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स्विच ऑफ होने पर भी कैसे चमकता रहता है LED बल्ब? 'Ghost Glowing' का रहस्य समझें

घर में कुछ एलईडी बल्ब और ट्यूबलाइट बिजली का खटका (बटन) बंद होने पर भी हल्के-हल्के जलते रहते हैं. स्विच बंद होने के बाद भी एलईडी (LED) बल्बों का हल्का-हल्का चमकते रहना 'घोस्ट ग्लोइंग' कहलाता है. ये होता क्यों है और इसे ठीक कैसे करते हैं, आज जान लीजिए.

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घोस्ट ग्लोइंग (Ghost Glowing) आपके बिजली का बिल बढ़ा रही क्या?

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  • एलईडी बल्ब बंद होने के बाद भी हल्का चमकता रहता है, जिसे 'घोस्ट ग्लोइंग' कहा जाता है, जो मुख्य घटना के रूप में स्विच बंद होने पर भी बिजली का प्रभाव दिखाता है।
  • घोस्ट ग्लोइंग की वजह फेज और न्यूट्रल तारों के पास चलने या स्विच बोर्ड में तारों के गलत कनेक्शन से इंडक्शन और करंट रिसाव होता है, जो एलईडी में हल्की रोशनी पैदा करता है।
  • इस समस्या के समाधान के लिए इलेक्ट्रीशियन से स्विचबोर्ड की वायरिंग सही करानी चाहिए ताकि स्विच हमेशा सही फेज वायर पर लगे और बिजली का झटका न लगे।

आपने कभी नोटिस किया कि आपके घर में कुछ एलईडी बल्ब और ट्यूबलाइट बिजली का खटका (बटन) बंद होने पर भी हल्के-हल्के जलते रहते हैं. दिन में शायद ये नहीं दिखता लेकिन रात में साफ (what is ghostglowing in led bulbs) पता चलता है. ऐसा ऑफिस में भी होता है लेकिन वहां कौन ही नोटिस करता है. इतना पढ़कर आपके दो रिएक्शन होंगे. पहला, हां यार, होता तो है. दूसरा, अरे यार कभी नोटिस नहीं किया. कोई बात नहीं. आज नोटिस कर लेना. चलिए अब स्टोरी का ‘खटका’ दबाते हैं.

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घोस्ट ग्लोइंग हो रही

आखिर स्विच बंद होने के बाद जब करंट बल्ब तक पहुंचता तक नहीं, तो बल्ब हल्का कैसे चमकता रहता है? इसे 'Ghost Glowing' कहा जाता है. घोस्ट शब्द सुनकर उधर नहीं जाना है जिधर आप चले गए. दरअसल ये तो इलेक्ट्रिकल और होम वायरिंग से जुड़ा एक तकनीकी शब्द है. पुराने ज़माने के 100 वॉट वाले फिलामेंट बल्ब में यह समस्या नहीं होती थी, क्योंकि उन्हें जलने के लिए ज्यादा बिजली की जरूरत होती थी. लेकिन LED बल्ब बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं और मामूली सी बिजली (करंट) मिलने पर भी ग्लो करने लगते हैं. इसलिए इसे घोस्ट ग्लोइंग कहते हैं. अब ऐसा दो वजहों से हो सकता है.

# पहला तो जब घरों की वायरिंग में फेज और न्यूट्रल के तार लंबे समय तक एक-दूसरे के बेहद करीब चलते हैं. माने दोनों तारों को एक साथ टेप से लपेट दिया या एकदम चिपकाकर लाइन बिछा दी. इससे उनके बीच इंडक्शन पैदा होता है और मामूली करंट रिसने लगता है. जो एलईडी बल्ब में पहुंचता है. वैसे तो ये करेंट हर डिवाइस में पहुंचता है. लेकिन जैसा हमने कहा, एलईडी कुछ ज्यादा ही संवेदनशील होते हैं तो दिखता है.

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# दूसरा अगर स्विच बोर्ड में फेस की जगह गलती से न्यूट्रल वायर पर स्विच लगा दिया जाए, तो स्विच बंद होने पर भी होल्डर तक डायरेक्ट फेज पहुंचता रहता है. माने तारों की अदला-बदली कर दी तो बटन बंद करने से सप्लाई रुक तो जाती है मगर हल्की फुल्की सरक कर एलईडी तक पहुंच जाती है.

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अब इसको ठीक कैसे करते हैं उसके पहले बिजली बिल का गणित जान लो. हालांकि अगर बिजली की सप्लाई हो रही तो बिल बढ़ना चाहिए, लेकिन ये वाली सप्लाई इतनी कम होती है कि बिल पर असर नहीं आता. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि ऐसा होने दिया जाए. स्विच ऑफ होने पर भी बल्ब होल्डर में लाइव करंट बना रहता है. ऐसे में हाथ लगने पर बिजली का तेज झटका लग सकता है.

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इस घोस्ट को भगाने का 'मंतर' इलेक्ट्रीशियन के पास मिलता है. किसी इलेक्ट्रीशियन को बुलाकर स्विचबोर्ड की वायरिंग ठीक करवा लीजिए. बोले तो स्विच को हमेशा न्यूट्रल की जगह सही फेज वायर पर लगवा लीजिए. इसके बाद खटका बंद तो एलईडी बंद.

चेतावनी: तारों की अदला-बदली का काम खुद से नहीं बल्कि किसी इलेक्ट्रीशियन से ही करवाना है. 

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