एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी के किस्से जब-तब आसमान में उड़ते रहते हैं. कभी फ्लाइट बिना कारण घंटों लेट हो जाती है तो कभी पायलट ड्यूटी छोड़कर चले जाते हैं. कभी ओवरबुकिंग के कारण किसी को बैठने नहीं दिया जाता तो कभी बिना वजह फ्लाइट रद्द कर दी जाती है. आम आदमी परेशान ही रह जाता है. लेकिन जब बात आम आदमी की नहीं बल्कि खास आदमी की हो तो एयरलाइन भी आसमान से सीधे जमीन पर आती है. जब जज साब को फ्लाइट में नहीं बिठाया (Vistara overbooking row) जाता तो फिर तगड़ा जुर्माना लगता है. पेश है उपभोक्ता फोरम से एक और कंपनी पर जुर्माने की कहानी.
जज का कंफर्म टिकट दूसरे को बेचा, विस्तारा एयरलाइंस पर लगा 1.10 लाख रुपये का जुर्माना
Vistara overbooking row: आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य आनंद वर्गीस की पीठ ने पाया कि जज ने जो टिकट नौ मई को 7,204 रुपये में खरीदा था, उसे एयरलाइन ने 28 मई को किसी अन्य यात्री को 40 हजार रुपये में बेच दिया.


कांकेर में पदस्थ एडीजे भूपेंद्र कुमार वासनीकर अपने परिवार के साथ कश्मीर में छुट्टियां बिताने के बाद 28 मई 2023 को दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे. उन्होंने 9 मई को ही 23,156 रुपये का पेमेंट कर विस्तारा फ्लाइट के चार टिकट बुक किए थे. 28 मई को उड़ान के समय से चार घंटे पहले (दोपहर दो बजे) वो दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए थे.
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विस्तारा के कर्मचारियों ने उन्हें तीन घंटे तक बोर्डिंग पास जारी नहीं किया. हद तो तब हो गई जब उड़ान से एक घंटे पहले ओवरबुकिंग का हवाला देकर जज का टिकट कैंसिल कर दिया गया और केवल उनकी पत्नी और बेटे-बेटी को रायपुर भेज दिया गया. जज साहब को दिल्ली में ही रुकना पड़ा और अगले दिन उन्हें इंडिगो एयरलाइंस की 18,823 रुपये की टिकट खरीदकर रायपुर आना पड़ा.
उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसलाएडीजे भूपेंद्र कुमार ने छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत की. आयोग ने विस्तारा एयरलाइंस को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसमें 10 हजार रुपये मुकदमे में लगा खर्च शामिल है. यह राशि शिकायतकर्ता अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश भूपेंद्र कुमार वासनीकर को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी. अगर 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया गया तो एयरलाइंस को इस राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
एयरलाइन की दलीलएयरलाइन का दावा था कि कोई वैकल्पिक फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने किराये का चार गुना रिफंड कर दिया. आयोग ने इस दलील को खारिज कर दिया. आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य आनंद वर्गीस की पीठ ने पाया कि जज ने जो टिकट 9 मई को 7,204 रुपये में खरीदा था, उसे एयरलाइन ने 28 मई को किसी अन्य यात्री को 40 हजार रुपये में बेच दिया.
टाटा ग्रुप (Tata Group) और सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines) की हिस्सेदारी वाली एयरलाइंस कंपनी विस्तारा का 12 नवंबर 2024 को एयर इंडिया में मर्जर हो चुका है. इसके बाद से पूरा ऑपरेशन एयर इंडिया द्वारा संचालित किया जाता है.
आपको ये केस और दूसरे केस इसलिए बताए कि अगर कोई कंपनी आपसे बेईमानी करे तो चुप मत बैठिए. शिकायत कीजिए.
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