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अब साइबर फ्रॉड में पूरा अकाउंट नहीं होगा फ्रीज, RBI ने बदल दिए ये नियम

RBI के नए फ्रेमवर्क (RBI KYC draft rules) के अनुसार अब साइबर फ्रॉड या मनी म्यूल अकाउंट के शक में पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित रकम पर ही रोक लगाई जाएगी. माने अगर आपके बैंक अकाउंट में किसी तरह का संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई देता है तो आपको पूरा अकाउंट बंद होने का डर नहीं रहेगा.

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साइबर फ्रॉड के शक में पूरा बैंक खाता फ्रीज नहीं होगा

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  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने साइबर फ्रॉड या मनी म्यूल के संदिग्ध ट्रांजेक्शन में पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित राशि पर अस्थाई रोक लगाने वाले KYC नियम 2027 के ड्राफ्ट को जारी किया है।
  • इस ड्राफ्ट के पीछे 4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, जिसमें साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल गतिविधि से निपटने के लिए एसओपी बनाने का निर्देश दिया गया था, ताकि पूरी सेविंग्स फ्रीज न हो।
  • नए नियम के अनुसार बैंक संदिग्ध राशि पर अधिकतम 60 दिनों तक अस्थायी रोक लगा सकता है, ग्राहक को सूचना देगा और स्पष्ट जवाब मिलने पर रोक हटाई जाएगी, जिससे सामान्य ट्रांजैक्शन जारी रहेंगे।

Cyber Fraud की वजह से बैंक अकाउंट फ्रीज होने के कई मामले आपने पढ़े होंगे. अकाउंट में आया 100 रुपया भी पूरी सेविंग्स पर ताला लगवा देता है. सबसे ताजातरीन मामला तमिलनाडु से आया, जहां एक व्यक्ति ने पेट्रोल पंप पर ऑनलाइन भुगतान किया और उसके कुछ दिनों बाद उस पेट्रोल पंप का अकाउंट ही फ्रीज हो गया. दिलचस्प बात यह है कि यह कोई स्कैम नहीं है. आपका अकाउंट साइबर पुलिस ब्लॉक करवाएगी. बैंक कोई जवाब भी आपको नहीं देगा. लेकिन अब रिजर्व बैंक की तरफ से इस नियम में बदलाव (RBI KYC draft rules) की तैयारी की जा रही है.

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आरबीआई के नए फ्रेमवर्क के अनुसार अब साइबर फ्रॉड या मनी म्यूल अकाउंट के शक में पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित रकम पर ही रोक लगाई जाएगी. माने अगर आपके बैंक अकाउंट में किसी तरह का संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई देता है तो आपको पूरा अकाउंट बंद होने का डर नहीं रहेगा.

अस्थाई डेबिट होल्ड

रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से एक नया ड्राफ्ट जारी किया गया है. इसके तहत 1,000 रुपये या उससे ज्यादा का फर्जी ट्रांजेक्शन होने पर बैंक पूरे अकाउंट को फ्रीज नहीं करेंगे. बैंक अब केवल विवादित राशि पर ही अस्थायी रोक यानी डेबिट होल्ड लगाएंगे. नया ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें मनी म्यूल एक्टिविटी और साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए एक एसओपी (SOP) बनाने का निर्देश दिया गया था. इस नियम से ग्राहकों का पूरा पैसा बैंक में सिक्योर रहेगा और वे अपना नॉर्मल ट्रांजेक्शन जारी रख सकेंगे.

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ये भी पढ़ें: अकाउंट में आये 100 रुपये भी आपकी पूरी सेविंग्स पर ताला लगवा सकते हैं

RBI ने सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के आदेश को मानते हुए 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Know Your Customer - KYC) अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026' जारी किए हैं. यह सिस्टम KYC निर्देश 2025 में संशोधन करके लागू किया जा रहा है. इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू करना जरूरी होगा. हालांकि बैंक इसे पहले भी अपना सकते हैं. ड्राफ्ट में मुख्यतः नीचे बताई बातों को शामिल किया गया है.

60 दिनों की सीमा: बैंक संदिग्ध पैसों या खातों पर अधिकतम 60 दिनों के लिए अस्थायी डेबिट होल्ड (पैसे निकालने पर रोक) लगा सकते हैं, जब तक कि जांच एजेंसी या कोर्ट का अलग से आदेश न हो.

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तुरंत कार्रवाई: AI और मशीन लर्निंग टूल्स द्वारा 1,000 रुपये या उससे अधिक के संदिग्ध लेन-देन की पहचान होते ही बैंक तुरंत होल्ड लगाएंगे.

ग्राहक को सूचना और समय: बैंक ग्राहक को तुरंत डिजिटल या अगले दिन तक लिखित सूचना देंगे. ग्राहक को 20 दिनों के भीतर जवाब देने का अवसर मिलेगा.

फैसले का नियम: ग्राहक की सफाई से संतुष्ट होने पर बैंक तुरंत रोक हटा देगा. यदि कोई जवाब न मिले या बैंक संतुष्ट न हो, तो मामला 30 दिनों के भीतर साइबर पुलिस/पोर्टल को रिपोर्ट किया जाएगा. पुलिस से आगे कोई निर्देश न मिलने पर 31वें दिन रोक हटा दी जाएगी.

डेबिट कार्ड पर अलग नियम नहीं: यह रोक मुख्य रूप से बैंक खाते से डेबिट रोकने के लिए है, डेबिट कार्ड के लिए अलग से कोई नया नियम लागू नहीं किया गया है.

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