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LSR कॉलेज का नाम हो सकता था 'फूलन देवी कॉलेज'

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हर साल जून की गर्मियां लाती हैं दिल्ली यूनिवर्सिटी की कट ऑफ लिस्ट और देश में हो जाता है हल्ला. कोई फेसबुक पर अपने नए कॉलेज के बारे में लिखता है, कोई मनपसंद कोर्स न पाकर करियर प्लान बदलता है. स्टीफेंस और हिंदू जैसे कॉलेजों में घुसकर कुछ लोग चौड़े हो रहे होते हैं. DU में घुसने की दौड़ इसलिए हैं क्योंकि माना जाता है कि यहां के कॉलेज बेस्ट होते हैं. डीयू पुरानी यूनिवर्सिटी है. सिर्फ पढ़ाई और कैंपस लाइफ इन्हें कूल नहीं बनाती, हर टॉप कॉलेज का एक इतिहास है, उसके बनने से लेकर उनके नामकरण तक.

जानते हैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के 10 कॉलेजों की हिस्ट्री शॉर्ट में:

1. हिंदू कॉलेज: आजादी के आंदोलन का एक मंच

कॉलेज बनवाया व्यापारी किशन दासजी गुरवाले ने आज से 127 साल पहले. मकसद, ऐसा राष्ट्रवादी कॉलेज बनाना जिसमें सभी तबकों के युवा पढ़ सकें और हक़ के लिए लड़ना सीख सकें. उस दौर में जब गांधी ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए पुकार रहे थे, युवा छात्रों को थोक के भाव पकड़कर जेल भेजा जा रहा था. इस क्रांति में सबसे आगे था हिंदू कॉलेज. छात्रों ही नहीं, कॉलेज के शिक्षकों ने भी जान की परवाह किए बिना इसमें हिस्सा लिया. नेहरू हो या जिन्ना, गांधी हों या सुभाष, सब के भाषण यहीं से शुरू होते. और तब तो दिल्ली यूनिवर्सिटी बनी ही नहीं थी. कॉलेज पंजाब यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड था और बिल्डिंग थी चांदनी चौक के किनारी बाजार में. 3 साल बाद जगह की कमी से कॉलेज को कश्मीरी गेट शिफ्ट किया गया. और फिर फाइनली नॉर्थ कैंपस लाया गया.


 

2. हंसराज कॉलेज: आर्य समाज से जुड़ाव

ये कॉलेज बनाया DAV कॉलेज वालों ने. DAV मतलब दयानंद एंग्लो-वैदिक स्कूल सिस्टम. लाला हंसराज, जिन्हें महात्मा हंसराज भी कहा जाता था, DAV और आर्य समाज के फाउंडर दयानंद सरस्वती के बड़े फॉलोअर थे. वो लाला लाजपत राय के अच्छे दोस्त थे और आज़ादी की लड़ाई में दोनों कंधे से कंधा मिलाकर लड़े. उनकी याद में ही DAV मैनेजमेंट कमिटी ने ये कॉलेज बनवाया, आज़ादी के ठीक एक साल बाद. कुछ चालीस-एक साल पहले ये आल-मेंस कॉलेज से ‘को-एड’ हुआ.


 

3. इंद्रप्रस्थ कॉलेज: हेरिटेज बिल्डिंग वाला कॉलेज

दिल्ली यूनिवर्सिटी का सबसे पुराना गर्ल्स कॉलेज है इंद्रप्रस्थ. पुरानी दिल्ली के छिप्पिवरा कलां  इलाके में इंद्रप्रस्थ नाम का एक स्कूल लड़कियों के लिए खोला गया था. स्कूल को शुरू करने में बड़ा रोल रहा एनी बेसेंट का. कुछ सालों बाद इसे इंटरमीडिएट स्कूल, फिर कॉलेज का दर्जा मिल गया. जब डीयू बनी, तब इसे डिग्री कोर्स देने की इजाज़त मिली. साथ ही कॉलेज को सिविल लाइन्स के चन्द्रावली भवन में शिफ्ट कर दिया गया. कुछ सालों बाद इसे उस लोकेशन पर लाया गया जहां कॉलेज आज खड़ा है. ये बिल्डिंग उस वक़्त के कमांडर इन चीफ का घर हुआ करती थी और आज भारत के आर्कियोलॉजिकल सर्वे ने इसे हेरिटेज बिल्डिंग घोषित कर रखा है.


 

4. मिरांडा हाउस: कॉलेज के नाम में 'हाउस' क्यों है?

शायद आपने कभी सोचा हो कि अगर ये कॉलेज है तो इसे हाउस क्यों कहते हैं. असल में मिरांडा हाउस कॉलेज था ही नहीं. तब दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहले लड़कियों के लिए कोई हॉस्टल नहीं था. तब वाइस चांसलर मॉरिस ग्वायर ने तय किया कि लड़कियों के लिए एक हॉस्टल बनवाएंगे. हॉस्टल का नाम रखा गया मिरांडा हाउस क्योंकि मिरांडा उनकी बेटी का नाम था. साथ ही वो पुर्तगाली-ब्राज़ीलियाई अदाकारा कारमेन मिरांडा के बहुत बड़े फैन थे. पहले तो हॉस्टल में बहुत काम लड़कियां थीं, पर साल भर में ही हॉस्टल में सीट्स कम पड़ने लगीं. पहले ग्वायर ने उस समय की सरकार की मदद से हॉस्टल में सीटें बढ़वाईं. फिर तय किया कि एक महिला कॉलेज बनवाया जाए. इस तरह मिरांडा हाउस हॉस्टल से एक कैंपस कॉलेज बन गया और इंद्रप्रस्थ कॉलेज के बाद DU का दूसरा गर्ल्स कॉलेज बना. कॉलेज का उद्घाटन लेडी माउंटबेटन ने किया था.


 

5. सेंट स्टीफेंस कॉलेज: 'डॉन' ने बनवाया ये कॉलेज

आजादी के भी करीब 100 साल पहले अंग्रेजों ने भारतीयों को पढ़ाने और क्रिश्चियन तौर तरीके सिखाने के मकसद से देश में कई मिशनरी स्कूल और कॉलेज खोले. ऐसा ही एक मिशन था कैंब्रिज मिशन. उन्होंने सेंट स्टीफेन के नाम से पहले दिल्ली में स्कूल खोला. कुछ सालों बाद कॉलेज खोल दिया. सेंट मतलब संत स्टीफेन एक माने हुए संत थे जिनको जीसस क्राइस्ट का अनुयायी होने के लिए मार डाला गया था. तब स्कूल और कॉलेजों का ध्यान रखने के लिए डॉन नियुक्त किए जाते थे. डॉन का मतलब ऑक्सफर्ड या कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का एक टीचर. तो कैंब्रिज के डॉन सैमुअल स्कॉट ऐलनट ने कैंब्रिज मिशन के लिए इस कॉलेज को बनवाया और इसके पहले प्रिंसिपल भी बने. हिंदू कॉलेज की तरह स्टीफेंस कॉलेज भी पहले किनारी बाजार, फिर कश्मीरी गेट, और आखिर में नॉर्थ कैंपस शिफ्ट कर दिया गया.


 

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