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पड़ताल: क्या कोटा में फंसे छात्रों को UP पहुंचाने के लिए राजस्थान ने 36 लाख की डिमांड की थी?

दावा

कांग्रेस और बीजेपी के बीच बसों की राजनीति लगातार चल रही है. 21 मई को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने दो ट्वीट कर राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्टूडेंट्स को उत्तर प्रदेश लाने वाली बसों के लिए 36 लाख रुपये का बिल भेजा है. 

संबित पात्रा ने पहला ट्वीट (आर्काइव लिंक) 21 मई, 2020 की रात 9:32 मिनट पर किया. इस ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि राजस्थान सरकार ने ‘आज’ 36 लाख का बिल भेजा है.

उनका दूसरा ट्वीट (आर्काइव लिंक) 12 मिनट बाद आया. इस ट्वीट में उन्होंने एक चेक़ की तस्वीर भी पोस्ट की थी. संबित पात्रा ने दावा किया कि बच्चों को कोटा से यूपी ला रही एक बस के डीजल का किराया आधी रात में दफ़्तर खुलवाकर लिया गया.

एक न्यूज़ एंकर हैं अमीश देवगन. उन्होंने संबित पात्रा के ट्वीट के लगभग दो घंटे बाद, रात के 11:38 बजे, सेम दावा (आर्काइव लिंक) अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया.

कई सोशल मीडिया यूजर ने भी इस दावे को अपने हिसाब से प्रसारित किया है.

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने ट्वीट में किए दावों की विस्तार से पड़ताल की. हमारी पड़ताल में दावा भ्रामक और झूठा निकला.

हमने संबित पात्रा द्वारा ट्वीट किए गए पहले लेटर को ध्यान से देखा. इसमें 8 मई, 2020 की तारीख़ दर्ज थी. और, इसमें 17 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच चलाई गई बसों की बात की गई थी.

संबित पात्रा के ट्वीट में जो लेटर लगा था, उसपर 08 मई की तारीख़ दर्ज थी. जबकि पात्रा ये दावा कर रहे हैं कि ये लेटर 21 मई को भेजा गया.
संबित पात्रा के ट्वीट में जो लेटर लगा था, उसपर 08 मई की तारीख़ दर्ज थी. जबकि पात्रा ये दावा कर रहे हैं कि ये लेटर 21 मई को भेजा गया.

ये स्मरण-पत्र राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RJSRTC) की तरफ़ से लिखा गया था. इस पत्र के जरिए राजस्थान परिवहन ने यूपी परिवहन को कोटा से आगरा और अन्य स्थानों के लिए चलाई गई बस सेवाओं के लिए 36,36,664 रुपये का भुगतान करने की याद दिलाई थी. इस पत्र पर राजस्थान परिवहन निगम के कार्यकारी निदेशक, एम. पी. मीना के दस्तख़त थे.

संबित पात्रा के आरोपों का जवाब राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने दिया. उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम (UPSRTC) के दो पत्र अपने ट्विटर और फ़ेसबुक अकाउंट पर शेयर किए. ये दोनों पत्र UPSRTC के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर ने 18 अप्रैल, 2020 को लिखे थे. इन पत्रों के जरिए RJSRTC के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नवीन जैन को संबोधित किया गया था.

संबित पात्रा जी आज आप झूठ बोल रहे है यह जिन पैसों की आप बात कर रहे है यह राज्यपथ परिवहन उत्तरप्रदेश की बसें जब राजस्थान…

Posted by Pratap Singh Khachariyawas on Thursday, 21 May 2020

पहले पत्र में आगरा से भेजी गई 200 बसों के लिए 120-120 लीटर डीजल और झांसी से भेजी गई 120 बसों के लिए 60-60 लीटर डीजल देने का आग्रह किया गया था. इस लेटर में लिखा था कि डीजल की मात्रा और उसके रेट की डिटेल्स भेजी जाएं, ताकि पैसों का भुगतान किया जा सके.

18 अप्रैल के इस लेटर में यूपी परिवहन की बसों को डीजल उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया था.
18 अप्रैल के इस लेटर में यूपी परिवहन की बसों को डीजल उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया था.

दूसरे पत्र में यूपी परिवहन ने राजस्थान परिवहन निगम से 75 बसें आपातकालीन सेवा के तहत कोटा के डीएम को उपलब्ध कराने का आग्रह किया था. इस लेटर में भी पूरे खर्च की डिटेल्स यूपी परिवहन निगम को भेजने का आग्रह किया गया था.

इस पत्र में यूपी परिवहन ने राजस्थान परिवहन निगम से 75 बसें उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था.
इस पत्र में यूपी परिवहन ने राजस्थान परिवहन निगम से 75 बसें उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था.

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने 22 मई को स्पेशल प्रेस ब्रीफ़िंग के जरिए पूरे मुद्दे पर अपनी बात रखी. आप ये प्रेस कॉन्फ़्रेंस फ़ेसबुक पर देख सकते हैं,

Special Congress Party BriefingSpecial Congress Party Briefing

Posted by Sachin Pilot on Thursday, 21 May 2020

छात्रों को कोटा से आगरा और झांसी लाने का काम 17 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच किया गया. कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि हुई है. 28 अप्रैल को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए, कोटा से लौटे छात्रों से बात भी की.

हमने इस संंबंध में RJSRTC के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नवीन जैन से बात की. उन्होंने हमें 27 अप्रैल का यूपी परिवहन निगम का लेटर दिखाया. उन्होंने बताया,

UP सरकार ने कोटा से बसें पेमेंट बेसिस (भुगतान के आधार पर) पर मांगी थीं. RJSRTC के अकाउंट में बसों के किराए का पैसा 21 मई, 2020 को पहुंच गया.

27 अप्रैल को UPSRTC के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर ने राजस्थान परिवहन निगम को एक और लेटर लिखा था. इस लेटर में उन्होंने 18 अप्रैल को लिखे पत्रों का हवाला दिया था. इस लेटर में उन्होंने ये भी आग्रह किया किया कि राजस्थान परिवहन निगम पूरे खर्च का विवरण उपलब्ध कराए, ताकि उसका पूरा भुगतान किया जा सके.

संबित पात्रा ने जो दूसरा ट्वीट किया, उसमें कहा गया कि डीजल के भुगतान के बिना बसों को रोक दिया गया था. उनका दावा था कि राजस्थान सरकार ने बसों को तभी आगे बढ़ने दिया, जब आधी रात में यूपी सरकार ने 19 लाख का भुगतान कर दिया. यूपी सरकार द्वारा जारी किए गए चेक़ पर 05 मई, 2020 की तारीख़ दर्ज है. जबकि ये बसें 17 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच चली थी. इसलिए ये दावा भी ग़लत है कि पैसों के भुगतान के बाद बसों को आगे बढ़ने दिया गया.

5 मई, 2020 का चेक, जिसे संबित पात्रा 17-19 अप्रैल के बीच का बताकर वायरल कर रहे हैं.
5 मई, 2020 का चेक, जिसे संबित पात्रा 17-19 अप्रैल के बीच का बताकर वायरल कर रहे हैं.

हमने इस मामले में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का पक्ष जानने के लिए उनके ऑफ़िस में कॉल किया. फ़ोन नहीं उठाया गया. परिवहन निगम के ऑफ़िशियल वॉट्सऐप नंबर पर भी कोई जवाब नहीं मिला. हमें जैसे ही उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से इस मामले पर कोई बयान मिलता है, हम इस स्टोरी को अपडेट करेंगे.

नतीजा

राजस्थान सरकार द्वारा छात्रों को कोटा से उत्तर प्रदेश पहुंचाने के लिए पैसे मांगे जाने का दावा भ्रामक है. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और न्यूज़ ऐंकर अमीश देवगन ने दावा किया कि राजस्थान सरकार ने छात्रों को यूपी पहुंचाने वाली बसों के लिए 36 लाख रुपये मांगे. 

दरअसल, ये बस सुविधा भुगतान आधारित थी. यूपी सरकार ने पहले ही वादा किया था कि वो बसों के डीजल का खर्च और राजस्थान परिवहन द्वारा आपातकालीन तौर पर 75 बसें देने के लिए भुगतान करेगी.

कोटा से बच्चों को यूपी पहुंचाने का काम 17 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच किया गया. 27 अप्रैल, 2020 को यूपी परिवहन निगम ने एक और लेटर लिखकर उन बसों के खर्च का ब्योरा भेजने को कहा. राजस्थान परिवहन निगम ने ये डिटेल एक पत्र में 8 मई के दिन भेजी. इसकी रकम 21 मई को राजस्थान परिवहन के अकाउंट में पहुंच गई.

जहां तक डीजल का भुगतान न होने की वजह से बसों को रोके जाने का दावा है, वो सरासर ग़लत है. डीजल के खर्च का भुगतान 5 मई को किया गया था, न कि 17 अप्रैल से 19 अप्रैल की रात में.

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पड़ताल: क्या कोटा में फंसे छात्रों को UP पहुंचाने के लिए राजस्थान ने 36 लाख की डिमांड की थी?
  • दावा

    आधी रात में डीजल का पैसा देने के बाद राजस्थान सरकार ने छात्रों की बसों को आगे बढ़ने दिया.

  • नतीजा

    ये दावा ग़लत है. कोटा से 17 से 19 अप्रैल के बीच यूपी के छात्रों को निकाला गया था. जबकि, डीजल का भुगतान 5 मई के दिन किया गया है. दोनों तारीखों में कोई मेल ही नहीं है.

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