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गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 4 - रिव्यू

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दूर-दूर तक लाशों के ढेर लकड़ियों के ऊपर रखे हैं, इनको अभी जलाया जाना है. युद्ध तो खैर जीत गए और उसके समारोह की भी रात आएगी लेकिन उससे पहले-

जो शहीद हुए है उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी!


आर आर मार्टिन का शाहकार – गेम ऑफ़ थ्रोन्स. इसके लास्ट सीज़न के पहले, दूसरे और तीसरे एपिसोड का रिव्यू हम कर चुके हैं. और साथ ही में इससे जुड़ी कुछ बेसिक जानकारियां भी दे चुके हैं.

पढ़िए- गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 1 - रिव्यू

पढ़िए- गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 2 - रिव्यू

पढ़िए- गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 3 - रिव्यू

05  मई, 2019 को भारतीय समयानुसार सुबह 6:30 बजे भारत में इसके आठवें सीज़न के चौथे एपिसोड (S8E4), का प्रीमियर किया गया. हॉटस्टार पे. चलिए बिना किसी स्पॉइलर के इस चौथे एपिसोड की बात करते हैं.

तीसरे एपिसोड में शायद वो सब कुछ हो चुका जो जीओटी में होना था. वो, जिसका इंतज़ार पहले सीज़न के पहले एपिसोड के पहले सीन से था. अब सबके मन में यही सवाल था कि आगे के 3 में क्या होगा. जो लोग गेम ऑफ़ थ्रोन्स को फॉलो करते हैं, उसके अपडेट्स से वाकिफ रहते हैं वो जानते हैं कि पांचवे एपिसोड की लड़ाई और भी ज़्यादा ग्रैंड होने जा रही है. कहा ये भी जा रहा है कि इस पांचवे एपिसोड की लड़ाई में रोशनी की दिक्कत नहीं होगी. रोशनी की बात बताना इसलिए ज़रूरी है क्यूंकि पिछले यानी तीसरे एपिसोड में अंधेरे के चलते पूरी दुनिया में गेम ऑफ़ थ्रोन्स के इस एपिसोड की आलोचना हुई थी. होने को इसे बनाने वालों की तरफ से भी बयान आया था कि नेचुरल लाइट और मिडएवल को दिखाने के लिए ऐसा किया गया था, लेकिन जो भी दर्शकों के लिए देखना ज़रूरी था वो सब दर्शक देख पा रहे थे. साथ ही ये भी कहा गया कि इसे आईफोन और लैपटॉप में नहीं देखा जाना था.

खैर अब इससे ज़्यादा तीसरे और पांचवे एपिसोड की बात नहीं, अब बात इनके बीच के एपिसोड की. एपिसोड जो हमने देखा है. यानी चौथा एपिसोड.

मैंने पिछले रिव्यू में भी कहा था कि मुझे गेम ऑफ़ थ्रोन्स के वो एपिसोड ज़्यादा पसंद आते हैं जिनमें युद्ध नहीं होता. क्यूंकि उनमें घटनाएं होती हैं. वो छोटी-छोटी घटनाएं जो किसी बड़ी घटना के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती हैं.

इस एपिसोड ने हमें ये आईडिया दिया कि जॉन स्नो और डिनायर्स टार्गेरियन के बीच के रिश्ते को लेकर हमें निश्चित नहीं होना चाहिए, वो कभी भी बदल सकता है. इस एपिसोड ने हमें ये भी बताया कि सांसा की चतुराई एक अलग तरह का काइयांपन है, हो सकता है कि उसे राज़ छुपाने आते हों, लेकिन अगर उसे फायदा हो रहा हो तो वो उसे ज़ाहिर भी कर सकती है.

लॉर्ड वेरिस, को अब भी किसी एक से ज़्यादा चिंता ‘बहुसंख्य’ की है, इसलिए टायरन के साथ वाले संवादों में वो ज़्यादा नैतिक नज़र आता है. चौथे एपिसोड को, आर्मी ऑफ़ व्हाइट्स वाले युद्ध के बाद आयरन थ्रोन के लिए होने वाले युद्ध के बीच की कड़ी के रूप में देखा जा सकता है. एक बड़े युद्ध को जीत चुकने के बाद सबकी प्राथमिकताएं और आस्थाएं बदलती हुई लग रही हैं. फिर चाहे वो जैमी लेनेस्टर हो, आर्या या डिनायर्स.

होने को कुछ चीज़ें कन्विंसिंग नहीं लगी, खास तौर पर जो ड्रेगन के साथ हुआ, और जैसे हुआ.

एपिसोड के लगभग अंत में सरसी लेनेस्टर और उसके भाई टायरन लेनेस्टर के बीच के संवाद को देखकर आपको दुर्योधन और कृष्ण के बीच का वो संवाद याद आता है जब कृष्ण दूत बनकर दुर्योधन से संधि करने जाते हैं. वैसे टायरन के बारे में मैं हमेशा ये कहता आया हूं कि अगर जीओटी महाभारत है तो इसमें कृष्ण की एनोलॉजी टायरन है.

और यूं दुर्योधन सरसी ही ठहरी. तो आने वाले एपिसोड के बारे में यही कहा जाएगा-

हित-वचन नहीं तूने माना
मैत्री का मूल्य न पहचाना.

तो ले, मैं भी अब जाता हूं
अन्तिम संकल्प सुनाता हूं.

याचना नहीं, अब रण होगा,
जीवन-जय या कि मरण होगा.

अंततः एक बात और- जॉन स्नो को देखकर अब भी आपको लगता है कि अगर आपकी ज़िंदगी में कोई दोस्त हो तो जॉन स्नो सरीखा हो. वो आपको सबसे बेहतरीन योद्धा या सबसे अक्लमंद या सबसे फुर्तीला बेशक नहीं लगेगा, लेकिन फिर भी वो अपनी एक सच्ची इमेज के चलते आयरन थ्रोन का सबसे सच्चा वारिस लगेगा. यूं वो अर्जुन या कृष्ण नहीं युधिष्ठिर ठहरा.


जाते जाते इस एपिसोड का एक वन लाइनर-

हर अच्छे शासक को लोगों में थोड़ा डर पैदा करना होता है.


वीडियो देखें-

धोनी और दूसरे क्रिकेटर्स के फेवरेट मेरठ वाले क्रिकेट बैट बनते देखिए –

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