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भारत की स्वदेशी वैक्सीन COVAXIN पर ब्राजील में बवाल क्यों मचा हुआ है?

भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ को लेकर ब्राजील में बवाल मचा हुआ है. ब्राजील सरकार पर आरोप है कि उसने ऊंची कीमत पर कोवैक्सीन का सौदा किया. विवाद में जब राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो पर सवाल उठे तो उन्हें सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा. इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ. ब्राजील के एक सीनेटर ने बोल्सोनारो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया. वैक्सीन खरीद में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग कर डाली. अब ब्राजील के हेल्थ मिनिस्टर ने घोषणा की है कि वह कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक के साथ हुआ 32.4 करोड़ डॉलर का करार सस्पेंड कर रहे हैं.

भारी दबाव में राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो

2021 के फरवरी महीने में ब्राजील सरकार ने भारत बायोटेक के साथ वैक्सीन खरीदने को लेकर करार किया था. यह करारा 2400 करोड़ रुपए का था. यह करार ही अब ब्राजील सरकार के गले ही हड्डी बन गया है. एक तरफ ब्राजील कोरोना की मार झेल रहा है, ऊपर से वैक्सीन को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. 25 जून को ब्राजील के एक संसदीय पैनल ने उन विसलब्लोअर के बयान दर्ज किए, जिन्होंने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे.

सुनवाई के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति और उनकी सरकार पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने भारत की वैक्सीन को दूसरी वैक्सीनों के मुकाबले महंगे रेट पर खरीदा है. वह भी तब, जब इसे लोकल रेग्युलेटरी अथॉरिटी का अप्रूवल भी नहीं मिला है. ये वही पैनल है, जिसे कोरोना संकट में हुई भारी अनियमितताओं की जांच के लिए खासतौर से बनाया गया है. बता दें कि कोरोना की वजह से अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा 5.13 लाख मौतें ब्राजील में ही हुई हैं.

इस कथित स्कैंडल के खुलासे के बाद कोरोना के मिसमैनेजमेंट को लेकर आलोचना झेल रहे ब्राजील के राष्ट्रपति का हाल और बुरा हो गया. सभी बड़े अखबारों ने पहले पेज पर इस घोटाले को कवरेज दी. सोशल मीडिया पर #CovaxinGate भी ट्रेंड होता दिखा.

कहां से शुरू हुआ ये बवाल?

इस बवाल की शुरुआत ब्राजील की हेल्थ मिनिस्ट्री से ही हुई. मार्च 2021 में ब्राजील की हेल्थ मिनिस्ट्री के एक अधिकारी लुईस रिकार्डो मिरांडा ने राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो से संपर्क किया. उसने राष्ट्रपति को बताया कि उन पर कोवैक्सीन खरीदने को लेकर दबाव डाला जा रहा है. वह इस वैक्सीन को लेकर आशंका जता चुके हैं लेकिन उनकी बात अनसुनी की जा रही है. बता दें कि मिरांडा उन दो विसलब्लोअर्स में से एक हैं, जिनकी सुनवाई 25 जून को संसदीय कमेटी के सामने हुई है. मिरांडा के मुताबिक

“सरकार को 30 लाख डोज़ के लिए 3.5 करोड़ डॉलर का एक इनवॉयस मिला है. इस रेट का फरवरी में की गई डील में कोई जिक्र नहीं है. मेरी चिंता उस कंपनी को लेकर भी है, जो इस डील का हिस्सा है. यह कंपनी सिंगापुर की है और इसका नाम है मैडिसन बायोटेक. यह एक शेल कंपनी मालूम पड़ती है. कोवैक्सीन को ब्राजील में रेग्युलेटरी अप्रूवल भी नहीं मिला है. मेरे पास लगातार उच्च अधिकारियों के ऐसे कॉल आ रहे हैं, जिसमें पेमेंट को अप्रूव करने का दबाव बनाया जा रहा है.”

बवाल बढ़ा तो सरकार हरकत में आई

जब इस तरह की बातें सामने आईं और अखबारों से लेकर सोशल मीडिया में सरकार की किरकिरी होने लगी, तब सरकार ने सक्रियता दिखाई. जांच के आदेश दे दिए. इसी बीच ब्राजील के बड़े अखबार ‘एस्टाडो डेस पाउलो’ ने खुलासा करते हुए दावा किया कि भारत बायोटेक ने शुरुआत में कोवैक्सीन के लिए 1.34 डॉलर प्रति डोज का रेट कोट किया था, लेकिन ब्राजील सरकार 15 डॉलर प्रति शॉट देने को राजी हो गई. सरकार ने 2021 में इससे सस्ते रेट पर मिल रही फाइजर की वैक्सीन लेने से मना कर दिया.

इसके बाद विसलब्लोअर लुईस रिकार्डो मिरांडा ने अपने भाई लुईस मिरांडा के साथ मीटिंग की. दोनों के नाम मिलते जुलते हैं ऐसे में कंफ्यूजन न हो, इसलिए हम लुईस मिरांडा को सांसद मिरांडा कहेंगे. वह ब्राजील की संसद के सदस्य हैं, और जाएर बोल्सोनारो की सरकार को समर्थन भी दे रहे हैं. 20 मार्च को रिकार्डो मिरांडा और सांसद मिरांडा ने राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो से मुलाकात की. लेकिन मामला बना नहीं. दोनों भाई विसलब्लोअर बन गए.

सांसद मिरांडा 25 जून को संसदीय पैनल के सामने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर पहुंचे. उन्होंने बयान दिया कि

“राष्ट्रपति ने मेरी आंखों में आंखें डालकर देखा और कहा- ये गंभीर मामला है. अगर मैं इसमें दखल देता हूं तो बवाल बढ़ जाएगा. ये जरूर ‘उसकी’ डील होगी”

सांसद मिरांडा ने आगे कहा कि जब मैंने ‘उसका’ नाम पूछा तो जाएर बोल्सोनारो ने रॉबर्टो बारोस का नाम लिया. रॉबर्टो एक प्रभावशाली नेता हैं, और ब्राजील की संसद के निचले सदन में सरकार चलाने वाले गठबंधन के मुखिया हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, संसदीय पैनल ने मिरांडा भाइयों और प्रेशिया मेडिकामेंटोस नाम की कंपनी के मालिक को सुरक्षा देने को कहा है. ये कंपनी ही भारत बायोटेक और ब्राजील सरकार के बीच मध्यस्थता का काम कर रही है.

Covid Brazil
ब्राज़ील में कोरोना के मामले जब बढ़ रहे थे, तब राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो बेतुकी बयानबाजी करते रहे. ब्राजील दुनिया में कोरोना से मौतों के मामले में दूसरे नंबर पर है.  (तस्वीर: एपी)

राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने क्या कहा?

जाएर बोल्सोनारो और रॉबर्टो बारोस ने सिरे से सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. राष्ट्रपति ने उलटे मिरांडा भाइयों पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि

“हमने कोवैक्सीन पर अभी एक पैसा खर्च नहीं किया है. हमें कोवैक्सीन की एक भी डोज़ नहीं मिली है. ये किस तरह का भ्रष्टाचार है?”

भारत बायोटेक का क्या कहना है?

इस मसले पर कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक ने भी अपनी सफाई दी है. जारी स्टेटमेंट में कंपनी ने कहा कि

“हम COVAXIN की सप्लाई के बारे में किसी भी तरह के आरोप या कोई गलत काम करने के आरोपों का खंडन करते हैं.”

कंपनी ने माना कि मैडिसन बायोटेक उनकी सेल्स और मार्केटिंग पार्टनर है. दुनिया के हर देश में चूंकि भारत बायोटेक का ऑफिस नहीं है, ऐसे में उनके लिए यह काम मैडिसन बायोटेक करती है. भारत बायोटेक ने यह भी कहा है कि विदेश के लिए वैक्सीन का दाम शुरुआत से ही 15-20 डॉलर के बीच रखा गया था. ब्राजील ने भी इस दाम के हिसाब से ही उनसे संपर्क किया था. उन्हें अभी तक वैक्सीन इसलिए नहीं भेजी गई क्योंकि कंपनी को अभी तक खरीद के लिए कोई औपचारिक ऑर्डर नहीं मिला है. जिस देश को वैक्सीन खरीदनी होती है, उसका एक स्टैंडर्ड तरीका होता है. ये तरीका कुछ ऐसा है-

# कंपनी संबंधित देश से या तो एमओयू (सहमति पत्र) साइन करती है या लेटर ऑफ इंटेंट यानी वैक्सीन में रुचि को लेकर प्रपोजल स्वीकार करती है.

# इसके बाद कंपनी उस देश में इमरजेंसी यूज अप्रूवल पाने के लिए प्रोसेस शुरू करती है.

# अप्रूवल मिलने के बाद संबंधित देश की हेल्थ मिनिस्ट्री एक परचेज़ ऑर्डर कंपनी को जारी करती है. कई देशों की मिनिस्ट्री इमरजेंसी यूज़ अप्रूवल से पहले भी ऑर्डर दे देती हैं. मिसाल के तौर पर अमेरिका, यूरोपियन यूनियन आदि. हालांकि खरीद की प्रक्रिया अप्रूवल मिलने के बाद ही होती है.

# देश से परचेज़ ऑर्डर प्राप्त करने के लिए कंपनी टीके की आपूर्ति का एक प्रो फॉर्मा इनवॉयस मिनिस्ट्री को जारी करती है. मतलब पहले से एक बिल बनाकर भेज दिया जाता है.

# इस इनवॉयस या बिल का अडवांस में पेमेंट करना होता है.

# पेमेंट कंपनी को मिल जाने के बाद कंपनी बताती है कि कब तक वैक्सीन का ऑर्डर पूरा कर दिया जाएगा.

# ब्राजील के मामले में भी कंपनी ने यही प्रोसेस फॉलो करने का दावा किया. भारत बायोटेक के मुताबिक, नवंबर 2020 में मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के अधिकारियों के साथ मीटिंग हुई. 4 जून 2021 को ब्राजील से रेग्युलेटरी अप्रूवल मिल गया. लेकिन 29 जून तक भी ब्राजील की तरफ से वैक्सीन के एक भी ऑर्डर का अडवांस पेमेंट नहीं हुआ.

ब्राजील के हेल्थ मिनिस्टर 22 जून को कह चुके हैं कि भारत बायोटेक को कोई भी पेमेंट नहीं किया गया है. डील को लेकर कानूनी समीक्षा चल रही है. लेकिन इस सबके बीच सबसे ज्यादा बुरा हाल ब्राजील के राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो का है. देश में कोरोना मिस मैनेजमेंट के चलते उनकी लोकप्रियता लगातार गिरती जा रही है. ब्राजील में अगले साल इलेक्शन हैं. और पूर्व राष्ट्रपति लुईस इनोकियो लुला डा सिल्वा उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए कमर कस चुके हैं.


वीडियो – कोरोना वायरस को ब्राजील के राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे?

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