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गोकशी को लेकर अलग-अलग राज्यों में क्या कानून है और कितनी सजा हो सकती है?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोहत्या निवारण कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. इस अध्यादेश के तहत यूपी में गाय की हत्या पर 10 साल तक की सज़ा और तीन से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा गोवंश के अंग-भंग करने पर सात साल की जेल और तीन लाख तक जुर्माना हो सकता है. इसी बहाने हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि देशभर में गोहत्या को लेकर क्या कानून है.

संविधान क्या कहता है?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 48. इस अनुच्छेद के मुताबिक राज्य, कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों के माध्यम से बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे. राज्य खास तौर पर गायों, बछड़ों और दूसरे दुधारू पशुओं के सुधार के लिए, उनकी हत्या को रोकने के लिए कानून बनाएगे. हालांकि इस अनुच्छेद में किसी भी राज्य के लिए इस कानून को बनाने की बाध्यता नहीं रखी गई. संविधान लागू होने के तुरंत बाद अधिकांश राज्यों ने गाय के संरक्षण और उसके वध पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाया. असम मवेशी संरक्षण अधिनियम 1950 में ही आ गया. उसके बाद अधिकांश राज्यों ने अपने यहां 1955 में कानून बनाए. फिर उसके बाद के बरस में भी कानून बनते रहे.

गो-वंश की हत्या को लेकर राज्य समय-समय पर अपने यहां कानून में बदलवा करते रहते हैं. (फोटो-पीटीआई)
गो-वंश की हत्या को लेकर राज्य समय-समय पर अपने यहां कानून में बदलवा करते रहते हैं. (फोटो-पीटीआई)

1966 में हुई थी बड़ी मांग

1966 में हिंदू ऑर्गनाइजेशन ने संविधान में गोकशी को पूरी तरह बंद कराने का कानून बनाने की मांग पुरजोर तरीके से रखी. शंकराचार्य निरंजनदेव तीर्थ ने इसके लिए अनशन किया. साथ में स्वामी करपात्री, महात्मा रामचंद्र वीर भी थे. रामचंद्र वीर तो 166 दिन लंबा अनशन किया था. गोकशी के खिलाफ कानून बनाने की मांग लेकर 7 नवंबर, 1966 को संसद घेर ली गई. प्रचंड आंदोलन हुआ. तब की पीएम इंदिरा गांधी ने गोकशी पर बैन लगाने की मांग खारिज कर दी.

केंद्रीय कानून की मांग

समय-समय पर गोहत्या के खिलाफ मजबूत कानून बनाने की मांग होती रही. बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी राज्यसभा में गो-संरक्षण बिल-2017 पेश कर चुके हैं. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत गोहत्या के ख़िलाफ़ देशभर में एक क़ानून बनाने की पुरज़ोर वकालत करते रहे हैं. हालांकि फिलहाल गोहत्या के खिलाफ कानून बनाने का अधिकार राज्यों के पास है. कई राज्यों ने अपने यहां इन कानूनों में समय-समय पर बदलाव किया है. ताजा मामला उत्तर प्रदेश का है. जानते हैं किन राज्यों में क्या कानून है.

हिन्दू धर्म में गाय की पूजा होती है. (फोटो-पीटीआई)
हिन्दू धर्म में गाय की पूजा होती है. (फोटो-पीटीआई)

उत्तर प्रदेश

Uttar Pradesh Prohibition of Cow Slaughter Act, 1955. हिन्दी में कहें, तो  उत्तर प्रदेश गोवध निवारण क़ानून, 1955. इसमें संशोधन को हाल ही में राज्य सरकार ने मंजूरी दी है. इस क़ानून में अब तक चार बार संशोधन हो चुका है. अध्यादेश के कानून बनने के बाद यूपी में-

# गाय की हत्या पर 10 साल तक की सज़ा और तीन से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
# गोवंश के अंग-भंग करने पर सात साल की जेल और तीन लाख तक जुर्माना हो सकता है.
# दूसरी बार गोकशी का आरोप साबित होने पर सजा दोगुनी हो जाएगी.
# गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान.

बिहार

Bihar Preservation and Improvement of Animals Act, 1955 के तहत गोहत्या को लेकर बिहार में ये कानून है.

# गाय और बछड़े का वध पूरी तरह से बैन.
# अगर गोवंश 15 साल या उससे अधिक की उम्र का है, उसे कोई बीमारी है, स्थाई रूप से काम करने या प्रजनन के लिए अक्षम हो गया है, तो उसका वध किया जा सकता है. लेकिन प्रशासन से अनुमति लेनी होगी.
# अगर कोई कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे छह महीने की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है.
# बिहार से गायों, बछड़ों, बैल के निर्यात की अनुमति नहीं है.

गुजरात

गुजरात ने गोवंश की हत्या से जुड़े कानून में 2017 में बदलवा किया था. गुजरात पशु संरक्षण संशोधन विधेयक के लागू होने के बाद-

# गोहत्‍या के दोषियों को उम्रक़ैद की सज़ा, न्यूनतम 10 साल की जेल. किसी के पास गोमांस मिलता है, तो उसे सात से 10 साल की सज़ा.
# गोवंश के साथ पकड़े जाने पर जमानत नहीं.
# गोमांस की हेराफेरी करते हुए पकड़े जाने पर सात से 10 साल तक की सज़ा और एक से पांच लाख तक का जुर्माना.
# गाय की तस्‍करी पर सख़्त पाबंदी. गोमांस का ट्रांसफर करते हुए जो वाहन पकड़े जाएंगे, वो वाहन हमेशा के लिए जब्‍त हो जाएंगे.

हरियाणा

हरियाणा ने अपने यहां गोहत्या से जुड़े कानून में 2015 में बदलवा किया था. हरियाणा गोवंश संरक्षण और गोसंवर्धन विधेयक-2015 के कानून बनने के बाद-

# गोहत्या पर तीन से 10 साल की कैद और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान. गैरजमानती अपराध.
# गोकशी के लिये गाय ले जाने वाले को कम से कम तीन साल की कैद और तीन हजार रुपये जुर्माना, अधिकतम सात साल की कैद व 70 हजार रुपये जुर्माना.
# गोमांस बेचने वाले को कम से कम तीन साल की कैद व तीस हजार रुपये जुर्माना, अधिकतम पांच साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माना.

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र ने 2015 में महाराष्ट्र जीव संरक्षण विधेयक, 1995 में बदलाव किया था. इस कानून के मुताबिक-

# गोहत्या अपराध है. गोमांस बेचने वाले और रखने वाले को पांच साल तक की जेल और दस हजार तक का जुर्माना हो सकता है.
# राज्य के भीतर या बाहर वध किए गए गोवंश का मांस रखना अपराध, दंड देने का प्रावधान.

राजस्थान

# राजस्थान में गोवंश की हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध है.
# इस कानून का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिक से अधिक दो साल की सजा का प्रावधान है.
# इसके अलावा 10,000 रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

# आंध्र प्रदेश में आंध्र प्रदेश प्रोहिबिशन ऑफ काउ स्लॉटर एंड एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट 1977 के तहत गाय की हत्या पूरी तरह प्रतिबंध है.
# लेकिन गोवंश, जैसे बैल या बछड़े के काटने पर सख्त प्रतिबंध नहीं है.
# अगर अथॉरिटी सर्टिफिकेट दे दे कि जानवर अब आर्थिक तौर पर या फिर प्रजनन के लिए उपयोगी नहीं है, तो उसे काटा जा सकता है.
# कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए छह महीने की सजा और एक हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.
# हालांकि तेलंगाना अलग राज्य बन गया है, फिर भी आंध्र प्रदेश की तरह ही कानून लागू है.

जम्मू-कश्मीर

# प्रदेश में गोवंश हत्या पूरी तरह प्रतिबंध है. कानून का उल्लंघन करने पर 10 साल की सजा हो सकती है.
# गोवंश की कीमत का पांच गुना जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

झारखंड

# गोवंश की हत्या से लेकर गोवंश का मांस कहीं लाने-ले जाने पर प्रतिबंध.
# कानून का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिक से अधिक 10 साल की सजा का प्रावधान.

छत्तीसगढ़

# छत्तीसगढ़ एग्रीकल्चर कैटल प्रिवेंशन एक्ट, 2004 के मुताबिक गोवंश की हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध.
# कानून का उल्लंघन करने पर सात साल की सजा या फिर 50,000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान.

दिल्ली

# गोवंश की हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित.
# कानून का उल्लंघन पर कम से कम छह महीने और अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान.
# जुर्माना के मामले में कम से कम 1,000 और अधिकमत 10 हजार का प्रावधान.

ओडिशा.

# गाय की हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध.
# 14 साल से ज्यादा उम्र के सांढ़ और बैल को अथॉरिटी से सर्टिफिकेट मिलने के बाद मारा जा सकता है.
# कानून का उल्लंघन करने पर अधिकतम दो साल की सजा और 1000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान.

कर्नाटक

# गाय और बछिया की हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंधित.
# 12 साल से ज्यादा उम्र के बैल और सांढ़ को अगर अथॉरिटी बूचड़खाने के योग्य मानती है, तो उन्हें काटा जा सकता है.
# कानून का उल्लंघन करने पर छह महीने की सजा या 1,000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान.

मध्य प्रदेश

# गोहत्या पूरी तरह बैन है.
# अगर बैल या सांढ़ की उम्र 15 साल से ज्यादा है और वो न तो खेती के योग्य है और न ही प्रजजन के, तो उसे मारा जा सकता है.
# कानून का उल्लंघन करने पर तीन साल की सजा और 5,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है.

उत्तराखंड

# द उत्तराखंड प्रोटेक्शन ऑफ काउ प्रोगेनी एक्ट, 2007 के मुताबिक गोवंश की हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध.
# कानून का उल्लंघन करने पर कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक 10 साल की सजा हो सकती है.
# 10 हजार रुपये का जुर्माना भी हो सकता है.

गोवा

# गोवा एनिमल प्रिवेंशन एक्ट, 1955 के मुताबिक राज्य में गाय की हत्या पर प्रतिबंध.
# लेकिन अगर गाय को दर्द है, उसे कोई संक्रामक बीमारी है या फिर मेडिकल रिसर्च के लिए उसकी ज़रूरत है, तो उसे मारा जा सकता है.
# गाय का मांस बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
# बैल, सांड या फिर बछड़े को अगर अथॉरिटी मारने योग्य करार दे देती है, तो उसे मारा जा सकता है.
# कानून का उल्लंघन करने पर दो साल की सजा या एक हजार रुपये का जुर्माना या फिर दोनों ही हो सकता है.

पुडुचेरी

# गोवंश की हत्या पर पूरी तरह बैन.
# 15 साल से ज्यादा उम्र के बैल और सांढ़ को सर्टिफिकेट मिलने के बाद मारा जा सकता है.
# बीफ के बेचने या कहीं ले जाने पर पूरी तरह से रोक है.
# कानून का उल्लंघन करने पर दो साल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है.

असम और पश्चिम बंगाल में कानून के तहत उन पशुओं को काटा जा सकता है, जिन्हें ‘फिट फॉर स्लॉटर सर्टिफिकेट’ मिला हो. ऐसे पशुओं की उम्र 14 साल से ज़्यादा हो, या वो प्रजनन या काम करने के योग्य न हों.

अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में गोवंश की हत्या को लेकर कोई कानून नहीं है. मणिपुर में गोवंश की हत्या पर आंशिक तौर पर प्रतिबंध है.


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