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संजय मिश्रा की 'साइड एक्टर्स' पर बनी वो फिल्म, जिस पर शाहरुख खान का दिल आ गया

संजय मिश्रा जब एक्टिंग फील्ड में ठीक-ठाक एक्टिव थे, तब बीमार पड़ गए. पापा ने खूब देखभाल की. लेकिन संजय के ठीक होने के बाद 15 दिन बाद पिताजी की डेथ हो गई. संजय को समझ न आए कि वो इस चीज़ को कैसे हैंडल करें. तब तक वो ‘गोलमाल’ वगैरह जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे. लेकिन पापा की डेथ के बाद मुंबई जाने के बदले वो ऋषिकेश निकल गए. एक सरदार जी के ढाबे पर काम करने लगे. मालिक ने पहचाना नहीं इसलिए काम चलता रहा. लेकिन उस ढाबे पर आने-जाने वाले उन्हें पहचान जाते. ऑमलेट खाते. फोटो खिंचाते और चलते बनते. अगर रोहित शेट्टी ‘ऑल द बेस्ट’ के लिए संजय को ढूंढते नहीं, तो आज इस आर्टिकल का इंट्रो कुछ और होता. खैर, संजय मिश्रा हीरो नहीं हैं. एक्टर हैं. वैसे तो ये अपने में ही एक मुकम्मल चीज़ है. लेकिन इसे भी अलग-अलग कैटेगरी में तोड़ दिया जाता है. लीड एक्टर, साइड एक्टर, कैरेक्टर एक्टर, जूनियर आर्टिस्ट ब्ला-ब्ला-ब्ला. इतने लंबे-चौड़े और शानदार  करियर के बाद संजय ‘साइड एक्टर’ वाली कैटेगरी में फिट होते हैं. अब वो एक फिल्म लेकर आ रहे हैं. इसका नाम है ‘कामयाब’. संजय इस फिल्म को अपने दिल के बहुत करीब मानते हैं. क्योंकि इस फिल्म की कहानी उनके जैसे ही एक ‘साइड एक्टर’ के बारे में है.

 फिल्म 'कामयाब' का पोस्टर.
फिल्म ‘कामयाब’ का पोस्टर.

फिल्म की कहानी

70-80 के दशक का एक ‘साइड एक्टर’ है सुधीर. फिल्मों में छोटे-मोटे किरदारों में दिखाई देता है. वो बस एक्टिंग करना चाहता है, इसलिए करता जाता है. उसे अपने किरदार और करियर की लंबाई से कोई मतलब नहीं है. वो अपने एक फिल्मी किरदार के डायलॉग ‘एंजॉइंग लाइफ और ऑप्शन क्या है!’ के इर्द-गिर्द जी रहा था. लेकिन तभी उसका एक इंटरव्यू होता. इसमें उसे पता चलता है कि वो 499 फिल्मों में काम कर चुका है. ये फैक्ट उसे बहुत शॉकिंग लगता है. इसके बाद से वो परेशान रहने लगता है. क्यों- ”नंबर का चक्कर बाबू भइया”. अब उसे लगता है कि उसकी 500वीं फिल्म कुछ अलग. कुछ कमाल होनी चाहिए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए. उसे एक फिल्म मिलती है. प्रोड्यूसर से लेकर डायरेक्टर सब इस चीज़ को लेकर कंफर्म हैं कि ये फिल्म सुधीर के लिए लाइफ चेंजिंग साबित होगी. लेकिन उसे वो फिल्म अपने कद के साथ न्याय करने वाली नहीं लगती है. इसी मेंटल कॉम्प्लिकेशन में वो फिल्म-फैमिली-करियर सबसे दूर छिटकने लगता है. इस फिल्म में बेसिकली सिनेमा इतिहास के सभी सो कॉल्ड साइड एक्टर्स को एक ट्रिब्यूट दिया जा रहा है. और ये करने का काम फिलहाल इंडिया के सबसे दिग्गज ‘साइड एक्टर’ को दिया गया है.

499 में से तीन अलग-अलग फिल्मों में सुधीर बाबू उर्फ संजय मिश्रा.
499 में से तीन अलग-अलग फिल्मों में सुधीर बाबू उर्फ संजय मिश्रा.

ट्रेलर कैसा है?

हम देखने वालों के लिए ‘कामयाब’ एक फिल्म है. लेकिन इसे बनाने और इसमें काम करने वालों के लिए ये एक मास्टरपीस होगी. आप उसी फील्ड में रहकर, वहां की सबसे कॉमन चीज़ पर सबसे रियलिस्टिक फिल्म बना रहे हैं. इस तरह के किरदार तो शाहरुख खान ने भी निभाए हैं. ‘ओम शांति ओम’ में. अभी हाल ही में आई ‘वंस अपॉन अ टाइम इन हॉलीवुड’ में ब्रैड पिट जैसे सुपरस्टार ने भी ऑलमोस्ट ऐसा ही कैरेक्टर प्ले किया. उसके लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का ऑस्कर जीता. लेकिन इस फिल्म का लीड एक्टर एक ‘साइड एक्टर’ है. यही चीज़ इस फिल्म को सबसे खास बनाती है. ये कोई फिल्म या ट्रेलर नहीं, फीलिंग है. जिससे आप बचने की लाख कोशिश करने के बावजूद रोमैंटिसाइज़ कर ही लेते हैं. वही रोमैंटिसाइज़ेशन आप ऊपर से पढ़ते हुए यहां तक पहुंचे हैं. इस फिल्म की कमाई मैटर नहीं करती. इस फिल्म का होना ही मेकर्स और एक्टर्स की कमाई है.

अपने करियर के सबसे पॉपुलर कैरेक्टर 'शेरा' के रोल में सुधीर.
अपने करियर के सबसे पॉपुलर कैरेक्टर ‘शेरा’ के रोल में सुधीर.

कौन-कौन काम कर रहा है?

फिल्म में सुपरस्टार साइडकिक सुधीर का रोल कर रहे हैं ‘ऑल द बेस्ट’ में ‘ढोंडू जस्ट चिल’ करने वाले संजय मिश्रा. क्योंकि ये फिल्म वैसे ही एक्टर्स के बारे में है, जिनकी ‘आंखों देखी’ और ‘मसान’ जैसी फिल्मों के बीच ‘ढोंडू जस्ट चिल’ को याद रखा जाता है. फिल्म में कास्टिंग डायरेक्टर का रोल कर रहे हैं दीपक डोबरियाल. दीपक को हमने मन्नू भइया के साथ ‘तनु वेड्स मनु’ सीरीज़ और चुलबुल पांडे के साथ ‘दबंग 2’ जैसी फिल्मों में देखा है. ‘आर्टिकल 15’-‘ट्यूबलाइट’ के अलावा कई साउथ इंडियन फिल्मों में काम कर चुकीं ईशा तलवार काम कर रही हैं. साथ में ‘ओके जानू’ और ‘बॉम्बे वेल्वेट’ में छोटे किरदारों में नज़र आ चुकी सारिका सिंह भी इस फिल्म का हिस्सा हैं.

मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर के रोल में दीपक डोबरियाल, जो सुधीर को 500वीं फिल्म दिलाने में मदद कर रहा है.
मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर के रोल में दीपक डोबरियाल, जो सुधीर को 500वीं फिल्म दिलाने में मदद कर रहा है.

किसने बनाई है?

इस फिल्म को डायरेक्ट किया है हार्दिक मेहता ने. हार्दिक इससे पहले गुजराती शॉर्ट फिल्म ‘अमदाबाद मा फेमस’ बना चुके हैं. राजकुमार राव की विक्रमादित्य मोटवानी डायरेक्टेड फिल्म ‘ट्रैप्ड’ (2016) की कहानी इन्होंने ही लिखी थी. राजकुमार राव और जाह्नवी कपूर स्टारर ‘रूही अफज़ाना’ हार्दिक की बतौर डायरेक्टर दूसरी फिल्म होने वाली है. ‘कामयाब’ को शाहरुख खान, दृश्यम फिल्म्स के साथ मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं. साथ ही इसे प्रेजेंट करने की ज़िम्मेदारी भी उनकी प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट के कंधे पर ही है. अभी कुछ ही दिन पहले अक्षय कुमार भी स्वानंद किरकिरे की मराठी फिल्म ‘चुंबक’ के साथ बतौर प्रेज़ेंटर जुड़े थे.

कब आ रही है?

‘कामयाब’ पिछले काफी समय से बनकर तैयार है. देश विदेश में घूम-फिरकर इंडिया पहुंची है. इसे दुनियाभर के कुछ पॉपुलर फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया गया है. नाम लेने पर आएं, तो बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, न्यू यॉर्क साउथ एशियन फिल्म फेस्ट, इंडियन फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न, शांघाई इंटरनेशन फिल्म फेस्टिवल वगैरह-वगैरह. रिलीज़ का इंतज़ार पिछले काफी समय से हो रहा था. लेकिन छोटी फिल्मों की रिलीज़ में काफी दिक्कतें आती हैं. ‘कामयाब’ के साथ शाहरुख के जुड़ने की वजह कम से कम इसकी रिलीज़ वाली समस्या तो दूर हो गई है. इंडिया में ‘कामयाब’ 6 मार्च, 2020 को रिलीज़ हो रही है.

फिल्म का ट्रेलर आप यहां देख सकते हैं:


अब आ ही गए हैं, तो संजय मिश्रा का धांसू और लल्लनटॉप इंटरव्यू देखते जाइए

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