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6 सैटेलाइट्स के साथ स्पेस में उड़ा प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1', स्काईरूट ने क्या कमाल कर दिया?

हैदराबाद की Skyroot Airospace कंपनी ने भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'Vikram-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. इस कामयाबी के साथ भारत, अमेरिका और चीन के बाद निजी तौर पर ऑर्बिटल क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है.

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स्काईरूट ने भारत के पहले प्राइवेट लॉन्च के साथ इतिहास रचा. (फोटो: स्काईरूट)

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  • भारत की प्राइवेट कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने 'विक्रम-1' नामक रॉकेट को 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा से लॉन्च करके छह पेलोड सहित दो सैटेलाइट्स को लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया।
  • भारत ने अपने स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलते हुए 2018 में स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की, जिसका उद्देश्य छोटे सैटेलाइट मार्केट के लिए स्पेस पहुंच को सस्ता और भरोसेमंद बनाना था।
  • इस सफलता के साथ भारत निजी ऑर्बिटल क्षमता हासिल करने वाला तीसरा देश बन गया, जिससे प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत ने अपने स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए पूरी तरह से खोल दिया है. हैदराबाद की प्राइवेट कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने देश का पहला ऐसा प्राइवेट रॉकेट अंतरिक्ष में भेजा है. इस रॉकेट का नाम 'विक्रम-1' है. इस रॉकेट ने अपने साथ छह अलग-अलग स्पेस मशीनें (पेलोड) लेकर उड़ान भरी, जिनमें दो सैटेलाइट भी शामिल हैं. उन्हें सुरक्षित रूप से धरती की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित कर दिया गया है.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया था. 'विक्रम-1' करीब 23 मीटर ऊंचा (लगभग एक 7 मंजिला इमारत जितना) और 1.7 मीटर चौड़ा है. इसने 18 जुलाई की सुबह 11:30 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में बने 'सतीश धवन स्पेस सेंटर' के पहले लॉन्च पैड से उड़ान भरी. अब भारत में प्राइवेट कंपनियों के लिए अंतरिक्ष के दरवाजे पूरी तरह खुल गए हैं.

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इस कामयाबी के साथ भारत, अमेरिका और चीन के बाद निजी तौर पर ऑर्बिटल क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है.

पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक फोन कॉल के जरिए स्काईरूट टीम को मिशन की शानदार सफलता के लिए बधाई दी. प्रधानमंत्री ने कहा, 

पवन और भरत, आप लोगों ने न सिर्फ अंतरिक्ष में एक नया पेड़ लगाया है, बल्कि जमीन पर भी एक नई जड़ मज़बूत की है जो नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी.

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उन्होंने X पर लिखा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक अहम पड़ाव है. प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी नए रास्ते खोल रही है और इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है.

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स्काईरूट क्या है?

स्काईरूट की स्थापना 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी. उनका मकसद तेजी से बढ़ रहे छोटे सैटेलाइट मार्केट के लिए स्पेस तक पहुंच को ज्यादा सस्ता, भरोसेमंद और बेहतर बनाना था.

कंपनी ने पहली बार 2022 में इतिहास रचा, जब उसका 'विक्रम-S' रॉकेट स्पेस तक पहुंचने वाला भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट बना. हालांकि, यह सिर्फ सब-ऑर्बिटल रॉकेट था. यह जमीन से उठा, अंतरिक्ष की सीमा (करीब 89.5 किमी ऊपर) को छुआ और सीधे समुद्र में गिर गया. जबकि 'विक्रम-1' एक ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है. यह लो अर्थ ऑर्बिट पर गया और वहां सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक स्थापित किया, जो अब लगातार पृथ्वी के चक्कर काटेंगे.

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