The Lallantop

भीड़ में 5G की स्पीड हो जाती है स्लो? JIO-एयरटेल ने इसका जुगाड़ खोज लिया

Jio ने पंढरपुर में 35 लाख लोगों और तिरुपति में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाले आयोजनों में नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल किया है. जिससे कुछ लोगों के मोबाइल में इंटरनेट की स्पीड कई गुना ज्यादा हो गई. 5G स्लाइसिंग तकनीक क्या है? आइए सब जानते हैं.

Advertisement
post-main-image
Jio नेटवर्क स्लाइसिंग के लिए रेडियो एक्सेस नेटवर्क यानी कि RAN पर जोर दे रहा है

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • एयरटेल और Jio ने भीड़भाड़ वाली जगहों में 5G स्लाइसिंग तकनीक का सफल प्रयोग शुरू किया है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग नेटवर्क स्पीड दी जा सकेगी।
  • भारी भीड़ वाली जगहों पर डेटा स्पीड कम होने और बेहतर सेवा देने की जरूरत के कारण 5G स्लाइसिंग तकनीक विकसित की गई है, जो नेटवर्क संसाधनों को विशेष रूप से आवंटित करती है।
  • 5G स्लाइसिंग के लागू होने से टेलिकॉम कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है, जबकि TRAI अभी इस पर क्वालिटी-ऑफ-सर्विस और नेट न्यूट्रैलिटी नियम बना रहा है।

अक्सर आपने नोटिस किया होगा कि बहुत भीड़-भाड़ वाली जगह पर आपके मोबाइल की स्पीड एकदम धीमी हो जाती है. कई बार सोशल मीडिया से लाइव करते समय भी आपको एक्स्ट्रा स्पीड की दरकार होती है. ऐसे में अगर आपको जेब से थोड़ा पैसा खर्च करके एक्स्ट्रा स्पीड मिल जाए तो क्या आप पैसा खर्च करेंगे. सवाल का जवाब हां और ना दोनों हो सकता है, मगर ऐसा जल्दी हो जरूर जाएगा. बड़े आयोजनों से लेकर भीड़भाड़ वाली जगहों में डेटा की स्पीड को बनाए रखने की इस तकनीक को 5G स्लाइसिंग कहते हैं.

Advertisement

देश के दो बड़े टेलिकॉम ऑपरेटर्स एयरटेल और Jio ने इसका सफल इस्तेमाल शुरू कर दिया है. हालांकि, TRAI अभी 5G नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर क्वालिटी-ऑफ-सर्विस फ्रेमवर्क और नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़े नियमों को तैयार कर रहा है.

पुलिस के लिए 5G स्लाइसिंग

Jio ने पंढरपुर में 35 लाख लोगों और तिरुपति में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाले आयोजनों में नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल किया है. दरअसल पंढरपुर में पुलिस व्यवस्था बनाए रखने के लिए खास मिशन क्रिटकल स्लाइस बनाई गई थी. मीडियानामा की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए Jio ज्यादा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में(Radio Access Network) रेडियो एक्सेस नेटवर्क यानी कि RAN पर जोर दे रहा है, जो डेटा और ट्रैफिक की जरूरतों के लिहाज से खुद को ऑटोमैटिक तरीके से ढाल लेता है.

Advertisement

RAN मोबाइल नेटवर्क का वह भाग है जो आपके फोन (स्मार्टफोन या अन्य डिवाइस) को सीधे मोबाइल टावर के ज़रिए टेलीकॉम कंपनी के कोर नेटवर्क (Core Network) से जोड़ता है. जब आप कॉल करते हैं या इंटरनेट चलाते हैं, तो आपके फोन से निकलने वाले सिग्नल सबसे पहले नजदीकी एंटीना या टावर (RAN) तक पहुंचते हैं. वहां से यह सिग्नल आगे मुख्य नेटवर्क तक जाता है. हालांकि,  5G स्लाइसिंग मुफ़्त नहीं है. इसके लिए इस्तेमाल करने वाले/वालों को टेलिकॉम कंपनियों को अलग से पैसा देना होगा. फिलहाल इसके फ्रेमवर्क पर काम चल रहा है तो चार्जेस के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.

एयरटेल ने कुछ महीने पहले अपने पोस्टपेड यूजर्स को इस तरह की सुविधा देना स्टार्ट किया है. कंपनी इसे फास्ट लेन कहती है जिसमें पोस्टपेड यूजर्स को ज्यादा तवज्जो दी जाती है. एयरटेल फिलहाल इसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं करता है.

नेट न्यूट्रैलिटी का क्या होगा?

5G स्लाइसिंग तकनीक की टेस्टिंग के साथ ही इस बात की बहस भी होने लगी है कि नेट न्यूट्रैलिटी का क्या होगा. माने जिसने पैसा खर्च किया उसको स्पीड ज्यादा मिलेगी और जिसने नहीं उसको कम. ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (BIF) का तर्क है कि 5G स्लाइसिंग की वजह से कंटेंट के आधार पर भेदभाव हो सकता है और जो कि नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों का उल्लंघन है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: iPhone 18 Pro नहीं बिक रहा, प्रोडक्शन भी होगा कम, रिपोर्ट में वजह सामने आई

हमने जब इस मसले पर 5G सर्विस की बैकबोन माने जाने वाली कंपनी Ericsson की नीता गुप्ता से बात की थी तो उन्होंने बताया था कि 5G स्लाइसिंग से नॉर्मल यूजर को कोई फर्क नहीं पड़ता. जो यूजर पैसे देकर एक्स्ट्रा स्पीड चाहता है उसको कंपनी अपने सिस्टम से स्पीड मुहैया करवाती है. नॉर्मल यूजर को जो स्पीड उसके प्लान के हिसाब से ही मिलती है.

अब वाकई में ऐसा होता है या नहीं, वो तो 5G स्लाइसिंग के रोलआउट होने के बाद पता चल ही जाएगा. लेकिन इतना तो तय है कि इसके आने से कंपनियों की एक्स्ट्रा कमाई तो तय है. 

वीडियो: अमेजन-फ्लिपकार्ट सेल की 7 सबसे धांसू डील्स, कौन-सा प्रोडक्ट खरीदना होगा फायदे का सौदा?

Advertisement