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पीक ब्राइटनेस का दावा, फिर धूप में फीकी क्यों पड़ जाती है फोन की स्क्रीन? APL का खेल समझिए

Smartphones में आजकल Peak Brightness को खूब बढ़ाकर बेचा जा रहा है. लेकिन क्या असल में जितना दावा किया जाता है उतनी ब्राइटनेस वाकई में मिलती है या नहीं. खेल पीक ब्राइटनेस का है या फिर मामला Average Picture Level का है.

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स्मार्टफोन में पीक ब्राइटनेस और एवरेज पिक्चर लेवल का खेल

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  • स्मार्टफोन कंपनियों ने अपने फोन की स्क्रीन की चमक के लिए पीक ब्राइटनेस (nits में मापा) का दावा किया है जो आदर्श स्थिति में स्क्रीन की अधिकतम चमक को दर्शाता है।
  • धूप में स्क्रीन की मिचमिचाहट का कारण एवरेज पिक्चर लेवल (APL) है, जो बताता है कि स्क्रीन पर कितनी प्रतिशत सामग्री ब्राइट है और वास्तविक चमक पर असर डालता है।
  • अधिकांश स्मार्टफोन में औसतन 15-20 फीसदी APL होता है, इसलिए पूरी स्क्रीन की उच्च चमक पीक ब्राइटनेस दावा की तुलना में कम होती है, जिससे खरीदते समय इसे ध्यान में रखना आवश्यक है।

आप जब भी नया स्मार्टफोन खरीदने जाते होंगे तो शोरूम वाले भईया एक बात जरूर बताते होंगे. अगर शोरूम वाले भईया नहीं भी बताते होंगे तो स्मार्टफोन कंपनियां इसके बारे में जोर-शोर से बात करती हैं. स्मार्टफोन कंपनियां हमेशा कहती हैं कि उनके फोन में Peak Brightness, 3000-4000-5000 निट्स है. माने भरी धूप में भी स्क्रीन पर सब साफ नजर आएगा. लेकिन ऐसा होता है क्या? अमूमन नहीं क्योंकि धूप में आते ही फोन स्क्रीन मिचमिचाने लगती है. ऐसा ही होता है न! इसका मतलब कंपनियों ने आपको बेवकूफ बनाया क्या? नहीं बल्कि आपको APL में फांस लिया.

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APL यानी Average Picture Level वो खेल है जो जिसका लेवल अप और डाउन करके आपकी आंखों को मिचमिचाया जाता है. हम आपको पीक ब्राइटनेस और एवरेज पिक्चर लेवल का पूरा गेम बताते हैं.

क्या है पीक ब्राइटनेस?

इसको मापते हैं nits में. किसी भी प्रोडक्ट, जिसमें स्क्रीन लगी है मसलन स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप या कोई और प्रोडक्ट. उसका डिस्प्ले कितना चमकदार होगा ये nits में मापा जाता है. ये जितना ज्यादा होगा डिस्प्ले उतना ब्राइट होगा. आसान गणित के लिए एक मोमबत्ती जितने स्क्वेयर मीटर एरिया में चमक बिखेरी, उसको 1 nits कहेंगे. मतलब, अगर स्मार्टफोन 1000 nits का दावा करता है तो 1000 मोमबत्ती जितनी रोशनी.

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लेकिन स्मार्टफोन में इसके साथ जोड़ा जाता है एक शब्द Peak. यही है वो झुनझुना. एकदम वैसे ही जैसे सेल के लिए कंपनियां लिख देती हैं UPTO. मतलब UPTO 50% ऑफ या UPTO 80% ऑफ. पीक मतलब सिर्फ एक बार या या कहें एक फ्रेम में. बोले तो आइडियल कंडीशन में जितना दावा किया गया उतना टच करेगी तो जरूर लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होगा.

क्या है APL

स्मार्टफोन में ‘एवरेज पिक्चर लेवल’ (APL) ये बताता है कि किसी समय स्क्रीन पर दिखाई देने वाली कुल सामग्री में से कितना प्रतिशत हिस्सा सफेद या ब्राइट है. 100 फीसदी APL मतलब पूरी की पूरी स्क्रीन पूरी तरह से सफेद है, जैसे कि ब्राउज़र में कोई खाली सफेद पेज या सफेद डॉक्यूमेंट खोलना. 20 से 30 फीसदी APL माने स्क्रीन पर अधिकांश हिस्सा डार्क है और केवल कुछ हिस्से ब्राइट हैं. जैसे डार्क मोड ऑन करना या कोई फिल्म/गेम खेलना.

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आपको जानकर हैरानी होगी कि फोन में औसतन APL 15 से 20 फीसदी के आसपास रहता है. इसलिए जब कंपनियां फोन में 2000 या 3000 nits ब्राइटनेस का दावा करती हैं तो वह आमतौर पर 1 से 5 फीसदी APL पर ही संभव होती है. यानी केवल स्क्रीन के छोटे से ब्राइट हिस्से के लिए. पूरी स्क्रीन पर 100 फीसदी APL ब्राइटनेस हमेशा कम होती है.

इसलिए अगली बार जब कोई आपको पीक ब्राइटनेस वाला ज्ञान चेपे तो बोलना जरा APL बताओ. हालांकि इतना सब पचड़े में पड़ने की जरूरत नहीं. लेकिन कभी कोई आपकी आंखों को मिचमिचाने की कोशिश करे तो आप भी स्टाइल मार लेना. फोन कंपनी के दावे से नहीं अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से लेना. 

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