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थॉमस हार्डी जिनकी पहली क़िताब किसी ने नहीं छापी लेकिन बाद में दुनिया ने सराहा

दुनिया भर में अपने उपन्यासों और कविताओं की वजह से मशहूर लेखक थॉमस हार्डी. आज ही के दिन इनका जन्म हुआ था. थॉमस हार्डी को उनके उपन्यासों में आए कई बेहतरीन किरदारों की वजह से जाना जाता है. ‘डेस्परेट रेमेडीज’, ‘अंडर दी ग्रीनवुड ट्री’ और ‘दी डायनास्ट्स’ जैसे उपन्यास लिखकर थॉमस हार्डी साहित्य की दुनिया में अमर हुए. लेकिन उनका ये सफ़र जैसा दिखता है उतना आसान कभी नहीं रहा. थॉमस हार्डी ने अपना पहला उपन्यास साल 1867 में ही लिख लिया था, लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी इनका ये उपन्यास छापने को एक भी प्रकाशक राज़ी नहीं हुआ. ‘दी पुअर मैन एंड दी लेडी’ नाम का ये उपन्यास आख़िरकार थक हारकर हार्डी ने पहले अपने घर की रद्दी टोकरी में डाला और उसके बाद इसे जला दिया. इसके बाद थॉमस हार्डी के गुरु और लेखक जॉर्ज मेरेडिथ ने इन्हें लिखने के लिए दोबारा हिम्मत दी. थॉमस हार्डी ने इसके बाद एक से बढ़कर एक उपन्यास लिखे. हालांकि आख़िरी उपन्यास का सफ़र भी लगभग वैसा ही अजीब रहा जैसा हार्डी का पहला उपन्यास.

थॉमस हार्डी ने जब अपना आख़िरी उपन्यास ‘जूड दी औब्स्क्योर’ लिख तब आलोचकों ने इस उपन्यास पर अश्लीलता का आरोप लगाकर इसे खारिज़ कर दिया. कहा जाता था कि ये क़िताब दुकानों पर भूरे रंग के लिफ़ाफ़े में रखकर बेची जाती थी. इससे थॉमस हार्डी का मन लिखने से उचट गया और इसके बाद उन्होंने अपने मरने के दिन तक कविताएं लिखीं. थॉमस हार्डी की लिखी इन दस बातों को ज़माना आज भी याद करता है –

# दुःख के लगातार चलते नाटक में ख़ुशी कभी-कभी आने वाला एपिसोड है.

# औरत के लिए उस भाषा में ख़ुद को ज़ाहिर करना मुश्किल होता है, जिसे आदमी ने अपने लिए बनाया है.

# मौन सबसे बेहतरीन भाषा है, जिसे सुना जाना चाहिए.

# ऐसा क्यों है कि इतिहास के अधिकतर पड़ावों को युद्ध और हत्या की घटनाओं से याद किया जाता है?

# पैसे और ताक़त को सभ्यता का पैमाना बताने वाला समाज एक दिन अचानक शिक्षित और सभ्य लोगों को खोजने लगता है.

# शांत जगहों पर महसूस की गई शांति उतनी टिकाऊ नहीं होती जितना कि शोरगुल में पाई हुई शांति.

# ज़्यादातर ज़रुरत ख़त्म हो जाने के बाद ही हमें ज़रूरी तर्क याद आते हैं, जिन्हें समय रहते बोल दिया जाना चाहिए था.

# लोग जीवन और मृत्यु के कठिन सवालों के बीच, संभावनाओं से भरा जीवन भूल जाते हैं.

# तमाम शिकायतों और दुखों के बीच भी जीवन हमें लगातार ‘चुनने’ की आज़ादी देता रहता है.

# अपनी तरफ़ से तैयार हो जाना ही हमेशा पूरी तैयारी नहीं होता. हो सकता है हम रेगिस्तान के लिए नाव बनाने की तैयारी कर रहे हों.


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