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इंसानों के पास ज्यादा वक्त नहीं! गूगल के AI बॉस ने 'सुपर ह्यूमन' को लेकर चेता दिया है

आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) का रुख सुपर ह्यूमन की ओर बढ़ने लगा है. गूगल के AI बॉस डेमिस हसाबीस का मानना है कि अगले कुछ ही सालों में AI इंसानी क्षमता के बराबर या उससे बेहतर काम करने लगेगा.

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दुनिया सुपर ह्यूमन की ओर आगे बढ़ रही है. (तस्वीरें- Unsplash.com)

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  • गूगल के AI प्रमुख डेमिस हसाबीस ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी क्षमताओं के बराबर या उससे अधिक सक्षम हो जाएगा और इसके लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही।
  • AI की तेज प्रगति और सुपरह्यूमन स्तर तक पहुंचने की संभावना ने वैश्विक स्तर पर AI प्रोजेक्ट्स और खतरों की निगरानी के लिए एक वॉचडॉग बनाए जाने की आवश्यकता उत्पन्न कर दी है।
  • डेमिस हसाबीस का सुझाव है कि अमेरिका नेतृत्व में एक एआई रेगुलेटरी बॉडी बनाई जाए ताकि AI के तकनीकी जोखिमों को कम किया जा सके और भविष्य में AI सिस्टम्स पर नियंत्रण कायम रखा जा सके।

इंसानों को अपनी इस दुनिया को देखने का नजरिया जल्दी ही बदलना होगा. उनके पास ज्यादा वक्त नहीं है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस रफ्तार से एडवांस होती जा रही है, उसे देखकर एक्सपर्ट्स कहने लगे हैं कि वो कुछ ही सालों में सुपर इंटेलिजेंस तक पहुंच जाएगी. इंसान की हर तरह की क्षमता उसके आगे बौनी, बहुत बौनी होगी.

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आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) का रुख सुपर ह्यूमन की ओर बढ़ने लगा है. गूगल के AI बॉस डेमिस हसाबीस का मानना है कि अगले कुछ ही सालों में AI इंसानी क्षमता के बराबर या उससे बेहतर काम करने लगेगा. उन्होंने यह ‘डर’ भी जाहिर किया है कि 'सुपर ह्यूमन' को लेकर फौरन जरूरी कदम उठाने का यही समय है ताकि इसका इस्तेमाल इंसानियत की भलाई के लिए किया जा सके.

गूगल के AI बॉस डेमिस हसाबीस नोबेल प्राइज विजेता हैं. उनका नाम AI सेक्टर के बड़े ‘धुरंधरों’ में लिया जाता है. डेमिस ने सुपर ह्यूमन को लेकर अपने ब्लॉग में बातें रखी हैं. NDTV के मुताबिक डेमिस ने मांग की है कि अमेरिका के नेतृत्व में एक ग्लोबल वॉचडॉग बनाया जाए, जो दुनियाभर में AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स और खतरों पर ध्यान रख सके.

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AI हथियारों पर ज्यादा ध्यान

हसाबीस का कहना है कि आज दुनिया में लोग AI हथियारों तक पर बात हो रही है, जबकि AI से जुड़े खतरों के बारे में कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है. AI एक्सपर्ट ने ब्लॉग में कहा,

‘जैसे-जैसे हम AGI के करीब पहुंच रहे हैं, उससे पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए फौरन कदम उठाने की जरूरत है. हमने पहले ही देखा है कि फ्रंटियर मॉडल साइबर सिक्योरिटी के लिए क्या चुनौतियां पैदा करते हैं. जैसे-जैसे ऐसी क्षमताएं बढ़ेंगी, परमाणु और जैविक खतरें भी सामने आ सकते हैं.’

हसाबीस ने आगे कहा कि फ्यूचर में ऐसे ठोस उपायों की जरूरत होगी, जो खुद काम करने वाले और तेजी से बेहतर होने वाले सिस्टम पर कंट्रोल बनाए रख सकें. ब्लॉग में लिखा है,

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मुझे यकीन है कि AI से जुड़े टेक्निकल रिस्क को कम करना एक ऐसा टास्क है, जिसे हम सब मिलकर हल कर सकते हैं. पर ऐसा तभी हो सकता है, जब हम इस जरूरी कदम को उठाने के लिए सही ढंग, समय और जगह का इस्तेमाल करें.’

AI रेगुलेटरी बॉडी बनाने की जरूरत

गूगल के AI बॉस ने ‘फाइनेंशियल इंडस्ट्री रेगुलेटरी अथॉरिटी’ (FINRA) की तरह एक AI रेगुलेटरी बॉडी बनाने की बात कही. इसमें बड़े टेक्निकल एक्सपर्ट्स शामिल होंगे. हसाबीस का मानना है कि अमेरिका इस वॉचडॉग को बनाने के बारे में सोच सकता है. आर्थिक और तकनीकी दोनों ही स्थितियों के हिसाब से देखें तो वह इस ओर बढ़ सकता है.

हसाबीस के मुताबिक इसी वक्त लोग मिलकर जो करेंगे, वो यह तय करेगा की आगे की सभ्यता का अगला दौर कैसा होगा. AGI को दुनिया में सुरक्षित रूप से लाना वैज्ञानिक खोज और एक नए गोल्डन एरा में एंट्री करने में मदद कर सकता है. उनका यह भी मानना है कि इंसानियत जिस मोड़ पर आज खड़ी है, वो इंसानों के लिए एक ‘नए युग की शुरुआत’ से कम नहीं है.

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