्राफ नीचे आकर ऊपर की तरफ जाने लगा है. लेकिन देश के स्तर पर अभी नए मरीजों की संख्या वाला ग्राफ नीचे ही आ रहा है. लगातार नए मरीजों की संख्या घट रही है. पिछले 24 घंटे में करीब 33 हज़ार नए मरीज़ आए हैं. पिछले हफ्ते 43 हज़ार मरीज आ रहे थे. एक हफ्ते में ही नए मरीजों की संख्या लगभग 10 हज़ार के करीब घट गई है.

दूसरी लहर का पीक मई महीने में आया था. मई की 6 तारीख को देश में कोरोना के करीब 4 लाख 14 हजार केस थे. 6 मई के बाद से कोरोना के रोज़ाना वाले मरीज घट रहे हैं. और जिस तेज़ी से नए मरीज़ घट रहे हैं, अनुमान लगाया जा रहा है कि जुलाई के आखिर तक उतने ही केस हो जाएंगे जितने फरवरी में थे. यानी जब पहली लहर लगभग खत्म होने को थी. जब देश में पहली लहर में ओवरऑल केस कम हो रहे थे तब भी केरल, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ट्रेंड बदलने लगा था. केस बढ़ने लगे थे. अब एक बार फिर वैसा ही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में अमरावती और सांगली में ज्यादा मामले आ रहे हैं. इसी तरह तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के भी कुछ ज़िलों में संक्रमण बढ़ रहा है.

73 ज़िले देश में ऐसे हैं जहां 100 से ज्यादा रोजाना केस आ रहे हैं. केरल, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के अलावा इस बार चिंता की बात उत्तर पूर्व के राज्यों में भी है. मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश इन राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ना शुरू हो गए हैं. मसलन मणिपुर में मई में पीक के दौरान कोरोना के 1 हज़ार 32 केस आए थे. फिर कम हुए और अब ग्राफ दोबारा ऊपर की तरफ जा रहा है. पिछले 24 घंटों में 890 केस आए हैं. मिजोरम में भी पीक पर 662 केस आए थे. फिर कम हुए और अब बढ़कर 590 केस रोज़ाना हो गए हैं. यानी नॉर्थ ईस्ट के राज्य मई वाली स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं.

पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तर पूर्व के राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कोरोना पर वर्चुअल बैठक की. प्रधानमंत्री ने टेस्टिंग बढ़ाने और कंटेनमेंट जोन बनाकर संक्रमण रोकने के सुझाव दिए. वैक्सीन के लिए सेंटर्स बढ़ाने की सलाह दी ताकि लोगों को वैक्सीन के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े, और वैक्सीन के लिए भीड़ ना लगे. प्रधानमंत्री 16 जुलाई को केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ऐसे 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना पर बैठक करेंगे. प्रधानमंत्री की इन बैठकों के अलावा केंद्र ने राज्यों में एक्सपर्ट्स की टीम भी भेजी है.

Modi
हालातों की गंभीरता को केंद्र सरकार भी समझ रही है. फोटो- आजतक

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक लोगों की मास्क पर लापरवाही को लेकर भी एक सर्वे कराया गया. जिसमें लोगों ने मास्क ना पहनने की तरह तरह की वजह गिनाई. मास्क वाली लापरवाही के अलावा पर्यटनों स्थलों पर लोगों की भीड़ जुटने पर भी सरकार की तरफ से चिंता जताई जा रही है. पर्यटन स्थलों से पाबंदी हटाई तो लोग एक साथ घूमने निकल पड़े. कुछ दिनों श्रावण मास शुरू होने वाला है. श्रावण में धार्मिक कार्यक्रम ज्यादा होते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान भी भीड़ जुटती है. इस बार अभी के लिए उत्तराखंड ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगा रखी है. चार धाम यात्रा पर भी हाई कोर्ट की तरफ से रोक लगाई गई थी. जिसके खिलाफ उत्तराखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई. यहां विरोधाभास ये नज़र आता कि एक तरफ केंद्र की भीड़ को लेकर चेतावनी जारी कर रही है. और राज्य सरकारें धार्मिक आयोजन को अनुमति देने में लगे हैं.

उत्तर प्रदेश में भी कांवड़ यात्रा कराई जाएगी. जुलाई के आखिरी हफ्ते में कांवड़ यात्रा शुरू होगी. सरकार अपनी तरफ से आरटीपीसीआर रिपोर्ट और दूसरी सावधानियों की बात कर तो रही है, लेकिन हम देखते हैं कि इस तरह के कार्यक्रमों में सरकार के बनाए सख्ती वाले नियम ज्यादा लागू नहीं हो पाते. हमने कुंभ के वक्त भी देखा कि RTPCR रिपोर्ट जैसी चीज़ें अनिवार्य की गई थीं. लेकिन उसमें भी गड़बड़ियां हुईं. ऐसे ही कई और तरह के जुटान भी दिखते हैं. नेताओं के कार्यक्रमों में भीड़ जुटने के वीडियो आते हैं. प्रदर्शनों में भारी भीड़ जुटती है.

दुनिया के कई देशों में कोरोना के केस बढ़ने लगे हैं. यूके, रूस, बांग्लादेश, इंडोनेशिया ऐसे कई देशों में कोरोना का ग्राफ फिर से ऊपर जाने लगा है. वहां तीसरी लहर शुरू हो गई है. हमारे पास अभी वक्त है. अभी से संभल जाएंगे तो शायद तीसरी लहर का विध्वंस कम कर सकेंगे.


 

वीडियो- कोरोना की तीसरी लहर पर नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों की बैठक में क्या बता दिया?

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