स्मार्ट और इंटरनेट. ये दो शब्द हमारी जिंदगी में अब आम हो चले हैं. लेकिन काम बड़ा खास करते हैं. फिर चाहे स्मार्टफोन हो, स्मार्ट स्पीकर हो, स्मार्ट कार और स्मार्ट फ्रिज. इंटरनेट का जिक्र इसलिए क्योंकि इन सभी को स्मार्ट बनाया तो इसी ने ही. कभी 'इडियट बॉक्स' कहलाने वाला टीवी भी इतना स्मार्ट हो चला है कि आपकी आवाज के एक इशारे पर बहुत कुछ कर देता है. बस आपके बोल मुंह से फूटे नहीं कि गाना चला दो और फट से 'डीजे वाले बाबू' बजना चालू. लेकिन एक स्मार्ट टीवी सिर्फ आपके आदेश पर काम कर दे, बस इस पैमाने पर उसे खरीद लेना सही नहीं है.
इन स्मार्ट टिप्स के बिना स्मार्ट टीवी खरीदा तो हो सकता है नुकसान
टीवी स्क्रीन के साइज की कितनी इम्पॉर्टेंस है?
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स्मार्ट टीवी खरीदने के स्मार्ट तरीके
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स्मार्ट टीवी
कितना बदल गया टीवी?
बीते दशकों में टीवी बहुत बदला है. 1927 में सेन फ्रांसिस्को में पहला श्वेत श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) टीवी आया. 60 के दशक में रंगीन हुआ. तब इसमें ताला और दरवाजा भी होता था. बाद में एचडी टीवी, फिर एलसीडी, एलईडी का जमाना आया. और अब ओलेड, 4K से होते हुए 8K वाले टीवी भी बाजार में आने लगे हैं. स्क्रीन भी इतनी पतली हो चली है कि कपड़े की तरह दीवार पर लटका दो.लेकिन तकनीक के उन्नत होने की एक दिक्कत है. वो ये कि इतना कुछ नया आ जाता है कि कई दफा कंफ्यूज हो जाते हैं. जैसे एलसीडी-एलईडी अभी भी सबसे ज्यादा मिलने वाले टीवी होते हैं. फिर फुल एलईडी टीवी हैं जिनका बुनियादी काम गहरे और हल्के रंग का समायोजन एकदम सही रखना होता है. पहले ऐसा सिर्फ महंगे टीवी में होता था. लेकिन अब बजट में भी आपको मिल जाएगा.
बात करें ओलेड की तो बेहतरीन कॉन्ट्रास्ट और प्योर ब्लैक या पिच ब्लैक के उच्चतम स्तर पाने का काम अब संभव हो चला है. कुल मिलाकर टीवी देखने का एक अलग ही अनुभव. वैसे ये अभी बहुत महंगे हैं और एलसीडी की तुलना में थोड़े काम ब्राइट होते हैं. बस यही कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम लेकर आए हैं कुछ बुनियादी टिप्स.
एक स्मार्ट टीवी में क्या-क्या होना चाहिए?
एक बात आप बिल्कुल तय कर लीजिए कि लेना अब आपको स्मार्ट टीवी है. भले आप इंटरनेट का इस्तेमाल न करते हों. क्यूंकि टीवी कोई रोज-रोज लेने वाली चीज तो है नहीं या फिर स्मार्ट फोन भी नहीं जो शायद आप 2-3 साल में बदल देते हैं. टीवी को एक किस्म का निवेश ही समझ लीजिए, क्यूंकि आमतौर पर आप इसको 5-7 साल तक उपयोग करते ही हैं और आने वाले 5-7 साल में इंटरनेट आपकी जिंदगी, आपके घर में घुस ही चुका होगा. तो स्मार्ट टीवी लेना ही समझदारी होगी.स्मार्ट टीवी लेना है ये तो पक्का हो गया, लेकिन जो बात सबसे पहले आपके दिमाग में आएगी वो है साइज़. देखिए कि आपके परिवार कि जरूरत क्या है. टीवी जहां पर रखना है वो एक कमरा है या फिर हॉल. उसके हिसाब से साइज़ को निर्धारित कीजिए. छोटा कमरा है जहां आप 2-3 फ़ीट की दूरी से टीवी देखने वाले हैं तो 32 इंच बहुत है. 5-6 फ़ीट की दूरी के साथ थोड़ा बड़ा कमरा है तो 40-43 इंच आपके लिए ठीक रहेगा और यदि हॉल है तो फिर 50-55 इंच का टीवी आपके लिए एकदम मुफीद होगा. विकल्प 65 इंच का भी है. लेकिन वो बड़े हॉल के लिए फिट है. साथ ही आपकी जेब पर भी फिट बैठना चाहिए, क्योंकि वो महंगे भी होते हैं.

साइज़ तो फिक्स हो गया. अब आप ब्रांड में दिमाग लगाएंगे. तो यहां हम आपसे कहेंगे कि ब्रांड के प्रभाव और ठप्पे पर आपको सबसे आखिर में जाना है. नामी गिरामी ब्रांड से इतर भी अच्छे स्मार्ट टीवी बाजार में उपलब्ध हैं.
अब बात पैसे की, तो जैसा हमने कहा कि टीवी तो लंबा चलने वाली चीज है. इसलिए थोड़ा बजट ज्यादा लेकर चलिए इससे आप अच्छा और कुछ सालों तक चलने वाला टीवी खरीद पाएं. बजट से मतलब लाख रुपये से नहीं है. आज की तारीख में 50 हजार की रेंज में आपको ढेरों टीवी मिल जाएंगे. आम तौर पर 49 इंच की स्क्रीन साइज़ के बाद Smart TV के दामों में ज़्यादा तेजी देखने को मिलती है. कीमत में ब्रांड का भी रोल होता है. Samsung, LG और Sony जैसे ब्रांड के स्मार्ट टीवी आपको महंगे मिलेंगे. वहीं, VU, Xiaomi, Thomson, OnePlus और Realme जैसे ब्रांड्स के प्रोडक्ट बजट और मिडरेंज सेगमेंट को ध्यान में रखकर मार्केट में आते हैं.
कुछ ऐसी भी कंपनी हैं जो 20-30 हजार रुपये के रेंज में ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करती हैं. यहां पर आपको भ्रमित नहीं होना. जो आपके बजट में बैठता है उसे ही लीजिए. अगर बजट को थोड़ा बढ़ाना संभव है तो ब्रांड्स के साथ जाना ज़्यादा ठीक रहेगा.
साइज़, बजट हो गया. अब आते हैं असली बात पर. वो है टीवी स्क्रीन का रेजोल्यूशन. कई बार आप टीवी घंटों-घंटों तक देखते हैं तो रेजोल्यूशन और रंगों का समायोजन बहुत जरूरी होता है. अगर आप कोई छोटा टीवी लेने वाले हैं और बजट टाइट है तो एचडी चल जाएगा. 40-43 इंच के टीवी के लिए फुल-एचडी स्क्रीन काफी है. 50-55 इंच या उससे बड़ी स्क्रीन वाले टीवी के लिए 4K रेजोल्यूशन होना ही चाहिए. इसके पीछे एक और वजह है. अब मार्केट में 4K कंटेंट भी उपलब्ध है.

ऑपरेटिंग सिस्टम और कनेक्टिविटी पोर्ट
बाहर का सब पता चल गया. अब जरा इस बात का भी ध्यान रखिए कि अंदर भी सब सही सलामत हो. यानी बात हो रही है ऑपरेटिंग सिस्टम की. इन दिनों एंड्रॉयड टीवी आम हैं. Samsung जैसे कुछ ब्रांड्स भी हैं जो अपने ओएस के साथ स्मार्ट टीवी मार्केट में उतारते हैं. अब मामला आपकी चाहत का है. एंड्रॉयड टीवी पसंद है तो वो लीजिए या फिर किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम से काम चल जाएगा तो उसे ही खरीद लाइए.एक बात का ध्यान रखिए. प्रोडक्ट वही लेना है जिसमें आपकी ज़रूरत के सभी ऐप्स के लिए सपोर्ट मौज़ूद है. क्योंकि अभी स्मार्ट टीवी की दुनिया में स्मार्टफोन की तरह अपडेट मिलना शुरू नहीं हुआ है. ऐसे में अगर किसी खास ऐप के लिए आपके स्मार्ट टीवी में सपोर्ट नहीं है तो ज़रूरी नहीं है कि वो भविष्य में आपका काम करे.
स्मार्ट टीवी है तो स्पीकर और दुनियाभर के अन्य उत्पाद भी आप लगाएंगे ही. तो यूएसबी पोर्ट और एचडीएमआई पोर्ट जितने ज्यादा मिलें उतना अच्छा. ब्लूटूथ कनेक्टिविटी है या नहीं, ये ध्यान से देख लेना वरना कहोगे कि हमने बताया नहीं.

HDMI & USB Port
आफ्टर सेल्स सर्विस
सर्विस सेंटर का अता पता भी देख लीजिए टीवी लेने से पहले. कहीं ऐसा न हो कि आप रहते कश्मीर में हैं और सर्विस सेंटर का पता हो कन्याकुमारी का. इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद है. बिगड़ भी सकता है और सर्विस सेंटर हुआ दूर तो जितने के ढोल नहीं उतने के मजीरे फूट गए वाली कहावत चरितार्थ हो जाएगी. वैसे इन दिनों ज्यादातर कंपनियां थर्ड पार्टी सर्विस देती हैं. इसमें आपकी सहूलियतों का भी ख्याल रखा जाता है. यहीं पर ब्रांड का रोल अहम हो जाता है.Advertisement









