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पड़ताल: क्या अयोध्या फैसले के बाद प्रयागराज में ये मस्जिद ढहाई गई?

अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला आने के बाद एक दावा वॉट्सऐप पर वायरल हुआ है. हमें वीडियो भेजकर लोगों ने इसकी सत्यता जाननी चाही है.

क्या है दावा?

व्हाट्सऐप पर वायरल 33 सेकेंड के एक वीडियो में इलाहाबाद में मस्जिद ढहाने की बात कही जा रही है. एक ऑडियो संदेश और कई घायल लोगों की तस्वीरों के साथ एक गिरे हुए गुंबद की तस्वीर नज़र आती है. आवाज सुनाई पड़ती है.

“ये इलाहाबाद की मस्जिद है. इस मस्जिद पर बीस साल से कोर्ट में केस चल रहा था. कल मोदी सरकार ने इसे तुड़वा दिया और किसी भी मीडिया ने इसे नहीं दिखाया, अगर तुम सच्चे मुसलमान हो और तुम्हारे अंदर जरा सा भी ईमान है तो इसे इतना शेयर करो, इतना शेयर करो कि मोदी की नींद हराम हो जाए.”

वायरल वीडियो में ये मस्जिदनुमा बिल्डिंग गिरी हुई दिख रही है. इसके बचे हुए हिस्से में काफी ख़ून-ख़राबा है. इसलिए आगे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
वायरल वीडियो में ये मस्जिदनुमा बिल्डिंग गिरी हुई दिख रही है. इसके बचे हुए हिस्से में काफी ख़ून-ख़राबा है. इसलिए आगे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

दावे की पड़ताल

दावे की पड़ताल में हमें कुछ तथ्य मिले हैं.

1. कोई मस्जिद टूटने की बात का सच जानने के लिए हमने प्रयागराज (इलहाबाद) के SSP से बात की. उन्होंने इस दावे के झूठे होने की बात बताई. जानकारी दी कि इलाहाबाद में हाल में ऐसी कोई भी मस्जिद नहीं तोड़ी गई है. इस संदेश में किया गया दावा ग़लत है. उन्होंने पुलिस को वायरल मैसेज की जानकारी होने की बात कही और उसका खंडन किया.

2. तलाशने पर हमें शॉकिंग वीडियोज डॉट कॉम और Aun Mashhadi नाम के यूट्यूब चैनल मिले है. जहां दिसंबर 2018 में ये वीडियो अपलोड हुआ था. इन पुराने वीडियोज से ये साबित होता है कि वीडियो नया नहीं है. इसे शरारत पूर्ण ढंग से अब वायरल कराया जा रहा है.

Youtube Calim
28 दिसंबर 2018 को ये वीडियो उपलब्ध था. इसका मतलब है कि ये अयोध्या भूमि विवाद पर फैसले के बाद ये घटना नहीं हुई.

वीडियो में खून-खराबे और घायल लोगों के वीडियो हैं. कुछ पाठकों के लिए वो वीडियो देखना उचित नहीं रहेगा. इस कारण हम आपको वीडियो नहीं दिखा सकते. उसका स्क्रीनग्रैब दिखा रहे हैं.

3. तलाशने पर हमें गिरी हुई मस्जिद की तस्वीर से जुड़ा कोई चित्र नज़र नहीं आया. जिन घायल लोगों की तस्वीरें दिखाई गई थीं. उनमें से कुछ तस्वीरें बांग्लादेश की निकलीं. वहां किसी तब्लीग जमात के आयोजन के समय 1 दिसंबर, 2018 को हिंसा हो गई थी. घायल लोगों की तस्वीरें उस समय की ख़बरों में नज़र आईं, जिन्हें आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. इसके अलावा बांग्लदेशी मीडिया वेबसाइट प्रोवर्तक डाकके आर्टिकल में भी इस वीडियो के अंदर दिखीं फोटोज़ हैं. एक बार फिर वीडियोज और तस्वीरों के खून-खराबे के चलते, हम उन्हें सीधे नहीं दिखा पा रहे.

4. हमारे साथी पवन श्रीवास्तव ने प्रयागराज (इलहाबाद) के शहर इमाम मुफ़्ती शफ़ीक़ अहमद शरीफ़ी से भी बात की. उनके मुताबिक, प्रयागराज (इलहाबाद) में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है.

5. ‘मोदी सरकार ने मस्जिद गिरवा दी’ इस तर्ज़ पर पहले भी झूठ फैले थे. इसके पहले अहमदाबाद शहर की मस्जिद गिराने का दावा हुआ था. उस समय भी यही कहा गया था कि मुकदमा चल रहा था, मस्जिद गिराई गई और मीडिया ने रिपोर्ट नहीं किया. हमने तब भी दी लल्लनटॉप शो में उस वायरल दावे की सच्चाई बताई थी.

हालांकि, हम ये पक्की तस्दीक नहीं कर पाए कि गिरी हुई मस्जिदनुमा इमारत किस जगह की है. लेकिन ये साफ है कि प्रयागराज (इलहाबाद) में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. और वीडियो में इस्तेमाल बाकी फोटोज़ भी प्रयागराज (इलहाबाद) की नहीं है.

नतीजा

हमारी पड़ताल में ये वायरल वीडियो झूठ निकला. वीडियो में इस्तेमाल तस्वीरें 2018 में बांग्लादेश के ढाका में हुई तब्लीगी जमात की हैं. यहां जमात के दो हिस्सों में आपसी झड़प हुई थी. उसी की ये तस्वीरें हैं. इस पूरी वीडियो का प्रयागराज (इलहाबाद) से कोई लेना-देना नहीं है.


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