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SSP को पूरी सुनवाई खड़े रखा, CJM भी नपेंगे, रेप केस में अफसरों पर क्यों बरसा हाई कोर्ट?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी को पेश न करने पर मेरठ के SSP को फटकार लगाई. कोर्ट ने CJM की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए प्रशासनिक जज को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

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कोर्ट ने एसएसपी को पूरे समय कोर्ट में खड़ा रखा (COURTSEY- HIgh Court Website)

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  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरठ के SSP को आदेश दिया कि वह पूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट में खड़ा रहे क्योंकि आरोपी को पेश करने में SSP असफल रहा।
  • यह आदेश उस स्थिति के कारण दिया गया जिसमें आरोपी को हाई कोर्ट में पेश नहीं किया गया, जबकि गैर-जमानती वारंट जारी था और CJM ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजा था।
  • कोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी क्योंकि उसने शादी कराने की शर्त पूरी नहीं की और SSP को भविष्य में कोर्ट आदेशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट में खड़े रहने का निर्देश दिया. वजह, एसएसपी साहब को कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था. आदेश एक रेप आरोपी को कोर्ट में पेश करने का था. इसके बावजूद SSP आरोपी को हाई कोर्ट में पेश करने में नाकाम रहे. कोर्ट ने SSP को भविष्य में सावधानी बरतने की हिदायत दी. इसके अलावा, हाई कोर्ट ने मेरठ के प्रशासनिक जज को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया.

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हाई कोर्ट ने रेप के आरोपी की जमानत भी रद्द कर दी, क्योंकि उसने बलात्कार के मामले में पीड़िता से शादी करने से इनकार कर दिया था. उसे इसी शर्त पर जमानत मिली थी कि वो पीड़िता से शादी करेगा. हाई कोर्ट ने कहा,

ये भी हैरानी की बात है कि मेरठ के CJM को इस कोर्ट के आदेश की जानकारी थी, और उन्हें ये भी पता था कि हाई कोर्ट ने आरोपी को इस कोर्ट के सामने पेश करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया है. इसके बावजूद, उन्होंने आरोपी को इस कोर्ट के सामने पेश करने का कोई निर्देश दिए बिना ही न्यायिक हिरासत में भेज दिया. ये मेरठ के CJM की घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता को दिखाता है.

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कोर्ट ने जमानत याचिका रद्द की

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने दिया. वे बलात्कार के एक मामले में पीड़िता द्वारा दायर की गई जमानत रद्द करने की अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे.

सुनवाई के दौरान, मेरठ SSP ने कोर्ट को बताया कि आरोपी को पहले पेश नहीं किया जा सका, क्योंकि वारंट के अनुसार आरोपी को CJM के सामने पेश किया गया था. इसके बाद CJM ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

(यह भी पढ़ें: शादीशुदा महिला से शादी का वादा, लगा रेप का आरोप; सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया)

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हाई कोर्ट ने SSP की गलती मानी

SSP को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश देते हुए हाई कोर्ट जज ने जोर देकर कहा कि गैर-जमानती वारंट का पालन कराने की जिम्मेदारी SSP की थी. इसलिए, यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य था कि आरोपी कोर्ट के सामने पेश हो. आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वो पीड़िता से शादी करेगा, लेकिन वो अपनी इस शर्त को पूरा करने में विफल रहा.

इसलिए, कोर्ट ने उसे पेश करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया था. शनिवार, 24 अक्टूबर को आरोपी हाई कोर्ट के सामने पेश हुआ, लेकिन उसने पीड़िता से शादी करने से इनकार कर दिया. इसके चलते कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी, जो पहले उसे पीड़िता से शादी करने के वादे के आधार पर दी गई थी.

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