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यस बैंक FPO: लगभग आधे दाम में मिल रहे ये शेयर्स ख़रीदें या न ख़रीदें?

तो, जंगल-जंगल बात चली है पता चला है. यस बैंक FPO लेकर आ रहा है. 15 हज़ार करोड़ के. लेकिन ये है क्या? कैसे ख़रीदें? ख़रीदें या नहीं? सब कुछ बताते हैं. और आपको निर्णय लेने में हेल्प करते हैं, ‘To buy or not to buy, that is the question.’

# IPO-

शशांक ओबरॉय एक पान की दुकान खोलता है- बनारसी पान भंडार प्राइवेट लिमिटेड. शशांक को इसमें प्रॉफिट होना शुरू हो जाता है. तो शशांक सोचता है कि क्यूं न लोन लेकर इस पान की दुकान को बड़ा कर इसे परचून की दुकान में बदल दिया जाए. लेकिन एक दिक्कत है. उसे कहीं से लोन मिल नहीं रहा. तो शशांक मन मसोस कर रह जाता है और ‘देख पराई चुपड़ी’ ललचाना बंद कर देता है. एक दिन उसके पास पान खाने असलम चचा आते हैं. बोलते हैं, ‘पान की दुकान तो बहुत अच्छी जगह लगाई है. यहां पर परचून की दुकान खोल लो, आधे पैसे मैं दूंगा. मगर आधा प्रॉफिट भी मेरा.’

बेशक असलम चचा ने शशांक के मन की बात छीन ली थी. लेकिन शशांक नहीं माना. और कारण भी वैलिड है.

क्यूंकि शशांक ने अपनी दुकान को बहुत मेहनत से इस्टेब्लिश किया था. साथ ही उसकी दुकान पहले से ही है, जहां से उसे प्रॉफिट मिल ही रहा है. कम ही सही. तो सिर्फ आधे पैसे लगाकर असलम चचा आधी कंपनी (बनारसी पान भंडार) के मालिक बन जाएंगे. लेकिन पिछले सारे पैसों का क्या? उसकी प्राइम लोकेशन का क्या? दो साल से जो गुडविल कमाई है उसका क्या?

ये सब चीज़ें ध्यान में रखकर तय होता है कि आगे आने वाले रिनोवेशन के सारे पैसे असलम चाचा देंगे. लगभग 5 लाख रुपए. और इसके बाद प्रॉफिट, लॉस, दुकान के सारे सामान में से सिर्फ़ 10 प्रतिशत हिस्सा उनका रहेगा. अगर दुकान बिकती है, तो उसका भी. यूं 5 लाख रुपए में असलम चचा को 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिल जाती है.

अब शशांक 4 ऐसे और लोगों को ढूंढता है, उन्हें भी 5-5 लाख में दुकान की 10-10 प्रतिशत हिस्सेदारी दे देता है. यानी शशांक अपनी दुकान की 50% हिस्सेदारी बेच के पच्चीस लाख जुटा लेता है. ये जो 50 प्रतिशत हिस्सेदारी शशांक ने बिलकुल शुरुआत में बेची, अगर उसे सेबी की देखरेख में किया जाता तो इन शेयर्स को कहेंगे- आईपीओ. यानी ‘इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग’.

नीचे पान की दुकान, ऊपर शेयर्स का सामान.
नीचे पान की दुकान, ऊपर शेयर्स का सामान.

और इसके बाद ‘बनारसी पान भंडार प्राइवेट लिमिटेड’ हो गई, ‘बनारसी पान भंडार पब्लिक लिमिटेड’.

बहुत ज़रूरी बात: याद रखिए ‘कंपनी’ और ‘कंपनी का मालिक’ दोनों अलग अलग चीज़ है. ये बात इसलिए याद रखनी ज़रूरी है क्यूंकि तभी हमें FPO समझ में आएगा. तो यूं, कंपनी का 10 प्रतिशत हिस्सा 5 लाख में बिका तो 50 प्रतिशत हिस्सा 25 लाख में बिका. और यूं कंपनी की कुल क़ीमत (मार्केट कैपिटलाईज़ेशन) हो गई ये 50 लाख रुपए. मार्केट कैपिटलाईज़ेशन मतलब 100% शेयर्स की वैल्यू. जो 25 लाख रुपए IPO से आए उसे, शशांक अपनी जेब में नहीं रखेगा. ये जाएगा कंपनी के एक्सपेंशन में, उसका उधार चुकाने में.

# शेयर मार्केट (सेकेंडरी मार्केट)-

कहानी यहां ख़त्म नहीं होती. शशांक तो अपने पचास प्रतिशत हिस्से को बेचकर उसे फिर से कंपनी में लगाकर, निश्चिंत हो जाता है और अपने काम में लग जाता है. वही दुकान खोलना, वही रिनोवेशन. वही फायदे का 50% बाकी 5 लोगों में दे देना. लेकिन बाकी 5 लोग अपने-अपने शेयर खरीदने-बेचने लग जाते हैं. जैसे असलम चचा अपने दस प्रतिशत शेयर में से 5 प्रतिशत शेयर 4 लाख में बेच देते हैं. इसे कोई सातवां खरीद लेता है. कोई और अपने शेयर नुकसान में किसी आठवें को बेच देता है. कोई 10 के बदले अपने शेयर बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर लेता है. यूं शशांक के पास तो अपने 50 प्रतिशत शेयर हमेशा रहते हैं, लेकिन बाकी के शेयर जो शशांक ने ‘इनिशियली’ बेचे थे, उनका भी व्यापार होना शुरू हो जाता है. इसे ही शेयर्स की ट्रेडिंग कहते हैं.

तो यूं दो मार्केट हो गईं. एक जहां शशांक की परचून की दुकान है. दूसरी जहां ‘बनारसी पान भंडार पब्लिक लिमिटेड’ के शेयर्स की ख़रीद-फ़रोख़्त होती है. और इस दूसरी मार्केट का नाम है शेयर मार्केट.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज. दो ऐसी जगहें जहां शेयर्स की ट्रेडिंग होती है. मतलब इनके दाम तय होते हैं.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज. दो ऐसी जगहें जहां शेयर्स की ट्रेडिंग होती है. मतलब इनके दाम तय होते हैं.

और चूंकि शेयर मार्केट में लोगों ने शशांक की कंपनी से सीधे शेयर नहीं ख़रीदे, बल्कि सेकेंड हैंड ख़रीदें हैं, इसलिए जहां पर इन शेयर्स की ख़रीद फ़रोख़्त होती है उसे सेकेंडरी मार्केट भी कहते हैं. जैसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज आदि.

अब इन शेयर्स के दाम रोज़ घटते बढ़ते रहते हैं, डिमांड एंड सप्लाई के बेसिस पर. और डिमांड एंड सप्लाई डिपेंड करती है, ‘बनारसी पान भंडार पब्लिक लिमिटेड’ की परफ़ॉरमेंस पर. अगर कंपनी अच्छा परफ़ॉर्म कर रही तो उसके शेयर्स की डिमांड भी ज़्यादा होगी और शेयर के दाम बढ़ेंगे, बुरा कर रही तो उसके शेयर्स बेचने की होड़ लग जाएगी और कंपनी के शेयर्स के दाम घटने लगेंगे. वो देखते हैं न आप सेंसेक्स ऊपर गया, नीचे गया. बस वही.

# OFS-

तो शशांक की कंपनी का IPO आ गया. शशांक की कंपनी के शेयर्स भी मार्केट में ट्रेड होने लगे. लेकिन इस सब में शशांक को क्या फ़ायदा हुआ? बस प्रॉफ़िट का 50%?

नहीं!

शशांक अभी 50% कंपनी का मालिक है. IPO आ चुकने के बाद, शेयर की ट्रेडिंग शुरू हो चुकने के बाद, इन शेयर्स को जब भी वो मार्केट में बेचेगा, वो पैसे शशांक की जेब में जाएंगे. अपने शेयर (50%) में से वो कितने भी शेयर, शेयर मार्केट में, करेंट रेट पर बेच कर, पैसे कमा सकता है. आप देखते हैं न कि मुकेश अंबानी दुनिया के टॉप टेन रईसों में से एक हैं. अमेज़न कंपनी के मालिक जेफ़ बेजोस दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं. वो उन्हीं शेयर्स के चलते जो उनके पास हैं. इन शेयर्स की मार्केट में जितनी वैल्यू बढ़ती जाएगी, शेयर होल्डर्स और अमीर होते जाएंगे.

अच्छा, शेयर्स की छोटी-मोटी ख़रीद-फ़रोख़्त तो शशांक कभी भी कर सकता है, लेकिन अगर उसे बड़ी ख़रीद-फ़रोख़्त करनी है तो उसे पहले सेबी को सूचित करना होगा. बड़ी मात्रा में शशांक क्या, कोई भी शेयर ख़रीदे या बेचे, दोनों ही स्थितियों में उसे सेबी को इंफ़ॉर्म करना ही होता है. इन ख़रीद फ़रोख़्त को ‘बल्क डील’ और ‘ब्लॉक डील’ कहा जाता है. इन ‘बल्क डील्स’ की जानकारी पारदर्शी रूप से सभी के लिए उपलब्ध रहती है, ताकि बाक़ी इंवेस्टर्स डिमांड-सप्लाई का गुणा भाग लगा लें और पर्याप्त रूप से सचेत हो जाएं.

एमज़ॉन के मालिक जेफ़ बेजोस अपनी प्रेमिका के साथ, मुंबई में. 16 जनवरी, 2020. जेफ़ 14.25 लाख करोड़ रुपए के मालिक हैं. क्यूंकि एमज़ॉन में उनके 11.2% शेयर्स हैं.
अमेज़न के मालिक जेफ़ बेजोस अपनी प्रेमिका के साथ, मुंबई में. 16 जनवरी, 2020. जेफ़ 14.25 लाख करोड़ रुपए के मालिक हैं. क्यूंकि अमेज़न में उनके 11.2% शेयर्स हैं.

शशांक जैसे कंपनी के मालिकों, जिन्हें प्रमोटर्स भी कहा जाता है, के पास शेयर्स बेचने का एक और रास्ता है OFS (ऑफ़र फ़ॉर सेल). इसके बारे में बस इतना जान लीजिए कि ये भी कमोबेश बल्क डील सरीखा ही है. और बल्क डील हो या OFS, इनसे बिकने वाले शेयर्स की राशि शशांक की जेब में जाएगी. आपको पता ही है शशांक और शशांक की कंपनी दोनों अलग-अलग हैं. कॉमर्स वाले जानते हैं यही बिज़नेस का थंब रूल है.

# FPO-

अब सोचिए कंपनी, यानी ‘बनारसी पान भंडार पब्लिक लिमिटेड’, के पास एक भी शेयर नहीं है. ‘उसके’ शेयर्स हैं, ‘उसके पास’ शेयर नहीं हैं. तो अगर कंपनी को पैसे चाहिए होंगे तो कहां से आएंगे? सिंपल है, कंपनी को जो प्रॉफ़िट हो रहा है वही थोड़ा-बहुत शेयर होल्डर्स के पास जाएगा और थोड़ा-बहुत कंपनी में लगेगा. या कंपनी डिबेंचर इश्यू करेगी. ‘डिबेंचर इश्यू करेगी’ मतलब आम लोगों से उधार लेगी. या फिर बैंक्स से उधार लेगी. मतलब शेयर्स की ख़रीद फ़रोख़्त से कंपनी के खाते में एक भी पैसा नहीं जाना. फिर चाहे शशांक ही अपने शेयर क्यूं न बेचे.

अब तो, अगर कंपनी IPO निकालकर भी पैसे जुटाना चाहे तो नहीं निकाल सकती. क्यूं? क्यूंकि उसके पास शेयर्स हैं ही नहीं. तो अब? अब अगर कंपनी को शेयर्स इश्यू करने हैं तो वो FPO (Follow-On Public Offer) इश्यू करेगी जिसमें पुराने शेयर होल्डर्स के शेयर डाइल्यूट हो जाएंगे. मतलब?

शशांक वाले उदाहरण में लौटते हैं. माना शशांक की कंपनी के कुल दो करोड़ शेयर्स हैं. जिसमें से 50% यानी एक करोड़ शेयर शशांक के पास और बाक़ी के एक करोड़ खुदरा इंवेस्टर्स के पास हैं. अब शशांक की कंपनी के कुल शेयर्स की शुरुआत में वैल्यू 50 लाख थी. लेकिन आज माना वो वैल्यू ‘शेयर मार्केट’ में बढ़ते-बढ़ते 2 करोड़ रुपए हो गई. यूं हर शेयर की वैल्यू 1 रुपया.

अब कंपनी को शेयर्स बेचकर पैसे चाहिए, तो कंपनी ने 2 करोड़ शेयर्स का FPO (फ़ॉलोऑन पब्लिक ऑफ़र) जारी कर दिया. यूं शेयर्स हो गए 4 करोड़. तो हर पुराने शेयर की वैल्यू हो गई डाइल्यूट. यानी जो पहले के इंवेस्टर्स थे उनके शेयर की वैल्यू घट गई. यूं FPO, नए नोट छापने सरीखा है. अगर सब कुछ कॉन्स्टेंट रहे तो जितने ज़्यादा नोट छपेंगे इंफ़्लेशन उतना बढ़ता जाएगा, चीज़ें उतनी ही महंगी होती जाएंगी. ऐसे ही अगर मार्केट फ़ोर्सेज़ कॉन्स्टेंट रहें तो जितने ज़्यादा शेयर्स छपेंगे, हर शेयर की वैल्यू उतनी कम होती चली जाएगी.

# यस बैंक की लेटेस्ट हिस्ट्री-

यस बैंक. जनवरी-मार्च 2020 में इसके साथ बहुत बड़ी भसड़ हुई. कंपनी को मोराटोरियम में रख दिया गया. बैंक के दिवालिया होने की नौबत आ गई. फिर सरकार बचाव में आई. बैंक की पूरी रीस्ट्रक्चरिंग हुई. SBI ने 6,050 करोड़ रुपए इन्वेस्ट किए, और इसके बाक़ी बैंक्स ने भी ढेर सारे शेयर ख़रीदे. रीस्ट्रक्चरिंग में एक और बात तय हुई कि जिसने भी शेयर ख़रीदे हैं, या जिनके पास पहले से ही यस बैंक के शेयर्स हैं, वो अपने शेयर्स के 75% हिस्से को अगले तीन साल तक नहीं बेच सकते. मतलब अगर किसी खुदरा इंवेस्टर के पास यस बैंक के 1000 शेयर्स हैं तो वो रीस्ट्रक्चरिंग के बाद सिर्फ़ 250 शेयर्स बेच सकते हैं. बाक़ी 750 शेयर्स अगले तीन सालों के लिए लॉक. हालांकि 100  या 100 से कम शेयर्स में ये लॉक-इन लागू नहीं है.

8 मार्च, 2020. यस बैंक के फ़ाउंडर राणा कपूर को ED कोर्ट ले जाते हुए. (तस्वीर: PTI)
8 मार्च, 2020. यस बैंक के फ़ाउंडर राणा कपूर को ED कोर्ट ले जाते हुए. (तस्वीर: PTI)

# यस बैंक का FPO-

15 जुलाई से 17 जुलाई तक आप यस बैंक  FPO के लिए अप्लाई कर सकते हैं. लेकिन आपको पूरे पैसे FPO के लिए अप्लाई करते वक़्त ही दे देने होंगे. आपको FPO अलॉट हुए या नहीं इसकी सूचना 22 जुलाई को मिलेगी. यानी कि ज़रूरी नहीं कि आपने अप्लाई किया तो आपको शेयर्स मिलें ही मिलें. अगर आपको शेयर नहीं मिले तो 23 जुलाई को आपके पैसे वापस हो जाएंगे. मिले तो 24 जुलाई को शेयर्स आपके डीमेट अकाउंट में आ जाएंगे. 27 जुलाई को ये FPO, शेयर मार्केट में लिस्ट हो जाएगा. मतलब 27 जुलाई को और इसके बाद आप इसे शेयर मार्केट में करेंट प्राइस पर बेच सकते हो. आप पूरे 1,000 शेयर भी बेच सकते हो. क्यूंकि इन शेयर्स पर कोई लॉक इन पीरियड नहीं है. यस बैंक अपने इस FPO से 15,000 करोड़ रुपए जुटाने की सोच रहा है.

एक इक्विटी शेयर की क़ीमत 12-13 रुपये रखी गई है. मतलब आप अगर ये FPO ख़रीदना चाहें तो प्रति शेयर 12 या 13 रुपये राशि कोट कर सकते हैं. ज़्यादा बोली वाले कोट को FPO मिलने की ज़्यादा संभावना होती है. इसलिए लोग सामान्यतः 13 रुपये ही कोट करते हैं.

इस FPO के माध्यम से आप 1000 के गुणांक में ही शेयर के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इन ‘1000 शेयर्स’ को FPO का लॉट साइज़ कहा जाता है. मतलब अगर आपने दो लॉट के लिए अप्लाई किया तो आपने 2000 शेयर्स के लिए अप्लाई किया. यूं आपको न्यूनतम 13,000 रुपये का इन्वेस्टमेंट करना ही करना होगा. अधिकतम आप 15 लॉट के लिए अप्लाई कर सकते हैं. मतलब आप अधिकतम 1,95,000 रुपये का ही इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं.

आपको अप्लाई करने के लिए ऐसे बैंक्स की मदद चाहिए होगी, जहां ASBA सुविधा उपलब्ध है. ASBA मतलब ‘एप्लिकेशन्स सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट’. आपको बताया था न FPO में अप्लाई करने के वक्त ही आपको पैसे देने होते हैं. दरअसल ये पैसे कहीं जाते नहीं बस आपके अकाउंट में ब्लॉक हो जाते हैं. अगर 22 जुलाई को आपको शेयर मिले तो पैसे कट जाएंगे, वरना 23 जुलाई को पैसे अन-ब्लॉक हो जाएंगे.

हालांकि आपको ASBA फ़ैसिलिटी को गली-गाली खोजना नहीं पड़ेगा. लगभग सभी डीमेट अकाउंट्स इस सुविधा से लैस होते हैं. यानी आपके पास एक डीमेट अकाउंट होना ज़रूरी है. जैसे बैंक्स में पैसे रखे होते हैं वैसे ही डीमेट अकाउंट में फ़ाईनेंशियल इंस्ट्रूमेंट होते हैं. अपना डीमेट अकाउंट खुलवाने के लिए आप अपने बैंक से संपर्क कर सकते हैं.

# FPO ख़रीदें न ख़रीदें-

हम हां या न में उत्तर देने के बजाय आपको पारदर्शी तरीक़े से कुछ फ़ैक्ट्स बताते हैं जो आपको निर्णय लेने में सहयोग करेंगे.

इस FPO की सूचना आते ही यस बैंक के शेयर धड़ाम हो गए. 13 जुलाई को मार्केट खुलने से पहले साढ़े पच्चीस रुपये के लगभग का शेयर 14 जुलाई को मार्केट क्लोज़ होते वक्त घटकर 21 रुपये का रह गया है. यूं अगर ये लिस्टिंग के दिन, यानी 27 जुलाई को ये घटते-घटते 13 रुपये के आसपास का हो गया तो आपको कोई फ़ायदा नहीं होगा. और इससे कम का हुआ तो उल्टा नुक़सान न हो जाए. साथ ही डाइल्यूशन भी एक कंसर्न है, जिसके चलते डिमांड एंड सप्लाई वाले तराज़ू में पाला सप्लाई की ओर को झुका रहेगा.

हालांकि अगर पॉज़िटिव की बात करें तो अगर आप इस FPO के लिए अप्लाई करते हैं और आपको ये मिल भी जाते हैं तो, आपको उस स्थिति में बहुत ज़्यादा फ़ायदा होगा जिस स्थिति में यस बैंक के शेयर्स के दाम ज़्यादा नहीं घटते, और किसी भी हाल में 13 रुपये से ऊपर बने रहते हैं.

SBI बैंक. सोलापुर शाखा. (SBI बैंक, YES बैंक का सबसे बड़ा इंवेस्टर है. ) (तस्वीर: PTI)
SBI बैंक. सोलापुर शाखा. SBI बैंक, YES बैंक का सबसे बड़ा इंवेस्टर है. (तस्वीर: PTI)

याद रखिए, जहां IPO को शेयर रूप नदी का स्रोत माना जा सकता है वहीं FPO एक संगम है, जहां पर FPO से इश्यू हुए शेयर्स, शेयर मार्केट में पहले ही से ट्रेड होने वाले शेयर्स से जा मिलेंगे. और फिर मार्केट में पहले से ही ट्रेड हो रहे शेयर्स ही डिसाइड करेंगे कि लिस्ट होते वक्त FPO के माध्यम से ख़रीदे गये शेयर्स की वैल्यू क्या रहती है.

हो सकता है ये जानकारी भी आपको ‘FPO के लिए अप्लाई करें या न करें’ निर्णय लेने में लाभदायक हो कि SBI, जिसके पास अभी यस बैंक के क़रीब 49% शेयर्स हैं, और जिसने 6,050 करोड़ रुपए इन्वेस्ट किए थे, उसे FPO के माध्यम से यस बैंक में 1,750 करोड़ रुपए और इन्वेस्ट करने की मंज़ूरी मिल गई है.


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