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250 करोड़ जुर्माना भरकर भी ये कंपनी बुक्का फाड़ क्यों हंसती है?

UPS हर साल करोड़ों रुपये जुर्माना भरती है. मसलन किसी साल 200 करोड़, किसी साल 250 और फिर अगले साल 275 करोड़ रुपये फाइन के तौर पर न्यूयॉर्क सिटी के फाइनेंस डिपार्टमेंट को देती है. कंपनी के नाम पर साल के औसतन तीन लाख से भी ज्यादा नो-पार्किंग चालान कटते हैं. इतना सब के बाद भी कंपनी मौज में है.

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ये कंपनी साल के 300 करोड़ के फाइन के बाद भी इतनी खुश काहे है

हमने जानबूझकर नो-पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी की. फिर चालान हुआ तो बहुत दिल दुखा. गुस्सा आया लेकिन अपनी गलती पर नहीं बल्कि चालान करने वाले पर. दरेरा ये कि बस एक मिनट के लिए तो खड़ी की थी और चालान काट दिया. मरता क्या ना करता वाली कंडीशन थी तो चालान भर दिया. ये तो हुई आपकी और मेरी कहानी. मगर अब आगे जो हम आपको बताने जा रहे हैं उसे ज़रा गौर से पढ़िएगा. एक कंपनी है जो जानकर नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी करती है और साल के लगभग 300 करोड़ का चालान भरती है. लेकिन इसके बाद भी बिल्कुल दुखी नहीं होती.

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कंपनी का नाम UPS. अमेरिका की बहुबड़ी शिपमेंट कंपनी है. UPS हर साल करोड़ों रुपये का चालान भरती है. मसलन किसी साल 200 करोड़, किसी साल 250 और फिर अगले साल 275 करोड़ रुपये फाइन के तौर पर न्यूयॉर्क सिटी के फाइनेंस डिपार्टमेंट को देती है. कंपनी के नाम पर साल के औसतन तीन लाख से भी ज्यादा नो-पार्किंग चालान कटते हैं. इतने सब के बाद भी कंपनी मौज में है. 

टाइम इज मनी

UPS के लिए टाइम सबसे बड़ा सिरदर्द है. वैसे ये सिरदर्द तो हर शिपमेंट कंपनी को होता है क्योंकि अगर डिलेवरी टाइम पर नहीं हुई तो फिर रौला कैसे जमेगा. और इसी रौले को भरपूर जमाए रखने के लिए कंपनी ने अनोखा तरीका निकाला है. जुर्माना भरे जाओ और शिपमेंट टाइम पर डेलिवर किये जाओ.

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आप समझ ही गए होंगे कि कंपनी समय बचाने के लिए कहीं भी गाड़ी खड़ी कर देती है. कौन पार्किंग ढूंढे फिर गाड़ी पार्क करने में माथा पच्ची करे. इससे अच्छा जहां जगह दिखे वहीं ब्रेक मारो. टाइम, लेबर और फ्यूल, तीनों बचेंगे. फाइन का क्या. जितना भी लगे वो फाइन (अच्छा). इतना ही नहीं कंपनी टाइम पर डिलिवरी के लिए और भी बहुत कुछ करती है. जैसे इनकी गड्डी में लेफ्ट साइड का दरवाजा ही नहीं होता. बस डिलेवरी पर्सन के लिए एक हैन्डल होता है. गाड़ी के सारे रास्ते दाहिने यानी राइट की तरफ रखे जाते हैं. क्योंकि अमेरिका में राइट की तरफ ट्रैफिक कम होता है. अगर भरोसा नहीं तो हमारे दोस्त जय कपूर का वीडियो देख लीजिए. 

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बोले तो टाइम पर शिपमेंट डिलेवर करने और अपना टाइम खोटा नहीं करने के लिए कंपनी सारे जुगत भिड़ाती है. वैसे UPS कोई अकेली कंपनी नहीं जो ऐसा करती है. FedEx जैसी कंपनियों भी फाइन भरने को 'फाइन' मानती हैं.  

कंपनी ऐसा क्यों करती उसका अंदाजा भले आपने लगा लिया होगा मगर जो कंपनी करोड़ों रुपये का जुर्माना भर्ती है उसका कारोबार कितने का होगा, उसका अंदाजा लगाना शायद मुश्किल होगा. चिंता नक्को. हम बताते. साल 2022 का टर्न ओवर था 100 बिलियन डॉलर.

अब रुपये में बदलकर बहुत सारे जीरो लगाकर क्या ही हो जाएगा. कौन सा कंपनी हमारा चालान भरेगी.

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