स्मार्टफोन खरीदने का सबसे आसान तरीका क्या है. माने पैसों को काई नहीं लग रही तो EMI में स्मार्टफोन लेना सबसे प्रैक्टिकल तरीका माना जाता है. इसमें भी जीरो कॉस्ट/नो कॉस्ट EMI (zero-cost EMI) का अपना क्रेज है. देश में आईफोन सहित कई फ्लैगशिप डिवाइस की बिक्री का बड़ा हिस्सा EMI से ही आता है. लेकिन शायद जीरो कॉस्ट EMI से फोन मिलना बंद हो सकता है. रिटेलर एसोसिएशन AIMRA ने सभी ब्रांड से जीरो कॉस्ट EMI को बंद करने की अपील की है.
Samsung, iPhone जैसे धाकड़ स्मार्टफोन जीरो कॉस्ट EMI पर नहीं मिलेंगे?
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के चेयरमैन कैलाश लखयानी ने सुझाव दिया है कि इंडस्ट्री को जीरो कॉस्ट स्कीम (zero-cost EMI) को धीरे-धीरे खत्म करके उनकी जगह स्टैंडर्ड, ब्याज वाले कंज्यूमर लोन अपनाने चाहिए. AIMRA ने सैमसंग, वीवो, ऐप्पल, शाओमी, ओप्पो और रियलमी जैसे ब्रांड से इसे बंद करने की अपील की है.

ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के चेयरमैन कैलाश लखयानी ने सुझाव दिया है कि इंडस्ट्री को जीरो कॉस्ट स्कीम को धीरे-धीरे खत्म करके उनकी जगह स्टैंडर्ड, ब्याज वाले कंज्यूमर लोन अपनाने चाहिए. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "ऑटोमोटिव और हाउसिंग जैसे बड़े सेक्टर में कंज्यूमर लोन पर सीधे ब्याज लेना पहले से ही आम बात है. इसी मॉडल को स्मार्टफोन के लिए अपनाने से सभी स्टेकहोल्डर्स को काफी फ़ायदा होगा."
AIMRA ऐसा क्यों चाहता है?
AIMRA ने सैमसंग, वीवो, ऐप्पल, शाओमी, ओप्पो और रियलमी को लिखे लेटर में कहा है कि ज़ीरो-इंटरेस्ट पेमेंट प्लान की वजह से स्मार्टफोन ब्रांड्स को प्रोडक्ट की कीमत का 17-19 फीसदी खर्च उठाना पड़ता है. वे इस खर्च को सीधे फोन की रिटेल कीमत में जोड़ देते हैं, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं.
कहने का मतलब ये हुआ कि अगर कोई फोन मार्केट में 10 हजार रुपये में लिस्ट है तो जीरो कॉस्ट EMI प्लान में वो इतनी ही कीमत पर सेल होगा. क्योंकि फोन की कीमत ब्रांड को भी महीनों में मिलेगी तो वो रिटेलर को उस डिवाइस पर मुनाफा नहीं देगा या फिर बहुत कम देगा. जीरो कॉस्ट मतलब कस्टमर बढ़ाने का तरीका. दूसरी तरफ अगर 10 हजार में लिस्ट हुआ फोन सीधे-सीधे खरीदा जाए और रिटेलर डिस्काउंट भी दे दे तो भी उसको ठीक-ठाक पैसा बच जाएगा.
इंडस्ट्री एसोसिएशन के डेटा से पता चला है कि एक जैसे स्पेसिफिकेशन में हैंडसेट बेचने वाले ब्रांड्स की कीमतों में 'नो-कॉस्ट EMI' के साथ अंतर होता है. उदाहरण के लिए, कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, Realme C83 5G की कीमत Realme P4 Lite से ज़्यादा है, जबकि दोनों का हार्डवेयर एक जैसा है. Realme C83 5G वो प्रोडक्ट है जो रिटेल से सेल होता है.
जीरो कॉस्ट EMI खत्म करने के पीछे लखयानी का एक और तर्क है. उनके मुताबिक, ब्याज का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने से बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 48 महीने तक की लंबी अवधि की EMI ऑफर कर पाएंगी. अभी मामला 3 से 24 महीने का होता है.
हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट इस तर्क से सरोकार नहीं रखते. उनका मानना है कि ऐसा करने से ब्याज का बोझ सीधे उस ग्राहक पर पड़ेगा जो लोन पर प्रोडक्ट खरीद रहा है, जबकि जो ग्राहक तुरंत पूरा पेमेंट करेंगे, उन्हें यह प्रोडक्ट सस्ता मिल सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ज़ीरो-कॉस्ट स्कीम देने के लिए ब्रांड्स जो लागत उठाते हैं, उसकी तुलना में कंज्यूमर लोन पर लगने वाला ब्याज कम होता है. रिटेलर एसोसिएशन की मांग पर किसी भी ब्रांड से कोई जवाब नहीं आया है. आते ही हम आपको बताते हैं.
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क्या है जीरो कॉस्ट EMI?जीरो कॉस्ट EMI का गुणा-गणित थोड़ा ग्रे एरिया वाला है. इसमें ब्याज लगता भी है और नहीं भी. मगर एक बात पक्की है कि फ़ाइल चार्ज लगता है. माने 65 हजार के फोन पर 839 रुपये लगेंगे अगर आपने 12 महीने के लिए EMI का ऑफर लिया तो.
जीरो कॉस्ट EMI के लिए खास तौर पर बने कार्ड से कम महीने का लेनदेन करने पर फ़ाइल चार्ज से काम चल जाता है. लेकिन इस कार्ड को पहली बार बनवाने पर भी चार्ज लगता है. क्रेडिट कार्ड में अलग-अलग कार्ड पर अलग-अलग ऑफर होते हैं. कम महीनों वाली EMI जैसे 3/6/9 पर 17 फीसदी ब्याज लगता है. 12 और 24 महीने पर तो ब्याज लगेगा ही. जीरो तो कुछ नहीं होता. 65 हजार पर अगर 839 जोड़ लें तो 1 फीसदी चार्ज तो लगा. हालांकि 65 हजार एक बार में देने से 12 महीने में चुकाने में राहत ही मिलती है.
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